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जमानत मांगते कोर्ट में रो पड़े पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी, कहा- 'हमें जीने दो'

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के टीचर भर्ती घोटाले के आरोपी पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को जमानत नहीं दी.

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Arpita Mukherjee and Partha Chatterjee
अर्पिता मुखर्जी और पार्थ चटर्जी. (फाइल फोटो)
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धीरज मिश्रा
14 सितंबर 2022 (Updated: 14 सितंबर 2022, 11:52 PM IST)
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पश्चिम बंगाल के टीचर भर्ती घोटाले को लेकर राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के खिलाफ जांच चल रही है. इस बीच, उनकी कस्टडी बढ़ाने को लेकर जब बुधवार 14 सितंबर को उन्हें अदालत में पेश किया गया तो दोनों रो पड़े. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, चटर्जी ने जमानत की अपील करते हुए कहा कि उन्हें 'राजनीति का शिकार' बनाया गया है. राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें उनकी जिंदगी जीने दी जाए.

वहीं मामले की सह-आरोपी और चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी भी अदालत के सामने पेश हुईं और जमानत की मांग करते हुए रोने लगीं. दोनों आरोपियों को वर्चुअल माध्यम से कोर्ट के सामने पेश किया गया था. कोर्ट में पेश होने पर जज के सामने पार्थ चटर्जी ने कहा, 

'मैं जनता के बीच अपनी छवि को लेकर बहुत चिंतित हूं. मैं इकॉनमिक्स ऑनर्स का छात्र रहा हूं. मंत्री बनने से पहले नेता प्रतिपक्ष था. मैं राजनीति का शिकार हुआ हूं. ईडी मेरे घर और मेरे विधानसभा क्षेत्र में जाए और मेरे बारे में पता करे. मैं LLB पढ़ा-लिखा हूं. मुझे ब्रिटिश स्कॉलरशिप मिली है. मेरी बेटी ब्रिटेन में रहती है. मैं इस तरह के घोटाले में कैसे शामिल हो सकता हूं.'

‘पता नहीं कैसे इतने पैसे मिले’

रिपोर्ट के मुताबिक इतना कहते हुए पार्थ चटर्जी के आंखों में आंसू आ गए और वो रोने लगे. चटर्जी के बाद अर्पिता मुखर्जी वर्चुअल माध्यम कोर्ट के सामने पेश हुईं. उन्होंने कहा, 

'मुझे बिल्कुल कोई जानकारी नहीं है कि मेरे साथ ये सब कैसे हो गया. मुझे वास्तव में कोई जानकारी नहीं है कि प्रवर्तन निदेशालय को कैसे मेरे घर से इतने पैसे मिले हैं.'

इसके बाद कोर्ट ने मुखर्जी से सवाल किया कि जब ये सारे पैसे आपके घर से मिले हैं, तो निश्चित ही आप जवाबदेह हैं. इस पर उन्होंने कहा, 

'लेकिन मुझे इस पैसे के बारे में कुछ भी पता नहीं है. मैं फिल्म इंडस्ट्री में हूं. मैं एक मिडिल क्लास परिवार से आती हूं. मेरे पिता अब जीवित नहीं है. मेरी मां 82 साल की हैं और उनकी हालत खराब है. ईडी कैसे ऐसे छापेमारी कर सकती है.'

इसके बाद पार्थ चटर्जी ने कहा कि उन्हें जमानत दे दी जाए. उनके वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल पहले से ही जांच एजेंसी का सहयोग कर रहा है. चटर्जी ने कहा, 'मैं शांति से जीना चाहता हूं. कृपया मुझे अपना जीवन जीने दें. किसी भी स्थिति में मुझे जमानत दें.'

हालांकि, ईडी की विशेष अदालत ने जमानत से इनकार करते हुए चटर्जी और मुखर्जी की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है. अब उन्हें 28 सितंबर को कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा.

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