कांग्रेस में रहेंगे या जाएंगे? शशि थरूर ने राहुल गांधी से मिलने के बाद साफ कर दिया
शशि थरूर का यह बयान उस मुलाकात के एक दिन बाद आया जिसमें उन्होंने खरगे और राहुल गांधी से संसद भवन परिसर में करीब एक घंटा 45 मिनट तक बात की.

तमाम कायसों को विराम लगाते हुए आखिरकार शशि थरूर ने यह साफ कर दिया कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ने वाले हैं. एक दिन पहले उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी. उनकी गतिविधियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के चलते यह अटकलें चल रही थीं कि शशि थरूर नाराज़ हैं और शायद पार्टी छोड़ सकते हैं. लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे.
इंडिया टुडे की शिबिमोल केजी की रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों के सवाल पर थरूर ने कहा कि वे कांग्रेस में हैं और कहीं नहीं जा रहे. उन्होंने कहा कि वे केरल विधानसभा चुनाव में सक्रिय रहेंगे, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत के लिए काम करेंगे और चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे. उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि वे स्पष्ट राजनीतिक सोच वाले नेता हैं और साम्प्रदायिकता का विरोध करते हैं.
थरूर ने यह भी कहा कि पार्टी की आधिकारिक राय उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है. जहां पार्टी का स्पष्ट रुख होता है, वहां वे अलग राय नहीं रखते. हालांकि कुछ मामलों में वे अपनी व्यक्तिगत राय रखते हैं, खासकर विकास से जुड़े मुद्दों पर. उनका कहना है कि वे आंतरिक राजनीति की बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करना पसंद करते हैं और वे 2009 से यही कहते आ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि किसी को पार्टी की आधिकारिक लाइन का विरोध करने का अधिकार नहीं है.
थरूर ने सवाल उठाया कि उनकी निष्ठा पर बार-बार ही क्यों सवाल उठाए जाते हैं. उन्हें बार-बार यह बताने की जरूरत क्यों पड़ती है कि वे कांग्रेस में रहेंगे, और साफ कहा कि वे मजबूती से कांग्रेस के साथ खड़े रहेंगे.
यह बयान उस मुलाकात के एक दिन बाद आया जिसमें उन्होंने खरगे और राहुल गांधी से संसद भवन परिसर में करीब एक घंटा 45 मिनट तक बात की. उन्होंने कहा कि बातचीत अच्छी, सकारात्मक और रचनात्मक रही और अब सब लोग एक साथ आगे बढ़ रहे हैं.
हाल ही में खबरें आई थीं कि कोच्चि के एक कार्यक्रम में उनके साथ सही व्यवहार नहीं हुआ और केरल कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें किनारे करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले हफ्ते उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव की एक अहम रणनीति बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. सूत्रों के अनुसार वे इस बात से भी नाराज़ थे कि एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया और राज्य के कुछ नेता लगातार उन्हें पीछे करने की कोशिश कर रहे थे.
पिछले साल भारत-पाकिस्तान संबंधों और पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक प्रयासों पर उनके बयान से भी विवाद हुआ था, क्योंकि थरूर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग बयान दे रहे थे. पार्टी के अंदर उनकी आलोचना भी हुई थी.
वीडियो: पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेकर शशि थरूर ने कांग्रेस आलाकमान से क्या कह दिया?

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