झूठे कमांडो ट्रेनर शिफूजी शौर्य भारद्वाज की असलियत : दूसरा पार्ट
छाती पर भगत सिंह और मुंह पर गाली. सेना के नाम पर खुद की झूठी इमेज बनाई.
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फोटो - thelallantop
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खुद को शिफू कहने वाला ये बंदा कहता है कि उसे चाइनीज़ भाषा आती है. जबकि चाइनीज़ जैसी कोई भाषा नहीं होती.
चाइनीज़ बस एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम है. वहां से जुड़ी चीज़ों को चाइनीज़ कहते हैं. वहां की भाषा तो मेंडरिन और केंटनीज़ है.
वैसे इसने पहले अपना जन्म स्थान पंजाब का एक शहर बताया था. मगर मध्य प्रदेश के ब्रांड अम्बेसडर वाले एपिसोड के बाद ये खुद को जबलपुर में पैदा हुआ बताने लगा. इसके मुंह से निकलती पंजाबी सुन इस बात पर शक होता ही है कि ये जबलपुर में पैदा हुआ है.
शिफू शौर्य भारद्वाज. या दीपक दुबे? जो भी है. जब तक स्पष्टीकरण न दे, बड़ा बहरुपिया ही लग रहा है. इसे फिल्मों में ही सेटल हो जाना चाहिए क्योंकि अच्छी ऐक्टिंग कर ही रहा है. कभी वेबसाइट हैक हो जाती है तो कभी उस पर मौजूद सारा मसाला ही गायब हो जाता है. कमांडो ट्रेनर से एक आम भारतीय बन जाता है. इंसान अगर कमांडो ट्रेनर है तो वो आम आदमी नहीं हो सकता. इतने ताकतवर इंसान को क्या ज़रूरत पड़ गयी फिल्मों में जाने की? मेजर दीपक राव ने 17 साल दिए CQB टेक्नीक सैनिकों को देने में. मगर इस के एक दिन में 24 घंटे भी इतने बड़े वाले होते हैं कि ये पुलिस, कमांडो और न जाने कितनी प्रकार की एलीट फ़ोर्सेज़ को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहा है और फिल्मों में भी काम कर रहा है. और यूट्यूब पर लोगों को जान से मारने की बात करके, औरतों को गाली देकर और देश को चरम रास्ते पर ले जाने का काम भी कर ले रहा है.
इनमें सबसे दुख की बात है कि अपनी ब्रांडिंग करने के लिए इस फर्जी आदमी ने भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों की तस्वीरों का भौंडा इस्तेमाल किया है. कहां भगत सिंह का बलिदान और कहां इस आदमी की ओछी सोच! इसे तो ये भी नहीं पता कि भगत सिंह का वर्ल्ड व्यू क्या था.
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