मुसलमान अब दूसरे नहीं तीसरे दर्जे के नागरिक, चुनाव में जीत की गारंटी नहीं, बोले आजम खान
नूपुर शर्मा पर आजम खान ने कहा, 'दूसरे धर्मों को गाली देना उनके संस्कार.'

उत्तर प्रदेश की रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं. प्रदेश में एक बार फिर से राजनीतिक पार्टियां ऐक्टिव मोड में नजर आ रही हैं. इसी बीच हाल ही में जेल से बाहर आए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) भी सक्रिय हो गए हैं. राज्य और देश में हो रहे घटनाक्रमों पर अपनी राय रख रहे हैं. हाल ही में आजम खान ने आने वाले चुनावों, मौजूदा हालातों और सपा के बारे में आज तक से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) से लेकर असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और प्रदेश में मुसलमानों की स्थति पर टिप्पणियां कीं.
हालांकि, बातचीत के दौरान जब आजतक से जुड़े कुमार अभिषेक ने उनसे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के बारे में पूछा, तो उन्होंने इसपर बोलने से इनकार कर दिया और कहा कि इस समय मुद्दा अखिलेश यादव नहीं बल्कि चुनाव है. उन्होंने कहा कि वे अपनी पार्टी के बारे में बोलकर मीडिया-टीवी चैनलों को टीआरपी बढ़ाने का मसाला नहीं देना चाहते हैं.
नूपुर शर्मा पर कही ये बातबातचीत के दौरान उन्होंने नूपुर शर्मा पर निशाना साधा. इस पूरे विवाद पर आजम का कहना है,
“उनके संस्कार होंगे, उनके माता-पिता ने उन्हें यही सिखाया होगा, दूसरे धर्म को गाली देना. मैंने तो कभी किसी धर्म के ईश्वर को गाली नहीं दी.”

दरअसल, नूपुर शर्मा को लेकर हाल ही में यूपी समेत देश के कई हिस्सों में बवाल हुआ था. उनकी एक टीवी चैनल पर पैगंबर पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर विदेशों से भी कड़ी प्रतिक्रियाएं आईं थीं.
आजम खान ने बीते 10 जून को प्रदेश में हुई हिंसा और उसके बाद हिंसा के आरोपियों के घर पर चले बुलडोजर पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा.
कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने खूब प्रचार प्रसार किया और वोट मांगे. इस पर जब सपा नेता से ओवैसी की मुखर मुस्लिम नेता की छवि के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा,
“ओवैसी सिर्फ चुनावों के समय ही मुखर होकर घूमते हैं. उनके मुखर होने का क्या नतीजा हुआ? इससे कुछ हासिल नहीं हुआ और सिर्फ चुनाव के समय मुखर होना काफी नहीं होता. चुनाव के पहले भी और बाद भी मुखर होना चाहिए.”

जब आजम से ये पूछा गया कि ओवैसी मुस्लिम लीडरशिप का स्पेस ले रहें हैं और इसको वे किस तरह से देखते हैं, तो उन्होंने तंज भरे अंदाज में जबाव देते हुए कहा,
'मुसलमानों को बनाया तीसरे दर्जे का नागरिक'"हम तो लीडर हैं ही नहीं. हम तो अपराधी हैं. हम कैसे लीडर हो सकते हैं. चोर, डकैत कहीं लीडर होते हैं? शराबियों की दुकान लूटने वाले कहीं लीडर हो सकते हैं, हम कहां लीडर हैं?"
आजतक से बातचीत के दौरान सपा नेता ने कहा कि देश के मुसलमानों को दूसरे नहीं बल्कि तीसरे दर्जे का नागरिक बना दिया गया है. उन्होंने कहा,
"हमारे जैसे पढ़े-लिखे परिवार पर बकरियां चुराने और शराब की दुकान से 16,000 लूटने जैसे मामले दर्ज कर जेल में ठूंस दिया गया तो आप समझ सकते हैं कि हम किस दर्जे के शहरी हो गए हैं. हम लोग तो दूसरे दर्जे के शहरी भी नहीं रहे, हम तो तीसरे दर्जे के शहरी हो गए."
उन्होंने कहा कहा कि उनके लिए हालात वैसे ही हैं, जैसे पहले थे. अंतर सिर्फ इतना है कि वो सुप्रीम कोर्ट के शुक्रगुजार हैं. कोर्ट ने कहा कि एक दो मुकदमे तो सही हो सकते हैं, लेकिन इतने मुकदमे सही नहीं हो सकते. आजम कहते हैं कि उनके ऊपर प्रदेश का एक नंबर का माफिया होने का आरोप लगाया गया और कई दर्जन मुकदमे दर्ज कर दिए गए. उन्होंने आगे कहा,
चुनावों में धांधली का आरोप"मेरे ऊपर इतने मुकदमे दर्ज थे, जितने वीरप्पन पर भी नहीं थे. पूरी दुनिया में इतने मामले किसी पर दर्ज नहीं होंगे, जितने मुझ पर...मैं तो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से कहता हूं कि मुझे उस में शामिल कर लो."
रामपुर में उपचुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि उनके लिए छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा चुनाव भी अहम है, लेकिन वे इस बार जीत का कोई दावा नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा,
“हम जीतने वाले से भी यही पूछ रहे हैं कि आप कैसे जीत गए, वह भी नहीं बता पा रहे हैं. हारने वाले से पूछता हूं कि आप कैसे हार गए तो वह भी नहीं बता पा रहे हैं तो अब जीत के दावे का कोई मतलब नहीं है. दावा तो हम (सपा पार्टी) इस बात का भी कर रहे थे कि समाजवादी पार्टी सरकार बनेगी लेकिन नहीं बनी.”
आजम खान ने आगे कहा कि जब चुनाव के हाल इस तरह के हैं और नतीजों के ये स्वरूप हैं, तो कब क्या हो जाएगा तो इस पर कुछ भी कहना मुश्किल है. उन्होंने रामपुर की पांचों विधानसभा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां 5 विधानसभा हैं, यहां के कमिश्नर दो पर आ आए तो हम हार गए. उन्हें तो पांचों पर जाना चाहिए था. आजम ने कहा कि इस चुनाव को लेकर लोग ऐसा कह रहे हैं कि फिर से प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग होगा. मैं तो 27 महीने से जेल में था इसलिए मुझे मालूम नहीं की यहां क्या बदला.

इसके अलावा सपा नेता से पार्टी और अखिलेश यादव के साथ संबंधों के बारे मे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अपनी पार्टी से गिले-शिकवे की अगर बात करूं, तो उससे हासिल क्या होगा. सपा ने तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं कराए थे, इसलिए पार्टी से नाराज होने की कोई वजह नहीं है. आपकी टीवी की टीआरपी और आपकी खबरों के लिए तो ठीक है, लेकिन कुछ हासिल होने को तो है नहीं.
"क्यों अपने पैरों पर अपने हाथ से कुल्हाड़ी मारूं और जिस शाख पर बैठा हूं उसे ही क्यों काटूं."
पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल मुद्दा अखिलेश यादव नहीं है चुनाव मुद्दा है, इसलिए अखिलेश पर बातें फिर कभी करेंगे. वहीं रामपुर में अपने राजनीति प्रतिद्वंदी नवाब नवेद मियां के बारे में आजम खान ने कहा कि रामपुर में तो अब कोई नवाब नहीं है, नवाब तो खत्म हो गए. ये नवेद मियां कौन हैं, क्या ये ठेला लगाते हैं. उन्होंने कहा कि नवेद के नाम के तो न जाने कितने लोग हैं.

