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सपने देखने वाली लड़कियों के नाम, सेरेना विलियम्स की चिट्ठी

इस सशक्त खुले खत में सेरेना ने पुरूष-महिला खिलाड़ियों के भेदभाव पर लिखा है

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7 दिसंबर 2016 (अपडेटेड: 7 दिसंबर 2016, 01:27 PM IST)
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टेनिस इतिहास या यूं कहें कि खेल इतिहास की सबसे कामयाब महिला खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने एक खुला खत लिखा. इस खत में सशक्त चिट्ठी में सेरेना ने महिला टेनिस खिलाड़ियों को पुरूषों से कम धनराशि दिए जाने, उनकी कामयाबियों को सिर्फ महिला जगत की कामयाबियों की तरह पेश किए जाने और रंगभेद जैसे विषयों पर लिखा है. पेश है सेरेना की चिट्ठी


श्रेष्ठता के लिए कोशिश करने वाली सभी असाधारण महिलाओं के नाम,

"जब मैं बड़ी हो रही थी, मेरा एक सपना था. मुझे यकीन है आपका भी होगा. मेरा सपना किसी आम बच्चे के सपने जैसा नहीं था, मेरा सपना दुनिया में सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी बनने का था. दुनिया में सर्वश्रेष्ठ ‘महिला’ टेनिस खिलाड़ी बनने का नहीं.

मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे ऐसा परिवार मिला जिसने मेरे सपने में मेरा साथ दिया, इसे हासिल करने में मेरा हौसला बढ़ाया. मैंने निर्भय होना सीखा. मैंने सीखा कि एक सपने के लिए लड़ना कितना ज़रूरी है और सबसे बड़ी बात कि बड़ा सपना लेना कितना ज़रूरी है. मेरी लड़ाई उस वक़्त शुरू हुई थी जब मैं 3 साल की थी और उसके बाद मैं  कभी नहीं रुकी.

लेकिन जैसा कि हम जानते हैं, आमतौर पर औरतों को सपोर्ट नहीं मिलता, उन्हें अपने चुने रास्ते पर चलने से हतोत्साहित किया जाता है. मुझे उम्मीद है हम एकजुट होकर ये बदल सकती हैं. जहां तक मेरी बात है, दूसरों ने जिसे मेरी कमियां, मेरी खामियां माना -मेरा महिला होना, मेरी नस्ल- मैंने उन खामियों-कमियों को अपनी कामयाबी के ईंधन के तौर पर आत्मसात् किया. मैंने किसी को भी यह इजाजत नहीं दी कि वो मुझे या मेरी संभावनाओं को परिभाषित करे. मैंने अपना मुस्तकबिल खुद अपने काबू में रखा.

तो जब समान वेतन या ईनामी धनराशि का सवाल उठता है, मुझे खीझ होती है क्योंकि मुझे शुरूआत से ही ये पता है, मैंने अपने साथी पुरूष खिलाड़ियों की तरह ही कठिन मेहनत की है, मैंने वही कुर्बानियां दी हैं जो पुरूष खिलाड़ियों ने दी है. मैं कभी नहीं चाहूंगी कि मेरी बेटी को एक ही काम के लिए मेरे बेटे से कम तनख्वाह मिले. आप भी नहीं चाहेंगे.

जैसा कि हम जानते हैं, कामयाबी की राह में औरतों को कई अवरोध तोड़ने पड़ते हैं. उन अवरोधों में से एक बाधा होती है जिस तरह से हमें बार-बार याद दिलाया जाता है – हम पुरूष नहीं हैं. मानो कि ये भी कोई कमी हो. लोग मुझे 'दुनिया की महानतम महिला एथलीटों में से एक' कहते हैं. क्या वो ये भी कहते हैं कि लीब्रॉन या टाईगर वुड्स या फेडरर दुनिया के महानतम पुरूष एथलीटों में से एक है. क्यों नहीं? वो महिला नहीं हैं. हमें ये सब ऐसे ही नहीं चलते रहने देना चाहिए. हमें हमारी कामयाबियों के दम पर परखा जाना चाहिए, महिला या पुरूष होने के नाते नहीं.

मैंने अपनी ज़िंदगी में जो कुछ भी हासिल किया है, कामयाबी के साथ आने वाले उतार-चढ़ावों को अनुभव कर मैं पूरी तरह से कृतज्ञ हूं. मुझे उम्मीद है मेरी कहानी, आपकी कहानी, सारी युवतियों को प्रेरित करेंगी कि वो श्रेष्ठता के लिए कोशिश करें और अपने सपने की राह पर अडिगता से चलें. हमें बड़े सपने देखने ही चाहिए, और ऐसा करते वक्त हम आने वाली पीढ़ी की औरतों को सशक्त करती हैं कि वो भी अपनी कोशिशों में ऐसी ही दबंग रहें."

सेरेना विलियम्स

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सेरेना विलियम्स ने इस खुले खत को अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है. पुरूषों में सबसे ज्यादा 17 ग्रैंड स्लैम रोजर फेडरर ने जीते हैं और महिला टेनिस में 6 खिलाड़ियों ने 18 या उससे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीत रखे हैं. खुद सेरेना के नाम फेडरर से ज्यादा 22 ग्रैंड स्लैम है. लेकिन टेनिस के सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम किसने जीते हैं? ये सवाल पूछते ही जवाब आता है - रोजर फेडरर.

ये भी पढ़िए : टेनिस में ग्रैंड स्लैम क्या होता है ?

हमारे यहां क्रिकेट में भी मिताली राज को 'महिला क्रिकेट का सचिन तेंदुलकर कहा जाता है. हाल ही में एशिया कप का प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने जाने पर भी मिताली को सिर्फ 500 $ यानी कोई 33 हज़ार रूपए मिले थे. आप कह सकते हैं महिला क्रिकेट कम देखा जाता है इसलिए ऐसा होता है. लेकिन टेनिस के विषय में तो ये तर्क नहीं दिया जा सकता, महिला और पुरूष दोनों टेनिस एक जैसी देखी जाती हैं. और महिला टेनिस पुरूष टेनिस से ज्यादा प्रतिस्पर्धी है. महिला टेनिस में हर बार नंबर 10 का क्रम बदल जाता है, ग्रैंड स्लैम्स में जो नंबर वन वो सेमीफाइनल तक भी नहीं पहुंच पाती और कोई अनजानी सी खिलाड़ी अचानक से आकर जीत जाती है. शायद समस्या देखे जाने या न देखे जाने की नहीं है, बल्कि वही है जो सेरेना ने अपने खुले खत में बताने की कोशिश की है.

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