22 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 21 जुलाई 2016, 01:45 AM IST)
फोटो - thelallantop
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अगर ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप यानी सोशल मीडिया के अलावा मेन स्ट्रीम मीडिया पर नजर रखते हो. तो कुछ दिन पहले की खबरें याद होंगी. जिनमें राजनीतिक पार्टियों के सोशल मीडिया फॉलोवर निकलते हैं. थाईलैंड, सिंगापुर, कनाडा में. और एक ही पोस्ट एक ही टाइम पर दुनिया के सैकड़ों एकाउंट्स से शेयर होती है. ये पार्टियों की सोशल मीडिया हैंडल करने वाली टीमों का कमाल है. जो पार्टियों की पब्लिसिटी करती हैं.वैसे ही सोशल मीडिया पर तमाम वीडियो और फोटो आते हैं. सीरिया, ईराक की फोटो को कश्मीर का बता के जहरीले कोट्स. सऊदी अरब के वीडियोज को इंडिया का बताकर झूठ फैलाया जाता है. किसी नेता का फर्जी फोटो, किसी एक्टर का फर्जी फोटोशॉप्ड बयान और तमाम सारे झूठ इंटरनेट के एक सर्च बटन पर आ गिरता है. ये सब ऊपरवाले का दिया परसाद नहीं है. सब यहीं आसपास के खुरपेंची और लालची लोगों का फैलाया जाल है. और इस धंधे में बड़ा माल है.
इस तरह के झूठ फैलाने वाली एक तिकड़ी का स्टिंग किया इंडिया टुडे ने. इस झूठ और जहर फैलाने वाले धंधे में लगे एंटरपेन्योर्स ने खुलकर छिपे कैमरे में अपने प्लान्स, तरीकों और रेट्स के बारे में बताया. लल्लन इसको आसान तरीके से बताएगा. स्टेप बाई स्टेप.
कहानी के मुख्य कलाकार
रणवीर कुमार: नोएडा में इनकी कंपनी है. वीबग्योर टेक्नोसिस्टम्स के नाम से. इनके साथ काम करने वाला पूरा स्टाफ है. जो कस्टमर लाता है, स्ट्रैटजी बनाता और उन पर काम करता है.
जतिन अरोरा: दिल्ली स्कैंफ सोल्यूशन्स के नाम से दुकान है भैया की.
स्वाति अवस्थी: नोएडा की ही कंपनी है डीएस मीडिया लिंक. कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हैं स्वाति.
काम करने का तरीका. इतनी निगेटिव ब्रांडिंग कि लोग थूकें नाम पर
एक फर्जी पॉलिटिकल पार्टी का आदमी बनकर रिपोर्टर इनके पास पहुंचा. सब कुछ जानने. तो सबसे पहले पता लगा इनके काम करने का तरीका.
रणवीर कुमार बताता है. इसे कहते हैं ORM. माने ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट. जैसे PR एजेंसीज करती हैं. किसी भी चीज की पाजिटिव मार्केटिंग. वो अपनी क्लाइंट से जुड़ी पाजिटिव चीजें धांय धांय इंटरनेट पर इतनी ज्यादा तादाद में डाल देती हैं. कि गूगल सर्च पर सबसे पहले, सबसे ज्यादा रिजल्ट्स आएं. वो भी एकदम चकाचक, चरित्र चमकाने वाले.
हमारा हिसाब इसका उल्टा है. हम अपने क्लाइंट से उसके विरोधी का नाम लेते हैं. फिर उससे जुड़ी हर चीज की छीछालेदर कर देते हैं. उसकी पर्सनल, प्रोफेशनल हर तरह की लाइफ से जुड़ी जानकारी, फोटो और वीडियो हर जगह फैला देते हैं. प्रोफेशन से जुड़ी कमजोरी न मिलने पर पर्सनल रिलेशन और चरित्र हनन करने वाली चीजें. सब कुछ.
ये फोटो वीडियो अरेंज कैसे करते हो?
ये पूछने पर बताया फिर मॉर्फिंग होती है. फोटोशॉप का यूज करके किसी की भी फोटो, तेरी मेरी किसी की भी, लगा देते हैं. हां, इसके लिए एक्स्ट्रा पैसा देना पड़ता है. क्योंकि ये 'हार्ड वर्क' है.
हमने अपनी टीमें लगा रखी हैं. लोगों की जानकारी जुटाने और फिर उसे ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप पर फैलाने के लिए. दिल्ली की एक ऐसी ही कंपनी के मालिक हैं रोहिन जैन. उन्होंने बताया कि कैसे वो ये झूठ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराके टॉप पर ले जाते हैं.
मैनेज कैसे करते हैं, माने पकड़ में कैसे नहीं आते?
सब जुगाड़ रहिता है. पकड़े जाने का सवाल ही नहीं. पूरा मैकेनिज्म है. इस ऑफिस से नहीं करते ये काम. उसके लिए दूसरी जगह है. प्रॉक्सी सर्वर अलग यूज किए जाते हैं. आई पी एड्रेस रोज बदले जाते हैं.
जित्ती ऊंची रकम उत्ता चोखा काम
सस्ते में नहीं निपटता ये सब. अच्छी जेब ढीली करनी पड़ती है. डीएस मीडिया लिंक की स्वाति बताती हैं. तीन महीने के पैकेज के लिए 10 करोड़ तक खर्च आता है. आप हमको पैसा दो. बाकी जिम्मेदारी हमारी. हम सब संभाल लेंगे. पाजिटिव निगेटिव सब. किसी की रेपुटेशन की बधिया बैठाने में हमें जरा भी देर नहीं लगेगी. हम वो करेंगे जो आप चाहते हैं.
ये सुपारी देने जैसा है. आप दुश्मन की फोटो और पेशगी रकम दीजिए. पूरी इंटरनेट की दुनिया उनके खिलाफ आग से भर जाएगी.
देखो वो स्टिंग
https://www.youtube.com/watch?v=MHAuwu6cnKg