मिसाइलों से लैस फाइटर जेट उतारना चाहता था अमेरिका, श्रीलंका ने साफ न बोल दिया
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि उन्होंने अपने देश के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिका के लड़ाकू विमानों को उतारने की इजाजत देने से इनकार कर दिया.

श्रीलंका ने ईरान से जंग लड़ रहे अमेरिका को बड़ा झटका दिया है. अमेरिका के खास दूत सर्जियो गोर से मीटिंग के एक दिन बाद श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने अपनी संसद को बताया कि उन्होंने अपने देश में अमेरिकी फाइटर जेट उतारने की इजाजत देने से इनकार कर दिया.
उनके मुताबिक, अमेरिका अपने दो फाइटर जेट अफ्रीकी देश जिबूती से श्रीलंका में उतारना चाहता था, लेकिन श्रीलंका इस युद्ध में तटस्थ रहने के अपने फैसले पर बरकरार है, इसलिए उसे श्रीलंकाई जमीन पर अपने जेट उतारने की इजाजत नहीं दी गई. इससे पहले स्पेन और तुर्किए ने भी अमेरिका को युद्ध के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया था.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 20 मार्च को कहा,
“अमेरिका जिबूती (Djibouti) में अपने बेस से दो लड़ाकू विमान लाना चाहता था. इनमें 8 एंटी-शिप मिसाइलें लगी थीं. मार्च की शुरुआत में वह उन्हें मट्टला इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Mattala International Airport) पर उतारना चाहता था, लेकिन हमने इससे साफ मना कर दिया.”
दिसायनाके ने ये भी कहा कि उनके देश पर तमाम तरह के दबाव हैं, लेकिन ईरान और इजरायल-अमेरिका में छिड़े युद्ध में वो अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट एशिया में जंग के हालात से उनके देश में भी चुनौतियां बढ़ी हैं, लेकिन वो हार नहीं मानेंगे और न्यूट्रल (तटस्थ) रहने की हर संभव कोशिश करेंगे.
यह बयान देने से ठीक एक दिन पहले दिसानायके ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के स्पेशल दूत सर्जियो गोर से मुलाकात की थी. इस मीटिंग के बाद जो बयान जारी किया गया कि उसमें कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच समुद्री रास्तों और बंदरगाहों की सेफ्टी को लेकर चर्चा हुई. इसके अलावा श्रीलंका और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर भी अच्छी बातचीत हुई.
इसी बीच राष्ट्रपति दिसानायके के इस फैसले को श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री अली साबरी ने गर्व की बात कही है. इंडिया टुडे से खास बातचीत में अली साबरी ने कहा कि उन्हें अपने राष्ट्रपति पर गर्व है. उन्होंने एकदम सही फैसला लिया है. छोटे देशों को बड़े देशों के झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि ये लड़ाइयां हमारी नहीं हैं.
साबरी ने कहा कि श्रीलंका स्वतंत्र देश है और इसलिए अमेरिका चाहे कितना ही ताकतवर क्यों न हो, राष्ट्रपति दिसानायके ने जो फैसला किया है वो बिल्कुल सही है.
साबरी ने आगे कहा कि युद्ध के समय श्रीलंका हमेशा तटस्थ (neutral) रहा है. लड़ाई की जगह कूटनीतिक बातचीत से हर मसला सुलझाना चाहिए. उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप, बेंजामिन नेतन्याहू और ईरान के सुप्रीम लीडर को संदेश दिया कि हर समस्या बातचीत और समझौते से हल हो सकती है. युद्ध कोई समाधान नहीं है.
श्रीलंका ने इससे पहले हिंद महासागर में अमेरिकी हमले में नष्ट किए गए एक ईरानी जहाज के नाविकों को बचाने के लिए अभियान चलाया था. 4 मार्च को अमेरिका ने श्रीलंका के दक्षिणी शहर गॉल के पास ईरानी फ्रिगेट आइरिस DENA पर हमला किया था, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई थी. 32 नाविकों को बचा लिया गया था.
भारत से सैन्य अभ्यास के बाद ये जहाज विशाखापत्तनम से ईरान लौट रहा था. इस घटना के दो दिन बार एक दूसरे ईरानी जहाज आइरिस बुशहर को श्रीलंका ने 219 नाविकों के साथ शरण दी थी.
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