'डबल श्री ने यमुना किनारे ऐसी मचाई तबाही, जिसकी अब कभी न होगी भरपाई'
जांच करने पहुंची कमिटी को आर्ट ऑफ लिविंग के वालंटियर ने यमुना से वापस कर दिया था.
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फोटो - thelallantop
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विश्व संस्कृति महोत्सव हुआ था न दिल्ली में. धूम मची थी. पता है क्या किया उसने. यमुना को चौपट करके रख दिया. श्री श्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के लिए कराया था. मगर यमुना के इको सिस्टम को ऐसा उजाड़ा कि उसकी भरपाई नहीं की जा सकती. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. ये बात एक्सपर्ट कमिटी ने NGT से कही है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को कमिटी ने बताया कि जिस जगह पर मेन इवेंट हुआ, वो जगह पानी से लबालब हो जाती थी. लेकिन अब वो जगह पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. इको सिस्टम को ऐसा नुकसान हुआ है, जो दिखाई नहीं देता, लेकिन उस नुकसान की कभी भरपाई नहीं की जा सकती.
कमिटी ने ये रिपोर्ट 28 जुलाई को NGT में पेश की. ये कमिटी NGT ने पूरी तफ्तीश करने के लिए बनायी थी. जिसमें 7 मेंबर हैं. कमिटी के हेड शशि शेखर हैं, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ वॉटर रिसोर्स के सेक्रेटरी हैं. शशि शेखर ने NGT से कहा, 'जहां बाढ़ आ जाती थी, उस जगह मेन इवेंट किया गया. ये जगह DND फ्लाईओवर और बारापुला ड्रेन के बीच में है. ये जगह थोड़ी-बहुत नहीं, बल्कि पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. जमीन पूरी तरह समतल हो गई है, कोई भी गड्ढा नजर नहीं आता. इस वजह से वहां न कोई पौधा है और न पानी में रहने वाले जीव.'
15 अप्रैल को कमिटी के मेंबर यमुना के किनारे स्टडी के लिए गए, लेकिन आर्ट ऑफ लिविंग के वॉलंटियर ने उन्हें जबरन वापस कर दिया. 6 जून को फिर से कमिटी के मेंबर गए और वहां के हालात की स्टडी की. इस ऑब्जरवेशन के सपोर्ट के लिए 15 मार्च और 10 मई को सेटेलाइट तस्वीरें ली गईं.

वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के बाद की तस्वीर.
कमिटी के मुताबिक इससे पानी भरने वाली छोटी-छोटी जगहें और कई वनस्पतियां खत्म हो गईं. पक्षियों, कछुओं, मेंढ़कों जैसे कितने ही जीवों के घर उजड़ गए. पूरी तरह बायोडायवर्सिटी को नुकसान हुआ.
इको सिस्टम के लिए जरूरी वेटलैंड पूरी तरह खत्म हो गया. पर्यावरण को हुआ नुकसान भले न दिखाई दे. लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. इको सिस्टम के लिए जो सूक्ष्म जीव जरूरी होते हैं, वो खत्म हो गए हैं.
रैंप और सड़क बनाई गई. जिसने वॉटर लेवल को नुकसान पहुंचाया. पान्टून पुल तैयार किया गया. जिसने पानी के फ्लो को प्रभावित किया. और यमुना को नुकसान पहुंचाया.
श्री श्री रविशंकर का वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल काफी विवादों में रहा. एनजीटी ने पर्यावरण को नुकसान के लिए उनकी संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जो काफी हील-हुज्जत के बाद भरा गया था. श्री श्री रविशंकर का कहना था कि उन्होंने पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है और वे इस मामले में न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को कमिटी ने बताया कि जिस जगह पर मेन इवेंट हुआ, वो जगह पानी से लबालब हो जाती थी. लेकिन अब वो जगह पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. इको सिस्टम को ऐसा नुकसान हुआ है, जो दिखाई नहीं देता, लेकिन उस नुकसान की कभी भरपाई नहीं की जा सकती.
कमिटी ने ये रिपोर्ट 28 जुलाई को NGT में पेश की. ये कमिटी NGT ने पूरी तफ्तीश करने के लिए बनायी थी. जिसमें 7 मेंबर हैं. कमिटी के हेड शशि शेखर हैं, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ वॉटर रिसोर्स के सेक्रेटरी हैं. शशि शेखर ने NGT से कहा, 'जहां बाढ़ आ जाती थी, उस जगह मेन इवेंट किया गया. ये जगह DND फ्लाईओवर और बारापुला ड्रेन के बीच में है. ये जगह थोड़ी-बहुत नहीं, बल्कि पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. जमीन पूरी तरह समतल हो गई है, कोई भी गड्ढा नजर नहीं आता. इस वजह से वहां न कोई पौधा है और न पानी में रहने वाले जीव.'
15 अप्रैल को कमिटी के मेंबर यमुना के किनारे स्टडी के लिए गए, लेकिन आर्ट ऑफ लिविंग के वॉलंटियर ने उन्हें जबरन वापस कर दिया. 6 जून को फिर से कमिटी के मेंबर गए और वहां के हालात की स्टडी की. इस ऑब्जरवेशन के सपोर्ट के लिए 15 मार्च और 10 मई को सेटेलाइट तस्वीरें ली गईं.

वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल के बाद की तस्वीर.
रिपोर्ट में नुकसान का ब्योरा
मेन इवेंट वाली जगह पूरी तरह डैमेज हो गई है. जमीन को समतल करने की वजह से पेड़-पौधों का नामोनिशान नहीं बचा. पानी में रहने वाले जीव भी बाकी नहीं बचे.कमिटी के मुताबिक इससे पानी भरने वाली छोटी-छोटी जगहें और कई वनस्पतियां खत्म हो गईं. पक्षियों, कछुओं, मेंढ़कों जैसे कितने ही जीवों के घर उजड़ गए. पूरी तरह बायोडायवर्सिटी को नुकसान हुआ.
इको सिस्टम के लिए जरूरी वेटलैंड पूरी तरह खत्म हो गया. पर्यावरण को हुआ नुकसान भले न दिखाई दे. लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. इको सिस्टम के लिए जो सूक्ष्म जीव जरूरी होते हैं, वो खत्म हो गए हैं.
रैंप और सड़क बनाई गई. जिसने वॉटर लेवल को नुकसान पहुंचाया. पान्टून पुल तैयार किया गया. जिसने पानी के फ्लो को प्रभावित किया. और यमुना को नुकसान पहुंचाया.
5 करोड़ का जुर्माना तो पहले ही लग चुका है
आर्ट ऑफ लिविंग ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा है कि उसने दोबारा से कमिटी बनाने की मांग की है और एनजीटी को अभी इस पर सुनवाई करनी है. उसके मुताबिक जब तक एनजीटी इस पर कोई फैसला नहीं देता, तब तक कमिटी की रिपोर्ट पर विचार करना ठीक नहीं है. एनजीटी को इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को करनी है.श्री श्री रविशंकर का वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल काफी विवादों में रहा. एनजीटी ने पर्यावरण को नुकसान के लिए उनकी संस्था 'आर्ट ऑफ लिविंग' पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जो काफी हील-हुज्जत के बाद भरा गया था. श्री श्री रविशंकर का कहना था कि उन्होंने पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है और वे इस मामले में न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.

