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भोपाल एनकाउंटर: जिसने संदिग्ध आतंकियों को सबसे पहले देखा, पढ़िए उसका बयान

ये पहला आदमी है जिसने SIMI मेंबर्स को देखा और पुलिस को खबर की.

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जेल तोड़के फरार हो गए थे.
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अविनाश जानू
4 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 4 नवंबर 2016, 05:38 AM IST)
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भोपाल एनकाउंटर केस में उस चश्मदीद का बयान सामने आया है, जिसने सबसे पहले सिमी के संदिग्ध आतंकियों को नदी की तरफ जाते देखा था. उसका कहना है कि उन लोगों के पास हथियार नहीं थे. नरेश पाल नाम ने पुलिस को सबसे पहले SIMI मेंबर्स के बारे में जानकारी दी और बताया कि उन्होंने सवेरे आठों को खेतों के बीच से नदी की ओर जाते हुए देखा. नरेश का कहना है कि किसी ने भी उनके 'जय श्रीराम' का जवाब नहीं दिया. सवेरे करीब 7 बजे जब गांव चांदपुर के रहने वाले नरेश पाल अपने घर से बाहर निकले तो उन्होंने खेतों के बीच से आठ लोगों को जाते हुए देखा. नदी से करीब आधे किमी दूर. नरेश 24 साल के हैं. गांव के पास ही उनके खेत हैं. उनका एक स्टोर भी है. नरेश ने जब इन आठ लोगों को देखा तो उनको लगा कि नदी की ओर जा रहे हैं शायद ये मछुआरे होंगे, या फिर आस-पास के किसी गांव के होंगे.
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इस तरह नरेश पाल अनजाने में ही इस घटना के पहले विटनेस बन गए. 'इंडियन एक्सप्रेस' अखबार से बात करते हुए नरेश ने कहा,
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पर नरेश जब करीब आठ बजे घर पहुंचे तब उनको समझ आया, यहां लंबा बवाल हुआ पड़ा है. मामला कुछ ज्यादा ही बड़ा है. नरेश कहते हैं कि मुझे शक हुआ. मेरा फोन भी काम नहीं कर रहा था. इसलिए मैंने पास के ही एक किसान ज्ञान सिंह से मोबाइल लिया और 100 नंबर पर फोन किया. पुलिस वाले ने मुझसे कहा कि क्या मैंने उन्हें कपड़े बदलते हुए देखा था? उसने मुझे एटखेड़ी आने को कहा. पर मैंने कहा कि मैं नहीं आ सकता. बाद में ATS वाले ज्ञान सिंह और नरेश पाल को चांदपुर की मेन बस्ती में ले गए और दूसरे गांव वालों को इसके बारे में बताया. नरेश के हिसाब से फिर करीब 10 बजे ATS वाले उसे मेनखेड़ी ले गए जो कि गांव से करीब 3 किमी दूर है. नरेश ने बताया, हम उन लोगों को पहाड़ पर चढ़ते हुए देख रहे थे. मैंने भी उनका पीछा किया पर कुछ देर बाद मुझे रोक दिया गया. उससे आगे मुझे जाने नहीं दिया गया. कुछ ही मिनटों में, आठों पहाड़ पर चढ़ गए और पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. नरेश ने इसके बाद दूर से ही गोली चलने की आवाज सुनी. नरेश ने कहा, पर मुझे ये नहीं पता कि गोली एक ही ओर से चली थी या दोनों ओर से. नरेश ने बताया कि मैंने लाशें भी नहीं देखी थीं. फिर भी वो मुझे जाने भी नहीं दे रहे थे. बुधवार तक वहां बहुत से लोग आए. वो एनकाउंटर वाला स्पॉट देखना चाहते थे. गुरूवार तक हालांकि लोग कम हो गए थे. पत्थरों पर खून के निशान बस पड़े हुए थे. जहां पर एक से लेकर आठ तक मारे गए लोगों के नंबर लिखे हुए थे.
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