क्या हिंदू धर्म के नाम पर शिवसेना अब दुर्गा पूजा बंद करवाएगी?
कौन सबसे ज़्यादा कट्टर की रेस लगी हुई है.

शिवसेना ने गुड़गांव में मीट की 500 दुकानें बंद कराने का फरमान जारी किया है. नॉनवेज फूड चेन KFC को भी जबरन बंद करवाया गया. कहा गया है कि नवरात्र तक नॉनवेज की सारी दुकानें बंद रखी जाएं और अब से हर मंगलवार को नॉनवेज की सभी दुकानें बंद रखी जाएं.
https://twitter.com/ANI_news/status/846949316812050432शिवसेना के इस फैसले के बाद एक सवाल मन में आया है. क्या आने वाले समय में बंगाल की दुर्गा पूजा को भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए बंद करवा दिया जाएगा? क्योंकि बंगाल में नवरात्र के समय मांसाहार एक अनिवार्य चीज़ है. ये स्वाद नहीं, परंपरा का मामला है. उत्तर भारत में जहां दोनों नवरात्र (शारदीय और चैत्र) देवी के राक्षसों से नौ दिन युद्ध करने की याद में मनाए जाते हैं, वहीं बंगाल में नवरात्र (विशेष रूप से शारदीय) मां (देवी उमा) के ससुराल से मायके वापस आने का उत्सव है.
इसलिए वहां इस त्यौहार को मनाने का ढंग भी अलग है. दुर्गा पूजा में आपको तमाम कालीबाड़ी पंडाल में नॉनवेज के स्टॉल दिख जाएंगे. उत्तर भारत में नवरात्र के समय नॉनवेज के बारे में सोचना भी पाप माना जाता है. और बंगाल ही क्यों, योगी आदित्यनाथ के खुद के इलाके गोरखपुर में ही तर्कुला देवी मंदिर है, जहां देवी के प्रसाद के रूप में मीट पकाया जाता है.
बिना प्याज-लहसुन के पकाए गए इस मीट को लोग बड़ी श्रद्धा से खाते हैं. इसके अलावा राजस्थान की कुछ जातियों में महिलाओं का शराब पीना और मांस खाना उनके सुहाग से जोड़कर देखा जाता है. औरतें देवी से प्रार्थना करती हैं, "माताजी, म्हारो दारू-मांस अमर करज्यो". राजस्थान की औरतें भी इस परंपरा से जुड़ी हुई हैं, जिसकी एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.

फोटो सोर्स- फेसबुक
दरअसल यूपी चुनाव के नतीजों के बाद से ऐसा लग रहा है, जैसे बीजेपी और इसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना के बीच सबसे कट्टर बनने की रेस शुरू हो गई है. 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे नारे के साथ चुनाव लड़ रही बीजेपी ने योगी आदित्यनाथ को यूपी का सीएम बनाकर 'हिंदू हृदय सम्राट' वाली अपनी छवि पुख्ता कर ली है. संभवत: शिवसेना को ये डर लग रहा है कि कहीं वो 'हिंदू' के ठप्पे से अलग न हो जाए.

फोटो सोर्स- फेसबुक
उड़ने से महरूम कर दिए गए शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने एयरलाइंस कर्मचारी के साथ मारपीट वाले बयान में एक अलग ही मेसेज देते हुए कहा था, "शिवसेना का एमपी हूं, भाजपा का नहीं". दूसरी तरफ शिवसेना के संजय राउत ने RSS संचालक मोहन भागवत का नाम राष्ट्रपति पद के लिए प्रस्तावित करके दक्षिणपंथ की राजनीति के नए ध्रुव पर पहुंचने की जबर कोशिश की है.
कुल मिलाकर मसला यही है कि भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की ठेकेदारी के नाम पर सियासत कर रहे ये लोग सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुस्तान की संस्कृति को ही पहुंचा रहे हैं. इन लोगों से ये पूछना रोचक होगा कि राजस्थान और पश्चिम बंगाल के लोगों को किसी और देश भेजा जाएगा क्या?
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