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रजनीकांत ने किया नेताजी बनने का ऐलान, तमिलनाडु में कितना कमाल कर पाएगी उनकी पार्टी?

पार्टी लॉन्च करते हुए रजनीकांत ने कहा- अभी नहीं तो कभी नहीं.

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रजनीकांत ने अपनी पार्टी की लॉन्चिंग का ऐलान करते हुए कहा, तमिलनाडु की तकदीर बदल दूंगा. (फोटो - इंडिया टुडे)
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मयंक
3 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 3 दिसंबर 2020, 06:49 PM IST)
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साउथ इंडिया में फिल्मी पर्दे के भगवान कहे जाने वाले रजनीकांत ने नेताजी बनने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने अपनी पॉलिटिकल पार्टी लॉन्च करने की घोषणा की है. बताया कि पार्टी का नाम 31 दिसंबर को अनाउंस करेंगे. आइये इस रिपोर्ट में जानते हैं कि रजनीकांत के पॉलिटिक्स में आने से कौन-से सियासी समीकरण बदलेंगे.

पार्टी लॉन्च करते हुए क्या कहा?

अपने समर्थकों में थलाइवा के नाम से मशहूर रजनीकांत ने 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने जानकारी दी कि 31 दिसंबर को वह अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान करेंगे और फिर अगले साल जनवरी में इसे लॉन्च करेंगे. उन्होंने लिखा- अभी नहीं तो कभी नहीं. इसके बाद, चेन्नई स्थित आवास पर रजनीकांत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने कहा,
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रजनीकांत ने कहा कि चुनाव के बाद वह ऐसी सरकार बनाएंगे, जो जाति, धर्म और सम्प्रदाय से ऊपर उठकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि वह अपनी सरकार बनाकर राज्य की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह से बदल देंगे। उनकी सरकार सबकी बेहतरी के लिए काम करेगी। 31 दिसंबर को ही किया था ऐलान 2017 के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को रजनीकांत ने चैन्नई के श्री राघवेंद्र कल्याण मंडपम में अपने फैंस के सामने ये ऐलान किया था कि वो राजनीति में एंट्री ले रहे हैं. उन्होंने राजनीति में आने को वक़्त की ज़रुरत बताते हुए कहा था कि अगले चुनावों में मैं एक पार्टी बनाऊंगा, और तमिलनाडु की सभी सीटों पर चुनाव लड़ूंगा. 2017 में उनके ऐलान के बाद साउथ के बड़े एक्टर कमल हासन ने भी रजनीकांत को बधाई दी थी. तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हो चुके कमल हासन ने एक बार कहा था,
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रजनीकांत ने 2017 में अपनी पॉलिटिकल एंट्री का ऐलान करते हुए ये भी कहा था कि अगर वह लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके तो तीन साल में ही राजनीति से संन्यास ले लेंगे.

कैसे बदलेंगे तमिलनाडु की राजनीति के समीकरण?

तमिलनाडु की राजनीति में जयललिता और करूणानिधि के निधन के बाद से एक बड़ा पॉलिटिकल खालीपन बन गया है. वहां की क्षेत्रीय पार्टियों के अलावा बीजेपी भी काफी जोर लगा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बीजेपी अगर तमिलनाडु में बड़ा दांव खेलना चाहती है तो उसे रजनीकांत को अपनी ओर करना पड़ेगा. लेकिन रजनीकांत का हालिया रवैया इसके उलट नज़र आता है. हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह चेन्नई के दो-दिवसीय दौरे पर गए थे. इस दौरान रजनीकांत ने उनसे नहीं मिलने का निर्णय लिया था. इसका एक ये मतलब निकाला जा रहा है कि रजनीकांत खुद को बीजेपी की पॉलिटिक्स से इतर एक नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं. हालांकि एक बात ये भी है कि अगर रजनीकांत अलग से चुनाव लड़ना भी चाहें तो उनके पास मौजूदा पार्टियों, जैसे DMK और AIADMK जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर फिलहाल नहीं है. बीजेपी की बात करें तो कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली और कोयम्बटूर को छोड़कर उसका फिलहाल ज़्यादा बड़ा बेस नहीं है. बीजेपी के फेवर में तमिलनाडु का ब्राह्मण समुदाय दिखता है, मगर वो भी तमिलनाडु की कुल जनसंख्या का 2 से 3 प्रतिशत मात्र है. इस बीच, बीजेपी के स्टेट इंटेलेक्चुअल यूनिट के प्रेजिडेंट रा अर्जुनमूर्ति ने पार्टी से इस्तीफ़ा देकर रजनीकांत का दामन थाम लिया है. उन्हें रजनीकांत की पोलिटिकल ऑर्गेनाईजेशन रजनी मक्क्ल मन्द्रम (RMM) का चीफ़ को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है. 1996 से ही है रजनीकांत का इंतज़ार 1996 में जब रजनीकांत ने जयललिता की सरकार के खिलाफ आवाज़ उठायी थी, तभी से उनके राजनीति में आने चर्चे शुरू हो गए थे. हालांकि तमिलनाडु के वरिष्ठ पत्रकार ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया था कि भले ही 1996 में रजनीकांत की बात को सराहा गया हो, मगर 1998 और 2004 के चुनावों में रजनीकांत का कोई ख़ास असर नहीं रहा. इतने साल पहले की बात अगर छोड़ भी दें तो भी पिछले तीन सालों में काफी कुछ बदल गया है. अगले साल अप्रैल-मई के दौरान राज्य में विधानसभा चुनाव होंगे. उसमें रजनीकांत के अलावा कमल हासन और 2018 में बनी दिनाकरण की पार्टी AMMK भी होगी. इसके अलावा एक अहम बात ये है कि रजनीकांत पहले कह चुके हैं कि वो चीफ़ मिनिस्टर की पोस्ट नहीं चाहते हैं. वो एक काउंसिल बनाएंगे, जो एक जवान मुख्यमंत्री नियुक्त करेगी. ऐसा इसलिए कि वो ज्यादा से ज्यादा यंगस्टर्स को अपनी पार्टी में मौका देना चाहते हैं.

दिलचस्प होगा इस बार का चुनाव

तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में थलाइवा की एंट्री के बाद अब आने वाला विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प हो सकता है. साउथ की राजनीति के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वहां हीरो वर्शिपिंग का कल्चर है. यहां के नेता ‘लार्जर देन लाइफ’ वाली छवि के होते हैं. MGR, करूणानिधि, जयललिता, वाई.एस. राजशेखर रेड्डी जैसे नेताओं की पूरी कतार है, जिन्हें जनता अपना हीरो मानती रही. रजनीकांत ने तमिलों के बीच लोकप्रियता के नए पैमाने गढ़े हैं. देखना होगा कि फिल्मी पर्दे के बाद वो सियासी दुनिया में कितना दमखम दिखा पाते हैं.

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