कहावत है कि दुनिया तीन एपल (सेब) के ज़रिए से बदली. पहला जो ऐडम ने ईव को दिया,दूसरा जो न्यूटन के सामने गिरा और तीसरा एपल कंप्यूटर्स. 24 फरवरी 1955 को पैदा हुएस्टीव अपने दुनिया भर में मोटिवेशनल फिगर माने जाते हैं. एपल प्रोडक्ट्स के स्टाइलके दीवाने दुनिया भर में भरे पड़े हैं. आई फोन खरीदने के लिए किडनी बेचने कीकहानियां तो आपने सुनी ही होंगी. मगर एपल के ये प्रोडक्ट्स शुरू से ऐसे नहीं थे.गैरेज से शुरू हो कर दुनिया का सबसे बड़ा टेक्नॉलजी ब्रांड बनने तक एपल ने कई उतारचढ़ाव देखे हैं. स्टीव ने महज़ 56 साल की उम्र में दुनिया को 5 अक्टूबर 2011 केदिन ही अलविदा कहा था. स्टीव जॉब्स को याद करते हुए देखिए एपल से जुड़ी कुछ खासतस्वीरें.लकड़ी का कंप्यूटरपहला मैक कंप्यूटर स्टीव के गैराज में बना था. लकड़ी की बॉडी में इसकी मशीन फिट कीगई थी. स्टीव प्रोग्रामर या इंजीनियर नहीं थे. मगर डिज़ाइन की गहरी समझ रखते थे.स्टीव का कहना था कि एक खूबसूरत डिज़ाइन उन्हें स्तब्ध कर देती है. एपल ने हीकंप्यूटर में अलग-अलग फॉन्ट्स का इस्तेमाल शुरू किया.Source- ilmessaggero लैंडलाइन वाला आई फोनपहला आईफोन 2006 में नहीं 1983 में आया था. ये एक लैंडलाइन फोन था जिसमें स्टायलसवाली टच स्क्रीन थी. उस समय इस डिज़ाइन को समय से बहुत आगे माना गया. क्योंकि तबईमेल और इंटरनेट शुरुआती स्टेज में ही था. वैसे ये प्रोडक्ट कभी मार्केट में नहींआया. ये समझो कि दिखा के छोड़ दिया.पहला मोबाइल वाला आई फोनपहला आई फोन एपल ने नहीं मोटोरोला ने लॉन्च किया था. मोटो रॉकर नाम का ये मोबाइलपहली ऐसी डिवाइस थी जिसमें आइट्यून्स का फीचर था. उस दौर में लोगों को ये फीचर कुछज़्यादा समझ नहीं आया. तो ये प्रयोग कुछ खास नहीं चला. बाद में एपल ने जब अपने फोनखुद बनाना शुरू किए तो दुनिया में तहलका मच गया.कलाई पर कंंप्यूटरये कॉन्सेप्ट 1991 में आया. इसकी तस्वीरें जापान की एक्सिस मैगज़ीन में छपी थीं.कुछ लोग कहते हैं कि ये एपल के तब के सीईओ का एक मज़ाक भर था. क्योंकि ये प्रोडक्टभी वो बाज़ार में नहीं लाए. वैसे इसे आज की एपल आई वॉच का पूर्वज मान सकते हैं.दो स्क्रीन वाला कंप्यूटरये भी 90 के दशक में चर्चा में आया. पर सीरियसली, दो स्क्रीन वाला कंप्यूटर, सचमें. आखिर क्यों भाई?स्टीव ने फिल्में भी बनाई हैं. स्टीव जॉब्स को 1985 में उनकी खुद की ही कंपनी से निकाल दिया गया था. 1997 मेंउन्होंने वापस एपल जॉइन कर ली थी. मगर इससे पहले 1986 में एक और कंपनी शुरू कीपिक्सार. 44 लोगों की इस कंपनी ने थ्री डी एनीमेशन बनाना शुरू किया और 1996 मेंडिज़नी के साथ मिलकर पिक्सार मे दुनिया की कुछ सबसे हिट ऐनीमेशन फिल्म्स बनाई हैं.पिक्सार की बनाई फिल्मों में 'टॉय स्टोरी', 'द बग्स लाइफ', 'फाइंडिंग नीमो' और'मॉन्स्टर इंक' जैसी फिल्में शामिल हैं.फोटो- पिक्सार स्टूडियोग्रैमी जीत चुके हैं स्टीव जॉब्सग्रैमी अवॉर्ड्स संगीत के लिए दिए जाते हैं. स्टीव जॉब्स ने आई ट्यून और आई पॉड केज़रिए संगीत की दुनिया को बदल कर रख दिया. आई ट्यून स्टोर ने देखते ही देखते दुकानपर जाकर सीडी, कैसेट खरीदने के दिनों को इतिहास बना दिया. लोग सीधे डाउनलोड करनेलगे. स्टीव को मरने के बाद संगीत में इस योगदान के लिए ग्रैमी अवॉर्ड दिया गया.एपल के लॉन्च पर स्टीव जॉब्सआखिर क्यों है एपल कंप्यूटर्स और स्टीव जॉब्स खासएपल की दीवानगी पर तमाम चुटकुले बनते हैं. तमाम बहस होती हैं. मगर स्टीव जॉब्स नेएपल के ज़रिए दुनिया को एक नई सोच दी. इससे पहले धारणा थी कि जितनी हाई-फाईटेक्नॉलजी उतने ज़्यादा बटन. नोकिया कम्युनिकेटर और ओटू के फोन याद करिए. हर कोनेमें एक अलग बटन. लोग देखकर ही डर जाएं. स्टीव ने कहा कि सबसे अच्छी टेक्नॉलजी वो हैजिसमें कोई बटन ही न दबाना पड़े. आज भी दुनिया के सारे टच स्क्रीन फोन के पीछेस्टीव का ही मूल डिज़ाइन काम कर रहा है. सामने एक बटन, साइड में आवाज़ के कंट्रोलऔर पीछे कैमरा. मोबाइल में मेगापिक्सल कितने भी बढ़ गए हों हम तकनीक के मामले मेंस्टीव जॉब्स की सोच के बाद अगला मुकाम नहीं छू पाए हैं.सुनिए उनके सबसे प्रसिद्ध और मोटिवेश्नल भाषणों में से एक, जिसमें वो अपने कैंसर औरउससे लड़ने की बात कर रहे हैं.https://www.youtube.com/watch?v=D1R-jKKp3NAये आर्टिकल अनिमेष ने लिखा है.--------------------------------------------------------------------------------दी लल्लनटॉप शो में पहुंचें: ये भी पढ़ें :बड़े पापा नोकिया 3310 लौट तो रहे हैं, पर ये फीचर और जबराट हैंफोनों के बिग डैडी नोकिया 3310 आ रहे हैं मार्केट में नये फीचर्स के साथ!क्या बला है ये 'बिट कॉइन' जो कैशलेस इकॉनमी में भी काला धन जमा करा देती हैव्हाट्सएप के नए फीचर के बाद अब ऑनलाइन ब्याह होना बस बचा है