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शेख़ हसीना की पार्टी के नेता का शव भारत में मिला, दिल का दौरा पड़ा या गोली मारी गई?

शव को देखकर अंदाज़ा लगाया गया है कि इशाक अली की मौत 24 अगस्त को ही हो गई थी. आगे की पहचान के लिए शव को खलीहरियात सिविल अस्पताल भेज दिया गया है.

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29 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 29 अगस्त 2024, 06:15 PM IST)
Ishaque Ali Khan Panna
बांग्लादेश की आवामी लीग के नेता इशाक़ अली ख़ान पन्ना. (फ़ोटो - फ़ेसबुक/सोशल)
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मेघालय पुलिस को बांग्लादेश की सीमा से लगे जैंतिया हिल्स ज़िले में सुपारी के बागान में एक शव मिला है. बांग्लादेश की आवामी लीग के नेता इशाक़ अली ख़ान पन्ना का क्षत-विक्षत शव. अफ़सरों के मुताबिक़, उनका शव 26 अगस्त की शाम को भारत-बांग्लादेश सीमा से क़रीब 1.5 किलोमीटर दूर मिला. उनके पासपोर्ट के ज़रिए उनकी पहचान की गई है.

शव को आगे की पहचान के लिए खलीहरियात सिविल अस्पताल भेज दिया गया है. शव को देखकर अंदाज़ा लगाया गया है कि उनकी मौत 24 अगस्त को ही हो गई थी.

कौन थे इशाक़ अली ख़ान पन्ना?

इशाक़ अली 1990 के दशक में पन्ना बांग्लादेश छात्र लीग से जुड़े थे. सीढ़ियां चढ़ते हुए महासचिव बने. फिर अवामी लीग में शामिल हो गए. हालांकि, वो संसदीय चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कभी टिकट नहीं मिला.

देश के बड़े कारोबारी भी थे. उन्होंने एक विश्वविद्यालय की सह-स्थापना की और  डायमंड लाइफ़ इंश्योरेंस कंपनी नाम की एक जीवन बीमा कंपनी भी शुरू की थी. बांग्लादेश बीमा संघ और बांग्लादेश चैंबर्स ऑफ़ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्रीज़ के संघ में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे. अलग-अलग पदों पर रहे.

हाल के वक़्त में उन्होंने अवामी लीग की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. 5 अगस्त को शेख़ हसीना सरकार के गिरने के बाद से वे गायब थे. 

शुरूआती रपटों से पता चला है कि सीमा पार करने की कोशिश करते हुए पन्ना को दिल का दौरा पड़ा होगा. हालांकि, कुछ अटकलें ऐसी भी हैं कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने उन पर गोली चलाई है.

ये भी पढ़ें - बांग्लादेश ने भारत में काम कर रहे अपने 2 डिप्लोमैट्स हटाए, अब शेख हसीना का प्रत्यर्पण तय है?

इससे पहले, 28 अगस्त को बांग्लादेश के बांग्ला-भाषी टीवी चैनल ग़ाज़ी टीवी में संपादक सारा रहनुमा का शव मिला था. वो 32 साल की थीं. स्थानीय मीडिया का इनपुट है कि उनका शव ढाका में हातिरझील झील में तैरता हुआ बरामद किया गया.

उनके पिछले कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स से ऐसा संकेत मिल रहा है कि ये ख़ुदकुशी का केस हो सकता है. हालांकि, पुलिस अभी इस केस की जांच कर ही रही है. इस बीच बांग्लादेश की पूर्व-प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के बेटे साजिब वाजेद ने इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर क्रूर हमला बताया है. 

वीडियो: दुनियादारी: क्या बांग्लादेश में आतंकियों को छोड़ा गया, भारत को क्या ख़तरा?

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