18 साल की रिया (बदला हुआ नाम) एम्स में अपनी नाक की सर्जरी करवाने पहुंची. सर्जनने उससे सायकॉल्जी वॉर्ड में जाने को कहा. चेक-अप के बाद पता चला कि दिक्कत नाक मेंनहीं उसके मन में थी. उसे वहम था कि उसकी नाक का शेप बदला हुआ लग रहा है. डॉक्टर केमुताबिक ये एक डिसऑर्डर है.इस तरह की ये अकेली लड़की नहीं है. इस तरह के और भी कई केस पिछले दो महीनों मेंसामने आए हैं जिनमें मरीजों को सायकोलॉजिकल दिक्कतें थीं. एम्स में 2 और सर गंगाराम हॉस्पिटल में ऐसे 3 केस आए. इन सभी को मोबाइल में सेल्फी लेकर और उसे फेसबुक परपोस्ट करने की बहुत बुरी तरह लत लग चुकी थी.एम्स के डॉक्टर नन्द कुमार ने कहा, ''ये मरीज अपनी बॉडी में आए बदलावों के इलाज केलिए आए थे. लेकिन पता चला, वो अपने शरीर को लेकर बहुत ज्यादा पजेसिव हैं. उन्हेंBody Dysmorphic Disorder था. ''--------------------------------------------------------------------------------ये वायरल का ज़माना है. बुखार नहीं, स्मार्टफोन वाला. लोग फोन में बिजी रहते हैं.मौक़ा देखकर कई सारी नई तरह की बीमारियों ने घुसपैठ कर ली है. एक नई बीमारी आई है.नाम है, ''सेल्फीसाइड''. सुसाइड का पैरोडी नाम लगता है लेकिन इसके लक्षण कतईसामान्य नहीं हैं. सेल्फी लेने की लत बढ़ती जा रही है, जो लोगों को डिप्रेशन की तरफले जा रही है.--------------------------------------------------------------------------------Symbolic Imageइस Disorder के लक्षण1. इस डिसऑर्डर में कोई भी शख्स अपने शरीर को शीशे या फोटो में देखता रहता है.2. वो बार-बार अपनी सेल्फी खींचता है और उन्हें देखता रहता है.यंगस्टर्स इसके ज्यादा शिकार हैं. लड़कियों को इसकी लत ज्यादा है. इनके पैरेंट्स नेभी बताया कि जब उन्हें सेल्फी लेने से और उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड करने से रोकाजाता है तो ये लड़के/लड़कियां अजीब तरह से व्यवहार करते हैं. उन्हें फेसबुक,इन्स्टाग्राम का चस्का होता है. इससे उनकी पढ़ाई-लिखाई और रोज के रूटीन पर भी असरपड़ता है.रिया को लगता है कि वो सारा दिन खूबसूरत दिखे और सोशल मीडिया पर उसकी फोटो बढ़ियाआए. वो फोटो अपलोड करने और उस पर आए लाइक्स-कमेन्ट देखने के चक्कर में खाना-पीनाभूल जाती है. इससे उसके सेहत पर भी बुरा असर पड़ा है.ये नए जमाने की बीमारी है. ये तो सिर्फ एक साइड इफ़ेक्ट है, फ़ोन से ज्यादा चिपकेरहने की वजह से इंसोम्निया, एंग्जायटी, बात-बात पर गुस्सा करना जैसी चीजें भी होतीहैं.अमेरिका की एक एसोसिएशन है. अमेरिकन सायकोलॉजिकल एसोसिएशन. उसका कहना है कि लगभग 60फीसदी औरतें 'सेल्फीसाइड' से ग्रसित हैं लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. उन्हेंडिप्रेशन और स्ट्रेस भी इसी बीमारी की वजह से होते हैं पर उन्हें पता ही नहीं चलता.इसकी वजह से लोग क्राइम की तरफ भी बढ़ सकते हैं.मेल टुडे को डॉक्टर मेहता ने बताया,''मैंने एक मरीज को देखा, जो बिना कपड़ों केसेल्फी लेती थी. उसकी दोस्तों ने उससे कह दिया था कि तुम्हारा फिगर बहुत अच्छा है.उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ ऐसी ही एक सेल्फी शेयर कर दी, जिसने उसका गलत इस्तेमालकर लिया. वो डिप्रेशन में चली गई और उसके पैरेंट्स उसे लेकर इलाज के लिए लाए.हालांकि बाद में हमने केस को संभाल लिया.'' डॉक्टर मेहता बताते हैं कि बहुत सी ऐसी लड़कियों से मैं मिला जिन्हें शीशे की जगहअपने स्मार्टफोन पर ही फोटो खींचकर अपना चेहरा देखना पसंद था. डॉक्टर देसाई ने एक12 साल के लड़के के बारे में बताया कि स्मार्टफोन ने उसकी पढ़ाई चौपट कर दी थी.पैरेंट्स परेशान थे.इससे पहले भी कुछ ऐसे मामले आए जिसमें लोगों ने सेल्फी के चक्कर में जान तक दे दी.बढ़िया बैकग्राउंड, ऊंचाई, थ्रिल के चक्कर में उनके साथ हादसे हो गए. कुछ लोगों नेसेंसिटिव जगहों से भी अपनी सेल्फी सोशल मीडिया पर चिपका दी थीं.एक डेटा के हिसाब से देश के शहरों में चालीस से पचास लाख स्मार्टफ़ोन हैं. 2012-14के बीच इनमें 40 से 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. तब से नई-नई बीमारियां भी वजूदमें आ गई हैं. अगली बार 'पाउट' बनाकर बार-बार सेल्फी खींचने से पहले रूकिए औरसोचिए, कहीं आपको 'सेल्फीसाइड' तो नहीं.-------------------------------------------------------------------------------- ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें-इस सेल्फी ने केरल के सीएम को भी झंझट में डाल दिया हैवीडियो: आतंकवादी ने सेल्फी ली और उससे जुड़ा बम फट गयासेल्फी विद कोबरा इंस्टाग्राम पर, फोटो खींचक जेल में