बिहार के डॉन शहाबुद्दीन अच्छे नागरिकों की तरह बर्ताव करने की कोशिश कर रहे हैं.सुनने में कितना 'कौवा चला हंस की चाल' टाइप लगता है न. बहरहाल ऐसा सच में हुआ.जब खूंखार डॉन या यूं कहें कि सजा पाए सीवान के 4 बार के MP शहाबुद्दीन सुप्रीमकोर्ट से अपनी जमानत खारिज किए जाने के बाद 30 सितंबर को अपने मन से सीवान कोर्टचले आए और सरेंडर कर दिया. वो भी जमानत खारिज होने के एक घंटे के अंदर-अंदर. यहांतक कि उनके वकील ने सीवान कोर्ट से सिफारिश की कि वो शहाबुद्दीन के सरेंडर कोएक्सेप्ट कर ले. और साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की एक अंडरटेकिंग भी जमा की गईताकि डिस्ट्रिक कोर्ट शहाबुद्दीन का सरेंडर एक्सेप्ट कर ले क्योंकि उस वक्त तकसुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी डिस्ट्रिक कोर्ट पहुंची नहीं थी. क्या बात है! दिलगार्डन-गार्डन हो गया, शहाबुद्दीन कितने जिम्मेदार हैं, ये देखकर. और तो और साहब,अपने इलाके सीवान में शहाबुद्दीन इसी नाम से जाने जाते हैं, हेलमेट पहनना भी नहींभूले. क्योंकि वो बुलेट से कोर्ट सरेंडर करने आए हुए थे. अब तक उन्होंने ट्रैफिकनियमों के लिए ऐसा सम्मान कभी नहीं दिखाया था. या ये भी हो सकता है कि सुप्रीमकोर्ट के इस आदेश के बाद उन्होंने पुलिस वालों को धोखा देने के लिए ऐसा किया हो.इससे पहले कि सीवान जेल पहुंचने से पहले उसे नीतीश कुमार सरकार पकड़ने की सोचे वोखुद सीवान जेल पहुंच जाएं. शहाबुद्दीन को 15 दिन भी अभी नहीं हुए थे सीवान जेल सेबाहर आए कि फिर अंदर चले गए. पर ये कहानी का केवल एक हिस्सा है. अगर आप गहराई मेंजाएं तो पाएंगे कि सीवान जेल में उनको रुकने देना ही कानूनों का उल्लंघन है और वोवहां इसलिए हैं क्योंकि ये उनका हमेशा का पसंदीदा स्वर्ग रहा है.सीवान जेल में रहना ही कानून तोड़ना हैप्रिजन एक्ट, 1894 के सेक्शन 59 के तहत बिहार ने अपना प्रिजन मैनुअल, 2012 मेंअपडेट किया है. जिसके हिसाब से कोई भी कैदी जो पांच साल से ज्यादा की सजा पाया हुआहो, उसे सेंट्रल जेलों में ही रखा जाएगा. शहाबुद्दीन जो कि 10 केसों में दोषी साबितहो चुके हैं. और दो मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा भी हो चुकी है. और साथ ही एककेस में 10 साल कैद-ए-बामश्क्कत की भी सजा हो चुकी है. इसलिए शहाबुद्दीन को कायदेसे उन आठ में से किसी एक जेल में रखा जाना चाहिए था, जो बिहार में हैं और सीवान जेलउन जेलों में नहीं आती है. पर शहाबुद्दीन को बिहार के जेल कानूनों का उल्लंघन करतेहुए एक डिस्ट्रिक जेल में रखा गया. और सारे जिम्मेदार लोग बिना सांस खींचे पड़ेरहे. यहां तक कि 2005 में जबसे वो गिरफ्तार हुए हैं तबसे उनको इसी जेल में रखा गयाथा. दो बार उनको भागलपुर और गया जेल में 6-6 महीने के लिए शिफ्ट भी किया गया, परआखिरी लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों के दौरान. क्योंकि सीवान जेल में उनकेरहने से चुनावों की स्थिति गड़बड़ा सकती थी. दोनों ही बार वो इलेक्शन खत्म होते हीचले आए थे सीवान जेल. पिछली बार वो 24 नवंबर को वापस आ गए थे. जैसे ही नीतीश कुमारकी सरकार ने महागठबंधन की सरकार का नेतृत्व संभाला था. हर बार वो भागे-भागे सीवानचले आते हैं. एक तर्क शहाबुद्दीन को सीवान जेल में ही रखे जाने के पीछे ये दियाजाता है कि कम से कम 37 केस जिनमें मर्डर, किडनैपिंग और वसूली शामिल हैं शहाबुद्दीनके खिलाफ, सीवान कोर्ट में ही पेंडिंग हैं.टेक्नोलॉजी के दौर में नहीं चलता है ये बहानापर शहाबुद्दीन आसानी से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी अपनी पेशी में भाग ले सकतेथे. वैसे भी वो आखिरी बार कोर्ट में 10 दिसम्बर, 2015 को आए थे. जब उनको 2004 केसीवान डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. चंद्रकेश्वर प्रसाद जिनकोसीवान में चंदू बाबू के नाम से ही जाना जाता है, वो इंसान हैं जिन्होंने शहाबुद्दीनके चलते अपने तीन बेटों को खो दिया है. इसलिए चंदू बाबू ने शहाबुद्दीन के जेल सेबाहर आते ही उसकी जमानत को चैलेंज किया था सुप्रीम कोर्ट में. ये एक ऐसा निडर कदमथा जिसके बाद नीतीश कुमार सरकार भी इस मुद्दे पर कुछ सतर्क दिखी थी. 30 सितंबर कोसुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई की और ये भी निश्चित किया कि ये खूंखार डॉन फिरसे जेल की सलाखों के पीछे हो. जब शहाबुद्दीन सितंबर में छूटा था तो उसके समर्थकोंने उसका बहुत ही भव्य स्वागत, सत्कार किया था. इसके बाद शहाबुद्दीन ने ये बयान देतेहुए विरोधियों का मुंह बंद कर दिया था कि बिहार में 22 लाख लोग हैं मैं क्या करसकता हूं, अगर दो लोग नाखुश हैं. एक सीनियर IPS अफसर ने कहा था कि दरअसल शहाबुद्दीनका कहना था कि ये कुछ लोग हमारा क्या कर लेंगे. वैसे डॉन को उनकी जमानत कैंसिल होनेके बाद उनका जवाब मिल गया है. पर तबसे उनके सीवान जेल में रखे जाने पर सवाल खड़ेकिए जा रहे हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -कहानी शहाबुद्दीन की जिसने दो भाइयों को तेजाब से नहला दिया थालालू के दोस्त की सरकार से लालू के दोस्त शहाबुद्दीन की जान को खतरा हैनीतीश-लालू की छवि हमने नहीं, इन 6 लोगों ने बिगाड़ी हैशहाबुद्दीन का इतना खौफ कि जज ने करा लिया ट्रांसफर!अब लालू के बेटे के साथ दिखा शहाबुद्दीन का खूंखार शूटर