उत्तराखंड के जंगलों में किसने लगाई आग?
प्रशासन वो आग बुझाने में पूरी ताकत लगा रहा है. लेकिन जब आग लगाने वाले उनसे सयाने बैठे हैं तो कौन सा जुगाड़ काम आएगा?
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फोटो - thelallantop
उत्तराखंड के जंगलों में भयानक आग लगी है. आग रोज कहीं न कहीं लग रही है. दो दिन पहले दिल्ली के म्यूजियम में लगी तो सब फुंक गया. लेकिन उत्तराखंड खंड की आग अलग है. क्योंकि ये जंगल में लगी है. और ऐसा कहा जाता है कि हर साल लगती है.
आज देहरादून में उत्तराखंड के गवर्नर केके पौल ने बड़ा फैसला लिया. आग बुझाने में जो लोग लगे हैं उनकी संख्या डबल करने का. अभी तक वहां 3 हजार लोग जुटे हैं. आगे 6 हजार जुटाने का प्लान है. इसमें जंगलों के आस पास रहने वाले लोग भी हेल्प करेंगे.
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आग लगती नहीं, लगाई जाती है
आग तो हफ्तों से लगी है. उस पर मीडिया में भी कोई सुगबुगाहट नहीं है. लेकिन वहां रहने वाले कुछ अलग कहानी सुना रहे हैं. कह रहे हैं कि जंगल में आग बाकायदा लगाई जाती है. इससे नुकसान होता है करोड़ों का. जानवर मारे जाते हैं वो अलग. ये आग लगाते हैं लकड़ी और जमीन माफिया. फेसबुक पर इसके बारे में एक पोस्ट मिली है. जिसमें आग लगाने का पूरा मकसद और तरीका साफ है. इस पोस्ट में सत्तल का जिक्र है. आगे पढ़ो क्या लिखा है पोस्ट में."गांव वालों को वो माफिया पैसे देते हैं. जंगल में आग लगाने के लिए. अगर कोई हिस्सा जलने से बच जाता है तो वहां फिर आग लगाते हैं. हमने गांव के तीन छोटे लड़कों को आग लगाते देखा. पूछने पर बताया कि उनके घरवालों ने ऐसा करने को कहा है. हमने पानी से आग को बुझाया. अगले दिन आए तो फिर वहां आग जल रही थी. और वहां देखा कि आग से झुलसे पेड़ों पर निशान लगे हैं. जिनको काट कर बेचा जाना है."नैनीताल, भीमताल, सत्तल, अल्मोड़ा के तमाम लोगों ने अपनी आंखों से देखा है. ये आग और उन पेड़ों पर निशान लगाते हुए. ऐसा हर गर्मी के मौसम में होता है. [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/yla.smetacek/posts/10207779010246919"]

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