कई मुश्किलों के बाद भी उज्जैन के 'शाही स्नान' में शामिल हुए हिजड़े
लोग हिजड़ों के पांव छूने और माला पहनाने को बेताब हुए जा रहे थे.
Advertisement

फोटो - thelallantop
उज्जैन के हशमपुरा गांव में हिजड़ों का एक अखाड़ा बना है 'किन्नर अखाड़ा'. ऋषि अजय दास ने अपने उज्जैन वाले आश्रम में ये अखाड़ा बनाया है. इस अखाड़े के सदस्यों ने देश भर के करीब 500 और हिजड़ों के साथ उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ में शिप्रा नदी के गंधर्व घाट पर 'शाही स्नान' किया. इस 'शाही स्नान' से अखाड़ों के दूसरे लोगो में नाराज़गी दिखी लेकिन किसी ने भी खुल कर कोई विरोध नहीं किया.
ऋषि अजय दास उज्जैन के एक बहुत जाने माने अध्यात्मिक गुरु हैं. पिछले कई सालों से वो इस कोशिश में लगे रहे हैं कि हिजड़ों की कंडीशन समाज में बेहतर हो सके. उन्हें अच्छी एजुकेशन मिल सके. अच्छे हेल्थ बेनेफिट्स मिल सकें. ये अखाड़ा बनाने के पीछे उनका लक्ष्य भी यही था. फिर 13 अक्टूबर 2015 को इस आखिरकार इस किन्नर अखाड़े को बनाया गया. देश भर में इसके 10 पीठ भी बनाये गए और हर पीठ में एक एक किन्नर पीठाध्यक्ष भी बनाया गया.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् (ABAP) को ये बात पसंद नहीं आयी थी. उसके महंत नरेंद्र गिरी ने इस अखाड़े को मान्यता देने से साफ़ मना कर दिया था. क्योंकि उनके हिसाब से हिजड़े 'अप्राकृतिक' होते हैं. जनवरी 2016 में इस अखाड़े के सदस्यों ने मेला परिषद से 50 लाख रुपए के फंड की मांग की. यह फंड सारे अखाड़ों को मेले से पहले दिया जाता है. लेकिन मेला परिषद ने यह कह कर फंड देने से मना कर दिया. कि अगर ABAP इस किन्नर अखाड़े को मान्यता नहीं देगा तो हम फंड भी नहीं देंगे. बिग बॉस वाली लक्ष्मी (लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी) याद हैं? बहुत मशक्कत की उन्होंने. कोर्ट तक ले गयी इस मुद्दे को. आखिर उन्होंने पुराने 13 नामचीन अखाड़ों के बराबर में इस किन्नर अखाड़े को ला कर खड़ा कर ही दिया.
अब आया सिंहस्थ महाकुंभ का पहला दिन. जब बाकी के 13 अखाड़े वाले शिप्रा नदी में 'शाही स्नान' करने जा रहे थे, तो उनके साथ बराबरी से नाचता गाता, ढोल, मंझीरे बजाता किन्नर अखाड़ा भी शामिल था. इस पेशवाई को 'देवत्व यात्रा' कहा जा रहा है. लोगों ने तो इत्ती भीड़ लगा ली थी इस अखाड़े को देखने के लिए कि पुलिस प्रशासन को फ़ोर्स बढ़ानी पड़ गयी थी. लोग बाक़ी के अखाड़ों की तरह हिजड़ों के भी पांव छू रहे थे. और उनको फूल मालाएं पहना रहे थे.
एक जो सबसे जबर चीज़ थी इस पूरे जुलूस में वो ये कि किन्नर अखाड़े में पच्चीसों ई-रिक्शा शामिल थे. हिजड़ों ने इन ई-रिक्शाओं को शामिल कर पर्यावरण संरक्षण का मैसेज दिया. इस अखाड़े ने अपने गठन के पहले दिन से जगह-जगह सफाई अभियान चलाए और सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ जमकर आवाजें उठायीं.
ये बात शायद आपको छोटी लगे. पर हिजड़ा समुदाय के लिए ये एक अच्छी शुरुआत हो सकती है.
देवत्व यात्रा की कुछ और फ़ोटोज़:

.webp?width=60)

