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'सहकर्मी यौन उत्पीड़न कर रहा है' अंटार्कटिका पर मौजूद वैज्ञानिकों ने लगाई मदद की गुहार

अंटार्कटिका रिसर्च बेस में तैनात वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने मदद की अपील की है. और एक साथी सहकर्मी की तरफ से किए शारीरिक उत्पीड़न, यौन शोषण और जान से मारने की धमकियों को रिपोर्ट किया है. ईमेल में साइंटिस्ट ने बताया है कि उन्हें अपनी सेफ्टी को लेकर डर लग रहा है.

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Scientists in Antarctica send SOS, report sexual assault by colleague
अंटार्कटिका से वैज्ञानिकों ने ईमेल के जरिए मदद मांगी हैं. (फोटो- द टाइम्स)
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रितिका
20 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 09:58 AM IST)
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अंटार्कटिका से वैज्ञानिकों के एक समूह ने ईमेल के ज़रिए मदद मांगी है. यह ईमेल रिमोट अंटार्कटिका रिसर्च बेस से भेजी गई है. ईमेल में वैज्ञानिकों ने एक सहकर्मी पर शारीरिक उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकियां देने का आरोप लगाया है. दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने भी स्वीकार किया है कि उत्पीड़न की घटना हुई है.

जिस टीम ने यह ईमेल भेजा है, वह इस समय Sanae IV रिसर्च स्टेशन पर है. यह दक्षिण अफ्रीका की राजधानी केप टाउन से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है. इंडिया टुडे से जुड़ी अनुप्रिया ठाकुर की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने 'तुरंत कार्रवाई' की अपील की है. उन्होंने ईमेल में बताया कि एक साथी रिसर्चर ने एक सहकर्मी पर हमला किया और आगे भी हिंसा की धमकी दी.

ईमेल में क्या बताया गया?

दक्षिण अफ्रीका के अख़बार संडे टाइम्स ने उत्पीड़न की खबर को सबसे पहले रिपोर्ट किया था. जिसके बाद द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी खबर को विस्तार से छापा. अख़बार ने ईमेल में बताई गई हिंसा के बारे में लिखा, लेकिन इस दौरान सभी नामों को हटा दिया गया. ईमेल में लिखा था:

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ईमेल में आगे लिखा था:

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आरोपी ने मांगी माफ़ी

दक्षिण अफ्रीका के पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि घटना की सूचना सबसे पहले विभाग को 27 फरवरी को दी गई थी. मंत्रालय ने कहा कि वह इस घटना पर नज़र बनाए हुए है. साथ ही यह भी बताया कि कथित अपराधी ने 'अपनी मर्ज़ी से मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में भाग लिया' है और उसे अपने किए पर पछतावा है. मंत्रालय ने यह भी बताया कि आरोपी ने पीड़ित से औपचारिक रूप से माफ़ी मांगी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण मंत्री डियोन जॉर्ज ने संकेत दिया कि यह विवाद एक कार्य (टास्क) को लेकर शुरू हुआ था. टीम लीडर अपनी टीम से एक टास्क पूरा करवाना चाहते थे, लेकिन यह कार्य मौसम पर निर्भर था, जिसके लिए अनुसूची (शेड्यूल) में बदलाव करना पड़ता. फिलहाल, अंटार्कटिका के मौसम की वजह से वहां बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) करना मुश्किल है.

ग़ौरतलब है कि 1959 से दक्षिण अफ्रीका अंटार्कटिका में अनुसंधान कर रहा है. आमतौर पर इस मिशन में एक डॉक्टर, मैकेनिक, इंजीनियर, एक मौसम विज्ञान तकनीशियन और एक भौतिक विज्ञानी (फिजिसिस्ट) की छोटी टीम तैनात की जाती है.

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