The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • shraddha walker murder case accused aaftab polygraph test

आफ़ताब के पॉलीग्राफ टेस्ट में क्या-क्या होने वाला है? सब जान लीजिए

नारको के पहले होगा पॉलीग्राफ!

Advertisement
what is polygraph test that has to be conducted on shraddha walker murder accused aaftab
पॉलीग्राफ टेस्ट (फोटो-आजतक)
pic
ज्योति जोशी
22 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 22 नवंबर 2022, 11:12 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

श्रद्धा वालकर मर्डर केस (Shraddha Walkar murder case) के आरोपी आफताब पूनावाला का पॉलीग्राफ टेस्ट होने वाला है (Shraddha Walker Murder Case Aaftab Polygraph Test). सोमवार, 21 नवंबर को ही दिल्ली (delhi) पुलिस को आफताब पर ये टेस्ट कराने की परमिशन मिली है. पॉलीग्राफ टेस्ट को लाई डिटेक्टर टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है. माना जा रहा है कि इस टेस्ट से आरोपी के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने में पुलिस को मदद मिलेगी.

बता दें पॉलीग्राफ उस डिवाइस को कहा जाता है जो शरीर में आने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करती है.

पॉलीग्राफ टेस्ट में क्या होता है?

टेस्ट में व्यक्ति के व्यक्ति के शरीर से कुछ सेंसर्स और तार जुड़े होते हैं. जैसे हाथों पर कार्डियो कफ पहनाए जाते हैं जो उसकी हार्ट रेट का ध्यान रखता है. इसके अलावा कुछ और सेंसिटिव इलेक्ट्रोड और डिवाइस भी व्यक्ति से कनेक्ट किए जाते हैं. पॉलीग्राफ टेस्ट्स में कुर्सी के नीचे मूवमेंट सेंसर्स भी लगे होते हैं. अगर व्यक्ति ज़्यादा हिल-डुल रहा है, तो वो भी रिकॉर्ड हो जाता है. फिर उससे सवाल पूछते हैं और इस दौरान व्यक्ति के ब्लड प्रेशर, ब्लड फ्लो, नाड़ी, सांस लेने की रिदम, पसीना और हाथ-पैर की गति को नापते हैं और रिकॉर्ड करते हैं.

Image embed

इस टेस्ट में सिर्फ ऑब्जेक्टिव सवाल ही पूछे जाते हैं. यानी ऐसे सवाल जिनका जवाब सिर्फ हां या ना में दिया जा सकता है.

अगर कोई शख्स झूठ बोलता है या बहलाने की कोशिश करता है तो उसके शारीरिक रिएक्शन अलग होंगे. जांचकर्ता व्यक्ति के शरीर में परिवर्तन, उसका सांस लेने का पैटर्न और हार्ट रेट की बारीकी से निगरानी करते हैं. फिर पूरे रिकॉर्ड के आधार पर तय किया जाता है कि किन सवालों के जवाब देने में गड़बड़ी हुई और किन में नहीं. टेस्ट के पीछे धारणा ये है कि अगर कोई व्यक्ति झूठ बोल रहा है, तो उसमें ये शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे. ये टेस्ट डायरेक्टली झूठ को नहीं पकड़ता. झूठ बोलने से पैदा होने वाले डर, घबराहट या नर्वसनेस को पकड़ता है.

पॉलीग्राफ अटैच करने से पहले एक प्री-टेस्ट होता है. इसमें एग्ज़ामिनर आराम से उस व्यक्ति को पूरी टेकनीक समझाते हैं और पहले ही उसको टेस्ट के सारे सवाल बता देते हैं. वो सवाल जो पॉलीग्राफ में पूछे जाएंगे. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई सरप्राइज़ एलिमेंट न रहे. अचानक से कोई सवाल पूछने पर सामने वाला घबरा सकता है और इससे पॉलीग्राफ की रीडिंग गड़बड़ा सकती है.

नारको टेस्ट से कितना अलग है?

नारको टेस्ट में शख्स को कुछ दवाएं इंजेक्ट कर नींद या बेहोशी की हालत में लाया जाता है. ये दवाएं किसी भी इंसान को आधा बेहोश कर देती हैं. इससे इंसान की सोचने की क्षमता या कल्पना बेअसर हो सकती है और उससे सही जानकारी निकाली जा सकती है.

ये टेस्ट शुरू करने से पहले भी हाथ की उंगलियों को पॉलीग्राफ मशीन से कनेक्ट किया जाता है. टेस्ट से पहले ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, ब्रीथिंग स्पीड और हार्ट रेट की रीडिंग ली जाती है. फिर इन सब के आधार पर ये फैसला लिया जाता है कि उसे दवाओं का कितना डोज देना है.

बेसिक अंतर ये है कि नारको में बंदा दवाओं के असर में होता है, जबकि पॉलीग्राफ में व्यक्ति पूरे होश में.

नारको टेस्ट करने से पहले आरोपी व्यक्ति का पूरा फिजिकल टेस्ट भी किया जाता है. अगर वो फिट नहीं है, तो उसका नारको टेस्ट नहीं हो सकता है. इसके अलावा बच्चों, बुजुर्गों और स्पेशली एबल्ड लोगों का नारकोटेस्ट नहीं किया जा सकता है.

देखें वीडियो- श्रद्धा मर्डर केस में आफताब को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे!

Advertisement

Advertisement

()