पड़ताल : क्या महाराणा प्रताप के किले में कांग्रेस ने नमाज पढ़ने की इजाज़त दी?
सोशल मीडिया पर राजस्थान सरकार को लेकर ये पोस्ट वायरल है.
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दावा किया जा रहा है कि गहलोत सरकार ने कुंभलगढ़ किले में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी
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सोशल मीडिया पर राजस्थान सरकार को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रही है. वायरल ही क्या, झमाझम वायरल हो रही है. पोस्ट में दावा किया गया है कि महाराणा प्रताप के किले में कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम समुदाय को इज़्तिमा करने की इजाज़त दे दी है. अब आप कहेंगे कि इज़्तिमा की इजाज़त देने में क्या बुराई है. कोई भी सरकार दे सकती है. लेकिन बात इतनी सी नहीं है. पहले वायरल हो रहे पोस्ट पर नज़र मारिए-

एक ही स्क्रीनशॉट में ट्विटर और फेसबुक दोनों पर किए जा रहे दावों की तस्वीर है
10 मार्च की तारीख में किए गए इस ट्वीट को 6 हज़ार से भी ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया. इसी कैप्शन के साथ फेसबुक पर भी खूब लोगों ने शेयर किया. वैसे जिस गौरव प्रधान ने इस पोस्ट को ट्वीट किया, उन्हें ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी फॉलो करते हैं.

एक और पोस्ट देखिए.
क्या है सच्चाई?
इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने इस मामले की पड़ताल की. इसके बाद पता चला कि कुंभलगढ़ का किला ASI के अंदर आता है. इसीलिए यहां होने वाले किसी भी आयोजन की अनुमति राज्य सरकार नहीं दे सकती. इसलिए गहलोत सरकार इस किले के अंदर किसी धार्मिक कार्यक्रम करने की इजाज़त दें, ऐसा मुमकिन ही नहीं है. इंडिया टुडे की टीम फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सुपरिटेंडेंट डी आर बडिगर से बात की. उन्होंने भी यही जानकारी दी कि राज्य सरकार के पास किले के भीतर आयोजन करने की इजाज़त देने की अथॉरिटी ही नहीं है. अनुमति सिर्फ एएसआई ही दे सकता है.
यानी कि यहां से तो साफ हो गया कि किले के भीतर इज़्तिमा की इजाज़त गहलोत सरकार नहीं दे सकती है. इसके बाद टीम ने ये जानकारी जुटाने की कोशिश की कि ये इज़्तिमा वाली बात आई कहां से. पड़ताल करने पर पता चला कि किले के बाहर 'जश्न ए गरीब नवाज' नाम का एक कार्यक्रम होना था. विरोध के बाद इसे रद्द कर दिया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले कमिटी के अध्यक्ष अब्दुल शेख ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि ये कार्यक्रम उन्होंने अपनी मां नसीबन बेगम के हज यात्रा से लौटने की खुशी में रखा था. विरोध हुआ तो इसे कैंसिल कर दिया.

चिट्ठी में आम बोल-चाल की भाषा इस्तेमाल की गई है. इसीलिए कार्यक्रम किले पर होने की बात लिखी गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम किले के बाहर होना था.
इंडिया टुडे की पड़ताल में ये खबर झूठी पाई गई. इसका अशोक गहलोत सरकार या फिर कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है.
तो आपके पास भी इसी तरह की कोई पोस्ट या फिर कोई वीडियो या फिर तस्वीर हो, जिसपर आपको शक हो, तो उसकी पड़ताल के लिए भेजिए padtaalmail@gmail.com पर. हम उसकी पड़ताल करेंगे और उसकी सच्चाई आपको बताएंगे
जो अकबर न कर सका वो अशोक गहलोत ने कर दिखाया. राजस्थान सरकार ने महाराणा प्रताप के कुम्भलगढ़ किले में इज्तेमा की इजाजत प्रदान की. जिस किले में हमेशा एकलिंगनाथ, हर-हर महादेव का जयघोष होता रहा, वहा पहली बार अल्ला हु अकबर गूंजेगा। This is @INCIndia for u. think before u vote.

एक ही स्क्रीनशॉट में ट्विटर और फेसबुक दोनों पर किए जा रहे दावों की तस्वीर है
10 मार्च की तारीख में किए गए इस ट्वीट को 6 हज़ार से भी ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया. इसी कैप्शन के साथ फेसबुक पर भी खूब लोगों ने शेयर किया. वैसे जिस गौरव प्रधान ने इस पोस्ट को ट्वीट किया, उन्हें ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी फॉलो करते हैं.

एक और पोस्ट देखिए.
क्या है सच्चाई?
इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने इस मामले की पड़ताल की. इसके बाद पता चला कि कुंभलगढ़ का किला ASI के अंदर आता है. इसीलिए यहां होने वाले किसी भी आयोजन की अनुमति राज्य सरकार नहीं दे सकती. इसलिए गहलोत सरकार इस किले के अंदर किसी धार्मिक कार्यक्रम करने की इजाज़त दें, ऐसा मुमकिन ही नहीं है. इंडिया टुडे की टीम फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सुपरिटेंडेंट डी आर बडिगर से बात की. उन्होंने भी यही जानकारी दी कि राज्य सरकार के पास किले के भीतर आयोजन करने की इजाज़त देने की अथॉरिटी ही नहीं है. अनुमति सिर्फ एएसआई ही दे सकता है.
यानी कि यहां से तो साफ हो गया कि किले के भीतर इज़्तिमा की इजाज़त गहलोत सरकार नहीं दे सकती है. इसके बाद टीम ने ये जानकारी जुटाने की कोशिश की कि ये इज़्तिमा वाली बात आई कहां से. पड़ताल करने पर पता चला कि किले के बाहर 'जश्न ए गरीब नवाज' नाम का एक कार्यक्रम होना था. विरोध के बाद इसे रद्द कर दिया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले कमिटी के अध्यक्ष अब्दुल शेख ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि ये कार्यक्रम उन्होंने अपनी मां नसीबन बेगम के हज यात्रा से लौटने की खुशी में रखा था. विरोध हुआ तो इसे कैंसिल कर दिया.

चिट्ठी में आम बोल-चाल की भाषा इस्तेमाल की गई है. इसीलिए कार्यक्रम किले पर होने की बात लिखी गई है. इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम किले के बाहर होना था.
इंडिया टुडे की पड़ताल में ये खबर झूठी पाई गई. इसका अशोक गहलोत सरकार या फिर कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है.
तो आपके पास भी इसी तरह की कोई पोस्ट या फिर कोई वीडियो या फिर तस्वीर हो, जिसपर आपको शक हो, तो उसकी पड़ताल के लिए भेजिए padtaalmail@gmail.com पर. हम उसकी पड़ताल करेंगे और उसकी सच्चाई आपको बताएंगे

