बीजेपी के शिवराज सिंह ने राहुल गांधी को कृष्ण भक्त क्यूं बता डाला?
बीजेपी की 'धर्म बनाम अधर्म की लड़ाई' में ये प्रतीक कतई फिट नहीं बैठ रहा.
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शिवराज सिंह चौहान ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तुलना कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी से की. और राहुल गांधी को उन्होंने रणछोड़ दास बताया.
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आसमान को नभ भी कहते हैं और आकाश भी. गगन भी इसी का एक नाम है. ये सब समानार्थी हैं. हिंदी व्याकरण की पर्यायवाची कैटगरी की एक एंट्री. ये ख़बर भी पर्यायवाचियों पर है. मगर धर्म-कर्म वाले डिपार्टमेंट से.
शिवराज सिंह. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री. बीजेपी के सीनियर नेता. शिवराज को लगता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी 'भगवान कृष्ण और अर्जुन' की जोड़ी है. बहुत अच्छा. जब वाक्य की शुरुआत ही 'शिवराज को लगता है' से हुई, तो लगने पर क्या टिप्पणी की जाए. आगे ख़बर ये है कि शिवराज को राहुल गांधी के लिए भी कुछ लगता है. ये कि राहुल रणछोड़ दास हैं.
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रणछोड़ दास क्यों? एक्ज़ेक्टली ये ही क्यों? शिवराज का कहना है कि लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हारने और लगातार दूसरी बार हारने के बाद राहुल ने कांग्रेस को अकेला छोड़ दिया. राहुल ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. पार्टी ने उनका इस्तीफ़ा मंजूर नहीं किया. लंबे समय तक कन्फ्यूज़न बना रहा. फिर आखिरकार पिछले हफ़्ते उनकी मां सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बना दी गईं. बकौल शिवराज-LIVE : Press Conference of Shri @ChouhanShivraj, Former CM of Madhya Pradesh, National Vice President & National #BJPMembership incharge at BJP State HQ, Panaji.https://t.co/2xwx156wpW
— BJP Goa (@BJP4Goa) August 18, 2019
राहुल गांधी 'रणछोड़ दास गांधी' बन गए हैं. लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने अपनी पार्टी का साथ छोड़ दिया. जबकि संगठन को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी थी उनकी.रणछोड़ दो शब्दों की संधि है- रण प्लस छोड़. रण माने युद्ध का मैदान. और छोड़ का मतलब क्या ही बताना. तो युद्ध का मैदान छोड़कर भाग जाने वाला, अपनी जिम्मेदारी से पीठ दिखाने वाला हुआ कायर. शिवराज के मुताबिक- राहुल गांधी. मैटर क्या है? दिक्कत पर्यायवाची की है. कृष्ण के कई नाम हैं. बांके बिहारी. श्याम. मोहन. देवकी नंदन. गोपाल. नंदलाल. इन्हीं नामों में से एक नाम 'रणछोड़' भी है. कृष्ण ने ये नाम कमाया युद्ध के मैदान से भागकर. कहानी यूं है कि कृष्ण ने कंस को मारा. इससे जरासंध को कृष्ण से बड़ी नाराज़गी थी. क्योंकि जरासंध की बेटी पत्नी थी कंस की. तो जरासंध ने मथुरा पर हमला कर दिया. कृष्ण उससे लड़ने नहीं पहुंचे. भाग गए. भागकर द्वारका चले गए. वहां नया शहर बसा लिया. कृष्ण से जुड़ी कई कहानियों की ये खासियत है. जिन चीजों को सोसायटी खराब समझती है, वो कृष्ण के ईश्वरत्व को और विस्तार देती हैं. मैदान छोड़कर जाने का अर्थ ये निकाला गया कि कृष्ण लोगों को खून-खराबे से बचाना चाहते थे. वो नहीं चाहते थे कि युद्ध में निर्दोष बेबात मारे जाएं. इस प्रकरण ने कृष्ण को नया नाम दिया- रणछोड़. उनके भक्त कहलाए रणछोड़ दास. हिंदू प्रतीकों पर बीजेपी पहला हक़ जताती है. इसीलिए ही शायद शिवराज ने मोदी और शाह को कृष्ण और अर्जुन की जोड़ी बताया. ऐसी जोड़ी, जिसने महाभारत के युद्ध में पांडवों को जीत दिलाई. पांडवों का पक्ष धर्म का पक्ष समझा जाता है. और महाभारत का युद्ध 'धर्म बनाम अधर्म' की लड़ाई मानी जाती है. ये प्रतीकों के राजनीतिकरण का दौर है. खासतौर पर धार्मिक प्रतीकों के पॉलिटिसाइज़ेशन का टाइम. इसमें शिवराज का मोदी-शाह वाला बयान तो फिट हो रहा है. कि जैसे कृष्ण और अर्जुन ने पांडवों को युद्ध जिताया, वैसे ही मोदी-शाह बीजेपी को किले जितवा रहे हैं. मगर शिवराज का ये रणछोड़ दास वाला बयान फिट नहीं बैठ रहा. हो सकता है उनको 'रणछोड़' की कहानी न मालूम हो. या ध्यान में न आई हो. मगर फिर बात वही है- प्रतीकों की राजनीति. इस राजनीति में रणछोड़ दास तो वही हैं, जो कृष्ण के भक्त हैं.
इल्तिज़ा मुफ्ती की लिखी चिट्ठी अमित शाह तक नहीं पहुंची, मगर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई रूपा गांगुली के बेटे ने कार ठोक दी, लेकिन उन्होंने मोदी को टैग करके ऐसा क्यों लिखा?

