हमको किसके गम ने मारा ये कहानी फिर सही. आज तो सुनो ये घिनही कहानी गम की. कसम सेलार न चू जाए तो कहिना. बीग बीग बबल चबा कर मुंह से गुब्बारा फुलाने में बड़ा मजाआता है. वो फुग्गा हाथ से पकड़ के खींचो तो मम्मी एक कंटाप मारती थी. किसी कीकुर्सी पर चिपका दो तो परलय हो जाए ऐसा खौफ च्युइंग गम का. लेकिन दुनिया में एक ऐसीजगह है जहां च्युइंगम चिपकानों वालों को कंटाप नहीं पड़ता, उनकी कद्र होती है. येदीवार है अमेरिका के शहर सीटेल में. तो भाईसाब ये दीवार नहीं टूटेगी. न जी न,अंबुजा सीमेंट से नहीं बनी है. ये बनी है ढेर सारे च्युइंग गम से. ऐसा ही लगता थाइसे देख कर. अब से कुछ रोज पहले. इस दीवार पर पूरे 20 साल तक इस पर खाए चबाएच्युइंगम चिपकाने का महापर्व चलता रहा. 1993 से शुरू हुआ था ये सिलसिला. अब तक चलतारहा था. जैसे जैसे इस पर लोड बढ़ता गया. यहां ढेर सारे टूरिस्ट आते गए.https://www.youtube.com/watch?v=0Hbn78BZgPw 3 नवंबर 2015 को अथॉरिटीज ने ऐलान करदिया. कि देखो भाई दीवार की ईंटे गल रही हैं इसकी चीनी की वजह से. 10 नवंबर को सफाईशुरू हुई. 130 घंटे चिपक कर चली सफाई. जिसमें 1070 किलो चिपका हुआ च्युइंगम निकला.फिर अगले दिन पेरिस अटैक में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए इस पर नएसिरे से च्युइंगम चिपकाना शुरू हो गया.https://www.youtube.com/watch?v=xCr-VPLAKR0