कनाडा के पोल वॉल्ट खिलाड़ी शॉन बार्बर ओलंपिक से पहले डोपिंग में पोज़िटिव पाए गएथे. लेकिन अपनी तरह के विचित्र मामले में वर्ल्ड चैंपियन पोल वॉल्ट खिलाड़ी को 2साल का प्रतिबंध नहीं दिया गया. बार्बर ने दावा किया था कि ये कोकेन उनके शरीर मेंचुंबन के मार्फत चला गया था.कनाडा के 'खेल विवाद निपटान केंद्र' ने मामले में बार्बर की कोई गलती नहीं पाई गई.एथलेटिक्स कनाडा ने भी इस फैसले को ‘सही और न्यायसंगत’ ठहराया है.22 साल के बार्बर ने एक ऑनलाइन वीडियो पोस्ट कर कहा कि तनाव दूर करने के लिए एक रातउनकी भेंट एक होटल में एक ‘पेशेवर’ महिला से हो गई. वो महिला स्वयं को ड्रग औरडिसीज़ से मुक्त बता रही थी और बार्बर ने ट्रायल के तनाव से मुक्त होने के लिएकनाडा के ओलंपिक ट्रायल से ठीक पहली रात को संबंध बना लिया. पट्ठे ने अगले ही दिनराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर ओलंपिक में जगह भी बना ली. हालांकि ओलंपिक में सिर्फ 10वांस्थान ही मिल पाया. इस मामले में जो महिला मुलव्विस थी उसने भी कहा है कि मिलन केदौरान उसने बार्बर को बिन बताए कई बार कोकेन खींची थी.बार्बर के वकील का दावा है कि फोरेंसिक जानकारों ने मामले को देखा है और इतनीमात्रा में जानबूझ कर कोकेन लेना असंभव है. लॉजिक दिया है कि नशे के लिए इत्ता अल्पकोकेन नहीं खींचा जा सकता.बार्बर का मामला 5 अगस्त को सुना गया था. फैसला 6 दिन बाद आया और फिर बार्बर ने 15अगस्त को ओलंपिक खेलों में भाग भी लिया. लेकिन ये सारा केस 2 महीने बाद अब जनता केसामने आया है. खेल की दुनिया ने इस तरह का केस कभी नहीं देखा.फ्रांस के टेनिस खिलाड़ी रिचर गेस्के भी 2009 में एक नाइटक्लब में महिला से चुंबनके बाद कोकेन के लिए पोज़िटीव पाए गए थे. ठीक इसी तर्क पर गेस्के को लंबा बैन नहींमिला था और खेल से सिर्फ अढाई महीने बाहर रहना पड़ा था. गेस्के के वकीलों ने ये भीदावा किया गया था कि नमक के दाने जितना ही कोकेन ही गया था. अब मामला श्वेत औरअश्वेत का भी हो रहा है. कुछ लोगों का कहना है शॉन बार्बर श्वेत खिलाड़ी है इसलिएबैन नहीं लगा.हक़ीक़त ये है कि शॉन बार्बर बच गए और संदेश ये है कि ट्रायल से पहले असुरक्षित औरअनजान लोगों के साथ संबंध नहीं बनाने चाहिए नहीं तो ऐसे भी पकड़ाए जा सकते हैं.