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देश में कोरोना के केस बढ़े तो सोनिया गांधी ने वैक्सीन पर क्या कहा?

'लड़ाई कोविड के खिलाफ है, यह कांग्रेस या अन्य राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ नहीं है.'

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सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के कोरोना मैनेजमेंट पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. (तस्वीर- PTI)
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ओम
27 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 27 अप्रैल 2021, 09:41 AM IST)
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कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष और रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कहा है कि कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर के ख़िलाफ़ मोदी सरकार पूरी तरह फेल हो गई है. उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ने में सरकार ने पूरी तरह से लापरवाही की है और लोगों को खुद के ऊपर छोड़ दिया है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना के बढ़ते मामलों पर ध्यान देने और उसके लिए उपाय करने के बजाय सरकार का पूरा ध्यान विधानसभा चुनावों पर था. और उनका ये दोहरापन माफ़ी के लायक नहीं है. सोनिया गांधी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,
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कांग्रेस पार्टी क्या कर रही है? सोनिया गांधी ने कहा कि हम लोगों के साथ मिलकर सरकार पर दवाब बना रहे हैं कि लोगों की जान से ज्यादा कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. सरकार का जो रवैया है वो आपराधिक और अचंभित करने वाला है. ऐसा लग रहा है जैसे देश में सरकार ने सभी जिम्मेदारियों से सन्यास ले लिया हो. सोनिया गांधी ने कहा कि हमारा दूसरा काम अपने पार्टी संगठन के माध्यम से लोगों तक मदद पहुंचाने का है. हमारी पार्टी ने सभी राज्यों में कंट्रोल रूम बनाए हैं. हम अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर जरूरतमंदों की हर संभव मदद कर रहे हैं. केंद्र को क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए? कांग्रेस नेता ने आगे कहा,  इस वक्त सरकार को सभी संसाधनों का इस्तेमाल करके देशभर के अस्पतालों में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करना चाहिए. देशभर में ऑक्सीजन की कमी से लोगों के मरने की खबरें दिल दहलाने वाली है. भारत दुनियाभर में सबसे अधिक ऑक्सीजन प्रोड्यूस करने वाले देशों में शामिल है. हम रोज 7,500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं. हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त ऑक्सीजन है. तो क्या सरकार हमें ऑक्सीजन की मौजूदा कमी का कारण बताएगी?नवंबर से संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को ऑक्सीजन के लिए व्यवस्था करने के लिए कहा था. सरकार ने इस रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
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सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर जरूरतमंदों की हर संभव मदद कर रही हैं. (फाइल फोटो)

इसके साथ ही सोनिया गांधी ने कहा कि सरकार को बेड्स की संख्या बढ़ाने पर जोर देना चाहिए और टेस्टिंग को भी बढ़ाना चाहिए. आंकड़ों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए. कांग्रेस शासित राज्य और वैक्सीन  सोनिया गांधी ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के पास पर्याप्त ऑक्सीजन हैं. पंजाब और राजस्थान ने वैक्सीनेशन की दिशा में अच्छा काम किया है. यहां तक कि महाराष्ट्र में भी अब संक्रमण की रफ्तार कम होने लगी है.उन्होंने सरकार की नई वैक्सीनेशन पॉलिसी पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी देश में इतनी असंवेदनशील और विभाजनकारी वैक्सीन पॉलिसी नहीं है. हमारे देश में वैक्सीन की 5 तरह की कीमतें हैं. हमारे अपने नागरिकों को वैक्सीन एक्सपोर्ट हुई कीमतों से ज्यादा पर देना पड़ेगा. ये कैसे उचित है? भारत सरकार को देश में सभी को फ्री वैक्सीन देना चाहिए. प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाया जाए  सोनिया गांधी ने प्रवासी मजदूरों के बारे में कहा कि उन्हें स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित घर पहुंचाया जाना चाहिए. और सरकार को मनरेगा (MGNREGA) कामों को बढ़ाकर उन्हें अपने क्षेत्र में रोजगार देना चाहिए. इसके साथ ही सभी मजदूर परिवारों को बिना किसी देर के 6 हज़ार रुपये प्रति महीने देना शुरू करना चाहिए. 'ये लड़ाई हमारी-आपकी नहीं' सोनिया गांधी का कहना है कि पिछले एक साल से कांग्रेस पार्टी ने सरकार को पूरा सहयोग दिया है. लेकिन मोदी सरकार ने जिस प्रकार मेरे, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के सुझावों पर घृणा के साथ जवाब दिया, उससे मुझे बहुत दुख हुआ. ये समय विपक्षी नेताओं पर हमला करने का है या साथ काम करने का है? हमारा मानना है कि कोरोना से युद्ध 'आपके बनाम हमारे' बीच की लड़ाई नहीं है, लेकिन ये 'हमारे और कोरोना' के बीच की लड़ाई जरूर है. इसलिए यह लड़ाई राजनीतिक से परे है. हमें इस लड़ाई को एक राष्ट्र के रूप में मिलकर लड़ना होगा. मोदी सरकार को यह महसूस करना चाहिए कि लड़ाई कोविड के खिलाफ है, यह कांग्रेस या अन्य राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ नहीं है. इस लड़ाई में हमें सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साथ लाना होगा. लेकिन दुर्भाग्य से मोदी सरकार ने कभी ऐसा प्रयास नहीं किया है. चुनावी रैलियों के सवाल पर क्या कहा कोविड के दौरान चुनावी सभाओं पर सोनिया गांधी ने कहा कि सही है कि किसी महामारी के बीच इस तरह की चुनावी रैलियां नहीं होनी चाहिए. मैंने अपनी पार्टी में ये सवाल उठाया भी. लेकिन आप अकेले इसे नहीं रोक सकते. ये चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के निर्देश पर हो रहा था. कम से कम हमारी पार्टी ने इसे कम किया और कुछ समय पहले बंद किया. हालांकि इतना काफ़ी नहीं था.

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