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सऊदी अरब में शतरंज का खेल खतम

हेड मुफ्ती ने कहा है कि इस्लाम में हराम है चेस का खेल. जुआ और टाइमनास भर है.

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23 जनवरी 2016 (अपडेटेड: 23 जनवरी 2016, 08:49 AM IST)
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सऊदी अरब का कानून तो माशा अल्ला है. टाइम टाइम पर इन कानूनों में अजब गजब चेंज भी होते हैं. बिल्कुल नया चेंज है शतरंज के खेल पर हेड मुफ्ती का फतवा. फिर खेल पर बैन. शेख अब्दुल अजीज बिन अब्दुल्ला, अरब के मेन मुफ्ती हैं. एक टीवी शो में उनसे क्वेस्चन आंसर चल रहा था. बात पहुंची एक वायरल वीडियो तक. पिछले हफ्ते ये वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा था. इस पर मौलाना जी ने कहा- शतरंज का खेल टाइम नास है. पैसा गंवाने के लिए खेलते हैं. जुए की लत भी लग जाती है इससे. लोगों के बीच नफरत और दुश्मनी पैदा हो जाती है. कुरान के हिसाब से शतरंज इस्लाम में हराम है. ये स्टेटमेंट कानून बनाने के लिए नहीं था लेकिन बन गया. अब सऊदी अरब में चेस खेलना गैरकानूनी है. खेलने वालों ने इसका विरोध किया. इससे पहले 1979 में इस्लामिक रेवोल्यूशन हुआ था ईरान में. वहां इस खेल पर बैन पर लग गया था. इस बात का हवाला देकर कि चेस जुए का खेल है. 1988 में सीनियर लीडर अयातुल्ला रुहोल्ला खुमैनी ने बैन हटा दिया. बता दिया कि चेस और जुए का कोई कनेक्शन नहीं है. मजे की बात ये है कि चेस की पैदाइस तो भारत में हुई. उसकी जड़ें इस्लाम से ज्यादा पुरानी हैं. कहीं लिखा पढ़ा मिलता है कि एक हिंदू राजा ने फारसी राजा को चेस बोर्ड गिफ्ट किया था. छठी सदी में. फारसी कहानी कविताओं में भी इसका जिक्र आता है. पुराने आर्ट में भी चेस खेलते खिलाड़ी दिखते हैं.

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