उत्तरी जर्मनी की एक फुटबॉल टीम है. Deinster SV. इसके दो मेंबर्स पर हमला हुआ. वजह? वो दोनों अश्वेत थे. रिफ्यूजी थे. टीम उनके सपोर्ट में आई. सड़कों पर नहीं. फेसबुकपर. ये फोटो अपलोड की. जिसमें एडिटिंग के बाद सारे खिलाड़ियों का रंग काला दिखायागया था. हुआ ये था कि Deinster SV के दो खिलाड़ियों इमाद और अमर से 26 फरवरी कोईस्टर के एक कार्यक्रम में मारपीट और कलर में ब्लैक होने के कारण दुर्व्यवहार कियागया था.Unser Freund und Mitspieler Emad wurde am Samstag, aus rassistischen Gründen,beschimpft und geschlagen. Das ist einfach... Posted by Deinster SVon Wednesday, 30 March 2016हम ये क्यों पढ़ा रहे हैं? क्योंकि वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के रंग कोलेकर मजाक बना रहे थे. कल वेस्टइंडीज का मैच था इंडिया से. और लोगों ने वेस्टइंडीजक्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का कलर ब्लैक होने के कारण जमकर मजाक उड़ाया. नमूना देखिए.-------------------------------------------------------------------------------- -------------------------------------------------------------------------------- -------------------------------------------------------------------------------- -------------------------------------------------------------------------------- रंगभेद को लेकर हमारी आम सोच ये होती है कि ये विदेशों में होता है, और अगर हम इसपर किसी की खिल्ली उड़ा रहे हैं तो वो अपमानजनक नहीं है क्योंकि हम सीधे उन पर हमलानहीं कर रहे. ये गलत है और आपको ये समझना होगा. अंग्रेज हमें काले कुली कहते थे. इसदेश ने खुद रंगभेद सहा है. फिर हम ऐसे किसी का मजाक क्यों उड़ाते हैं? ये गलत है,गंदा है, मजेदार नहीं है, और हमें इससे बचना चाहिए.