उत्तराखंड के जंगलों में भयानक आग लगी है. आग रोज कहीं न कहीं लग रही है. दो दिनपहले दिल्ली के म्यूजियम में लगी तो सब फुंक गया. लेकिन उत्तराखंड खंड की आग अलगहै. क्योंकि ये जंगल में लगी है. और ऐसा कहा जाता है कि हर साल लगती है. आजदेहरादून में उत्तराखंड के गवर्नर केके पौल ने बड़ा फैसला लिया. आग बुझाने में जोलोग लगे हैं उनकी संख्या डबल करने का. अभी तक वहां 3 हजार लोग जुटे हैं. आगे 6 हजारजुटाने का प्लान है. इसमें जंगलों के आस पास रहने वाले लोग भी हेल्प करेंगे.https://twitter.com/ANI_news/status/725977531677962240आग लगती नहीं, लगाई जाती हैआग तो हफ्तों से लगी है. उस पर मीडिया में भी कोई सुगबुगाहट नहीं है. लेकिन वहांरहने वाले कुछ अलग कहानी सुना रहे हैं. कह रहे हैं कि जंगल में आग बाकायदा लगाईजाती है. इससे नुकसान होता है करोड़ों का. जानवर मारे जाते हैं वो अलग. ये आग लगातेहैं लकड़ी और जमीन माफिया. फेसबुक पर इसके बारे में एक पोस्ट मिली है. जिसमें आगलगाने का पूरा मकसद और तरीका साफ है. इस पोस्ट में सत्तल का जिक्र है. आगे पढ़ोक्या लिखा है पोस्ट में. "गांव वालों को वो माफिया पैसे देते हैं. जंगल में आगलगाने के लिए. अगर कोई हिस्सा जलने से बच जाता है तो वहां फिर आग लगाते हैं. हमनेगांव के तीन छोटे लड़कों को आग लगाते देखा. पूछने पर बताया कि उनके घरवालों ने ऐसाकरने को कहा है. हमने पानी से आग को बुझाया. अगले दिन आए तो फिर वहां आग जल रही थी.और वहां देखा कि आग से झुलसे पेड़ों पर निशान लगे हैं. जिनको काट कर बेचा जाना है."नैनीताल, भीमताल, सत्तल, अल्मोड़ा के तमाम लोगों ने अपनी आंखों से देखा है. ये आगऔर उन पेड़ों पर निशान लगाते हुए. ऐसा हर गर्मी के मौसम में होता है.[facebook_embedded_posthref="https://www.facebook.com/yla.smetacek/posts/10207779010246919"]