अफ्रीका के देशों में छोटा सा देश है गांबिया. पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ गांबिया.छोटा मतलब अपने छोटे से राज्य मेघालय से भी साइज़ में आधा. हम दो हमारे चार का नारापॉपुलर है तो वहां से लोग बाहर के देशों में रिफ्यूजी और माइग्रेंट के तौर पर जातेरहते हैं. वैसे तो कृषि प्रधान देश है मगर इसके पास बेहद खूबसूरत बीच हैं, सस्तादेश है तो यूरोप के सैलानियों का वैसा ही हॉलीडे डेस्टीनेशन है जैसा अपने यहां वालोके लिए सिंगापुर के बदले गोवा. मतलब कम पैसे में अच्छी वाली फीलिंग.मगर इस छोटे से देश के राष्ट्रपतीज़ (गलत नहीं है दो राष्ट्रपति हैं वहां फिलहाल)इस समय मुश्किलों में हैं. ये भी कहा जा सकता है कि उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूटपड़ा है.हुआ ये कि गांबिया के राष्ट्रपति जामेह इस बार चुनाव में हार गए. 1994 सेराष्ट्रपति बने हुए थे सोच बैठे थे कि राष्ट्रपति बनकर ही मोक्ष को प्राप्त होंगे.मगर हार गए, अब हार गए तो बाइज़्जत चले जाते कुछ और धंधा पानी देखते. मगर जामेहबाबू अड़ गए जैसे बचपन में बल्ले वाला लड़का अपनी डबल चल्ला के लिए अड़ जाता है.बोले चाहे जो कर लो मगर पद नहीं छोड़ूंगा.पुराने राष्ट्रपति जामेहदूसरी तरफ नए चुने गए अडामा बैरो दूसरे अफ्रीकी देशों के पास चले गए कि इस आदमी कोहटाओ. ब्रिटेन ने भी अपने यहां की ट्रैवलिंग एजेंसी ‘टॉमस कुक’ को कह दिया है किदेश से सारे यात्रियों को वापस बुला लिया जाए. अफ्रीकी देशों ने भी कहा है कि अगरराष्ट्रपति जामेह ने पद नहीं छोड़ा तो गांबिया में सेना भेजकर उन्हें हटाया जाएगा.है न खूबसूरतअडामा बैरो अभी पड़ोसी देश सेनेगल में हैं. इस बीच उनके लिए बड़ी बुरी खबर आई है.अडामा के 8 साल के बेटे हबीबु को कुत्ते ने काट लिया. हबीबु की अस्पताल ले जाते समयमौत हो गई. अडामा बैरो कट्टर मुस्लिम हैं उनकी दो पत्नियां हैं. हबीबु उनके चारबच्चों में से एक था. अडामा उसके अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाए.नए राष्ट्रपति अडामा बैरोहमारी सहानुभूति अडामा बैरो के साथ है, साथ ही हम ये भी चाहते हैं कि बिना किसी खूनखराबे के गांबिया का संकट निपट जाए ताकि यूरोप तमाम सैलानियों और गांबिया के लोगोंकी ज़िंदगी मज़े से कटती रहे.