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शिवराज सरकार में फिर से मंत्री बने तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत कौन हैं?

मध्य प्रदेश में उपचुनाव के करीब 53 दिन बाद कैबिनेट विस्तार.

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3 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 3 जनवरी 2021, 09:23 AM IST)
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने तुलसीराम सिलावट (बाएं) और गोविंद सिंह राजपूत (दाएं) को मंत्री की शपथ दिलाई.
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रविवार, तीन जनवरी 2021. मध्य प्रदेश में उपचुनाव के करीब 53 दिन बाद, शिवराज सरकार का तीसरा कैबिनेट विस्तार हुआ. राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट को मंत्री की शपथ दिलाई. इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक,  दोनों नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक माने जाते है. गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट के शपथ ग्रहण के बाद माना जा रहा है कि दोनों को पहले वाली जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व और परिवहन, जबकि तुलसी सिलावट को जल संसाधन विभाग का जिम्मा मिल सकता है. मार्च 2020 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद सबसे पहले पांच मंत्रियों ने शपथ ली थी. फिर दो जुलाई को 28 मंत्रियों ने शपथ ली. इस तरह से राज्य में कुल 33 मंत्री हो गए थे. एमपी कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या अधिकतम 34 हो सकती है. मौजूदा समय में शिवराज कैबिनेट में छह मंत्री पद खाली थे, लेकिन दो मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए नेताओं को शिवराज सरकार की कैबिनेट में मंत्री बनाया गया था, जिनमें से दो मंत्री तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत ने छह महीने का कार्यकाल पूरा होने के चलते उपचुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया था. इसके अलावा उपचुनाव में तीन मंत्रियों की हार हुई थी. महिला और बाल विकास मंत्री रहीं इमरती देवी, कृषि राज्यमंत्री रहे गिर्राज डंडोतिया और एंदल सिंह कंसाना को इस्तीफा देना पड़ा था.

कौन हैं तुलसीराम सिलावट

सांवेर से बीजेपी के विधायक. सिलावट ने छात्र जीवन से राजनीति पारी शुरू की. कांग्रेस से. 1980-81 में इंदौर के देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे. 1982 में इंदौर में पार्षद बने. 1985 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता. उन्हें संसदीय सचिव की अहम जिम्मेदारी दी गई. 1995 में नेहरू युवा केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने. इसके बाद 1998-2003 तक ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. इस दौरान उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष बनाया गया. 2007 में उपचुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर से टिकट दिया और वे जीते. इसके बाद 2008 के आम चुनाव में जीत हासिल की. सिलावट 2018 में चौथी बार विधायक बने और कमलनाथ सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. उन्हें स्वास्थ्य विभाग की अहम जिम्मेदारी दी गई. 10 मार्च 2020 को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए. शिवराज सरकार में उन्हें जल संसाधन और मछुआ कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद हुए उपचुनाव में जीत हासिल कर वे पांचवीं बार विधायक बने और एक बार फिर से उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है.

कौन हैं गोविंद सिंह राजपूत

सुरखी से बीजेपी विधायक. उन्होंने सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया था. 2002 से 2020 तक प्रदेश कांग्रेस के महासचिव और उपाध्यक्ष के पद पर रहे. उन्होंने 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता. उन्हें कांग्रेस विधायक दल के सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. 2008 में दूसरी बार विधायक बने, लेकिन 2013 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 2018 में बीजेपी उम्मीदवार सुधीर यादव को हरा कर राजपूत एक बार फिर विधायक बन गए. उन्हें कमलनाथ सरकार में परिवहन और राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली. गोविंद सिंह राजपूत 10 मार्च 2020 को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे. शिवराज सरकार में उन्हें खाद्य और सहकारिता मंत्री बनाया गया. राजपूत उन पांच मंत्रियों में शामिल रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट का सदस्य बनाया था. मंत्रिमंडल के विस्तार में राजपूत को फिर से परिवहन और राजस्व विभाग दिया गया. छह माह की अवधि समाप्त होने के कारण उन्हें मंत्री पद से 20 अक्टूबर को इस्तीफा देना पड़ा था. राजपूत ने उपचुनाव में कांग्रेस की पारुल साहू को हराया और चौथी बार विधायक बने.

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