गर्मी इतनी कि सड़क पिघल गई!
"गंजे के सिर पर अंडा फोड़ो तो ऑमलेट बन जाए" वाली कहावत भूल जाओ. एक तो वो ऑफेंसिव है. दूसरे अब गर्मी उस लाइन के आगे बढ़ चुकी है.
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फोटो - thelallantop
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'उफ कितनी गर्मी है' ये कमरे में बैठ के पता नहीं चलेगा. धूप में निकलो तब चोटिया से चला पसीना एड़ी तक दौड़ता है. लेकिन फिलहाल गर्मी के लिए सब पैमाने छोट पड़ रहे हैं. गुजरात के वल्साड जिले का हाल ये है कि वहां रोड पिघल रही है.
मजाक नहीं कर रहे वीडियो देख लो. रोड का डामर इत्ता गरम हुआ कि पिघल गया. उस पर चलने वालों के चप्पल चिपक जाते हैं उसमें. अब चप्पल हाथ में लें तो पैर में खौलता तारकोल चिपक जाए.
https://www.youtube.com/watch?v=2EDC6sF36Ew
कैसे निकले आदमी दोपहर में. काम धाम सब बंद. जब तक गर्मी है घर में पड़े रहो. कच्चा आम आने लगा है. पना बनाओ और पियो. खाने पीने में बैलेंस बनाके रखो नहीं तो कालरा हो जाता है. बूढ़े पुरनिया जो कहें उसको मानों. हिसाब से चलो जब तक गर्मी चली न जाए.

