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'सावरकर ने 5 बार दया याचिका दी थी', परपोते ने पुणे की अदालत को क्या-क्या बताया?

Vinayak Damodar Savarkar के परपोते Satyaki Savarkar को Rahul Gandhi की एक टिप्पणी पर ऐतराज था. लिहाजा उन्होंने कोर्ट में Criminal Defamation का केस किया. सत्यकी ने बताया कि कि सावरकर ने तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के सामने पांच Mercy Petition दायर की थीं.

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3 मई 2026 (अपडेटेड: 3 मई 2026, 09:47 PM IST)
Savarkar Filed Mercy Petitions Before British 5 Times Treated Cow As Useful Animal Not God said Grandnephew to the Court
सत्यकी ने वीडी सावरकर के बारे में कोर्ट में कई बातें कहीं. (PHOTO-AajTak)
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सत्यकी सावरकर ने कोर्ट को बताया है कि ये बात सच है कि विनायक दामोदर सावरकर ने सेल्यूलर जेल में रहते हुए ब्रिटिश सरकार को पांच दया याचिकाएं लिखी थीं. उन्होंने ये भी कहा कि सावकर ने गाय को कभी ‘भगवान’ नहीं कहा था. उन्होंने उसे सिर्फ एक ‘उपयोगी जानवर’ माना था. इसके अलावा, सत्यकी ने कोर्ट में ये भी साफ किया कि ‘टू-नेशन थ्योरी’ जिसे देश के बंटवारे का जिम्मेदार बताया जाता है, उसका प्रस्ताव सावरकर ने कभी नहीं रखा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस में जिरह (cross-examination) के दौरान सत्यकी ने ये बातें पुणे की एक अदालत में कही हैं. 

ये मामला सत्यकी सावरकर की उस शिकायत से जुड़ा है, जो उन्होंने अप्रैल 2023 में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज कराई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान विनायक दामोदर सावरकर के बारे में झूठी और मनगढ़ंत बातें कही थीं. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सत्यकी ने अपने क्रॉस एग्जामिनेशन में कहा कि ये कहना सही है कि सावरकर ने सेल्युलर जेल में रहते हुए 5 बार माफी की अर्जी (mercy petitions) दी थी. लेकिन सिर्फ सावरकर ने नहीं बल्कि कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी ब्रिटिश सरकार को ऐसी अर्जी भेजी थीं.

ये कहना सच है कि सेल्यूलर जेल में रहते हुए सावरकर ने 5 बार दया याचिकाएं दायर की थीं. सिर्फ सावरकर ही नहीं बल्कि कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी ब्रिटिश सरकार को इसी तरह की याचिकाएं भेजी थीं. 

‘टू-नेशन थ्योरी’ पर उन्होंने कहा कि ये कहना सही नहीं है कि कुछ इतिहासकार सावरकर पर इस थ्योरी का प्रस्ताव रखने का आरोप लगाते हैं. सावरकर ने इस विवाद पर अपनी राय जरूर रखी थी, लेकिन इसका मूल विचार उनका नहीं था बल्कि सर सैयद अहमद खान ने इसे पहले रखा था. सत्यकी ने यह भी माना कि सावरकर के विचारों में गाय को ‘भगवान’ नहीं, बल्कि एक उपयोगी जानवर बताया गया है. सत्यकी के मुताबिक, ये कहना गलत है कि सावरकर ने ब्रिटिश सेना में भर्ती के लिए अपील भी की थी. उन्होंने कहा,

ये कहना सही नहीं है कि सावरकर पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भर्ती के लिए अपील करने का आरोप है. यह कोई आरोप नहीं, बल्कि एक आपत्ति है. ऐसी आपत्तियां सावरकर की भूमिका को समझे बिना ही उठाई जाती हैं. इसका उद्देश्य युवाओं को तत्कालीन भारतीय सेना में शामिल करवाकर उन्हें मिलिट्री ट्रेनिंग, हथियारों की ट्रेनिंग और सेना में काम करने का अनुभव प्रदान करना था. 

सत्यकी ने कहा कि ऐसा किया गया ताकि भारत के आजाद होने के बाद उसकी आजादी को बनाए रखने के लिए उसके पास अपनी खुद की सशस्त्र सेना हो. यह सावरकर की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि स्वतंत्रता के तुरंत बाद जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया तो प्रशिक्षित भारतीय सैनिकों की बदौलत भारत विजयी हो सका.

सावरकर का ही महिमामंडन क्यों?

सत्यकी सावरकर से सवाल किया गया कि सावरकर को भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त जैसे अन्य क्रांतिकारियों की तुलना में ज्यादा महिमामंडित क्यों किया जाता है? सत्यकी ने इस सवाल का जवाब देने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि बहस और विचारों में मतभेद हर महान व्यक्ति के जीवन का हिस्सा होते हैं. हर राष्ट्रीय गौरव को सामने लाना भारत सरकार का काम है. इसके अलावा उनसे पूछा गया कि सावरकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और इस विचारधारा वाली राजनीतिक पार्टियों के वैचारिक प्रेरणास्रोत हैं. इस पर सत्यकी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि RSS और ऐसी ही अन्य राजनीतिक पार्टियां किसे अपना वैचारिक प्रेरणास्रोत मानती हैं.

संसद में सावरकर की पेंटिंग क्यों?

सत्यकी से पूछा गया कि कि संसद में सिर्फ सावरकर की ही ऑयल पेंटिंग क्यों लगी है. इस पर सत्यकी ने कहा कि इस बारे में फैसला करना भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. लेकिन उन्होंने गाय और सेना में भर्ती होने को लेकर विनायक सावरकर की सोच पर बात की. उन्होंने कहा कि गाय या सेना में भर्ती को लेकर सावरकर के विचारों पर जो आपत्तियां उठाई गई हैं, वे उनके योगदान को पूरी तरह समझे बिना ही की गई हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग इस पर आपत्ति जता रहे हैं, वे पहले सावरकर के सभी विचारों को पढ़ें. सत्यकी ने कहा,

मैं एक बार फिर यह भी कहना चाहूंगा कि क्रांतिकारियों की आपस में तुलना नहीं की जानी चाहिए. भारत सरकार राष्ट्रीय गौरव को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लेती है. 

इसके अलावा उनसे पूछा गया कि कुछ विचारधारा वाले लोगों ने द्वारा सावरकर को भारत रत्न देने की मांग भी की है. इस पर सत्यकी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ये लोग कौन हैं, जो सावरकर के लिए ऐसे सम्मान की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस बारे में फैसला भारत सरकार ही करती है. उन्होंने यह भी कहा कि एक ही परिवार से इंदिरा गांधी, उनके बेटे राजीव गांधी और उनके पिता जवाहरलाल नेहरू को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है.

वीडियो: राहुल गांधी को जमानत मिली, सावरकर पर 'अपमानजनक' टिप्पणी का मामला

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