'प्रधानसेवक' मोदी मास्टर कम्यूनिकेटर हैं. लेकिन एक बात है. वो हर बात सही तरह सेही कम्यूनिकेट करते हैं, ऐसा नहीं है. मुस्लिम औरतों को बगैर महरम हज पर जाने कीछूट 'देने' के बारे में उनके बयान के बारे में भी ऐसा ही है. इस्लाम में महरम कामतलब गार्डियन है. जैसे आपके स्कूल-कॉलेज में होता है. एक मुस्लिम औरत का महरम यातो उसका पति होता है, या फिर ऐसा बालिग लड़का / आदमी जिससे उसका खून का रिश्ता हो.31 दिसंबर, 2017 को अपने 'मन की बात' कहते हुए प्रधानमंत्री बोल गए कि अल्पसंख्यकमामलों के मंत्रालय को उन्होंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभीमहिलाओं को हज जाने की अनुमति मिले जो अकेले आवेदन कर रही हैं, साथ ही उन्हेंस्पेशल श्रेणी में अवसर दिया जाए. इसका मतलब ये निकला कि पहले औरतें बिना महरम हजपर नहीं जा सकती थीं.इधर प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखी, उधर भाजपा की आईटी सेल ने उसे ट्वीट भी दिया.प्रधानमंत्री के बयान के अगले ही दिन कांग्रेस नेता शकील अगमद ने ट्वीट कर के कहाकि महरम वाला नियम तो सउदी सरकार ने बदला है, तो क्रेडिट मोदी जी ने कैसे ले लिया.असदुद्दीन औवेसी ने भी यही बात कही. तो सच बोल कौन रहा है. प्रधानमंत्री मोदी याफिर शकील-औवेसी?वो नियम जिसके लिए बयानबज़ी हो रही थीभारत के नागरिक हज पर यूं ही नहीं जा सकते. आपको आवेदन देना होता है. वो स्वीकारहुआ तभी आप हज पर जा सकते हैं. अब तक हज कमिटी ऑफ इंडिया का ये नियम था कि हज परजाने वाली महिलाओं के साथ एक महरम ज़रूर होना चाहिए. हज के लिए एप्लिकेशन में महरमऔर उससे रिश्ता लिखना होता था.असल नियम किसका था ये और किसने बदला?काबा सउदी अरब में है. तो हज पर 'क्या करें न करें' वाले नियम वही बनाता है. इननियमों के मुताबिक कोई अकेली औरत हज नहीं कर सकती थी. फिर 2014 में सउदी सरकार नेइस नियम को थोड़ा ढीला किया. कहा कि 45 साल से ज़्यादा उम्र वाली औरतें बिना महरमके भी हज कर सकती हैं, बशर्ते उनके महरम इजाज़त दें और 4-5 औरतें एक ग्रुप बनाकरआएं.लाल घेर में बिना महरम के औरतों के हज पर आने से जुड़ा नियम हैतो फिर मोदी सरकार ने क्या किया?हज कमिटी ऑफ इंडिया आवेदन लेते हुए उन्हीं सब नियमों का पालन करती है, जो सउदीसरकार के बनाए होते हैं. तो महरम वाला नियम भी लागू था. तब भी, जबकि मूल नियम सउदीसरकार बदल चुकी थी.फिर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पैनल बनाया जिसे 2018-22 के लिए हज पॉलिसीबनानी थी. इस पैनल ने सरकार से अपनी सिफारिश में कहा कि 45 साल से ऊपर की औरतों कोबिना महरम हज पर जाने देना चाहिए, बशर्ते वो 4-5 के ग्रुप में जाएं. सरकार ने इससिफारिश को माना है. बस. अब प्रधानमंत्री ही बता सकते हैं कि वो क्यों बोल गए किउन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से नियम बदलने को कहा था.एक पैनल नोदी जी से पहले ही महरम वाले नियम को बदलने की सिफारिश कर चुका था.औरतें हमेशा से बिना महरम हज पर जाती रही हैंऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री के नियम बदलने से पहले कोई औरत बिना महरम हज पर नहींगई. भारत के 1,70000 कोटे में से लगभग 45 हज़ार लोग प्राइवेट टूर ऑपरेटर के ज़रिएहज पर जाते हैं. ये प्राइवेट टूर ऑपरेटर 2014 के बाद से औरतों को बिना महरम हज परले जाते रहे हैं. 1997 में प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स के आने से पहले भी औरतें ग्रुपबनाकर हज पर जाती रही हैं. कभी ये हज पर जा रहे किसी बड़े दल में शामिल हो जाती थींतो कभी किसी अंजान को कागज़ पर महरम बता देती थीं.तो कुल जमा बात ये कि 45 साल से ज़्यादा की उम्र की औरतें हमेशा से बिना महरम के हजकरती रही हैं. जो रोक लगी थी, वो सउदी सरकार का नियम था और उसी ने उसे बदला भी.भारत सरकार ने उन नियमों को बस अपने यहां लागू किया, वो भी तीन साल की देरी से.इसका फायदा भी सिर्फ उन औरतों को मिलेगा जो हज कमेटी की ज़रिए हज पर जाएंगी. अबप्रधानमंत्री ने मन की बात में जो कहा वो क्यों कहा, उनका मन ही जानता है.काबा के पास बैठी औरतें. (फोटोः रॉयटर्स)चलते-चलते एक कायदे की बात और जान लीजिए. वो ये कि ये महरम वाला कानून आया कहां से-ख्यात इतिहासकार राणा सफवी ने अंग्रेज़ी वेबसाइट डेली ओ में लिखे एक लेख मेंविस्तार से बताया है कि हज जाने वाली महिलाओं के साथ महरम होने की शर्त इस्लाम मेंअनिवार्य नहीं है. वो बताती हैं,''कुरान में लगभग 25 ऐसी आयते हैं जो बताती हैं कि हज के दौरान क्या सही है और क्यानहीं. इनमें से एक में भी ये नहीं लिखा है कि हज जाने वाली औरत के साथ कोई महरम हो.महरम वाली शर्त सउदी अरब के कानून में है. अब चूंकि काबा सउदी अरब में है, तो वहांजाने के लिए आपको उस देश के नियम मानने पड़ते हैं.''कुछ लोग महरम वाली शर्त को हदीस का हिस्सा बताते हैं. लेकिन हदीस का संकलन मुहम्मदसाहब के समय में हुआ था. तब मक्का का रास्ता सूने रेगिस्तान से होकर गुज़रता था औरवहां चोर-डाकुओं का खतरा था. अब स्थितियां बदल गई हैं. 14वीं सदी में हुए मुस्लिमविचारक इब्न मुफलिह ने भी कहा था कि मुस्लिम औरतें बिना महरम के हज पर जा सकती हैं,बशर्ते वो सुरक्षित हों.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःपैगंबर मुहम्मद के वक़्त का वो दूसरा पैगंबर, जो काबे की तरफ मुंह कर के नमाज़ पढ़नेको मूर्तिपूजा कहता थासऊदी अरब के इस वादे से कट्टर मुसलमानों को बहुत मिर्च लगने वाली हैइस्लाम से पहले अरब के लोग शारीरिक संबंधों को लेकर खुली सोच के थेइस्लाम के आने से पहले औरतों की स्थिति कैसी थी?अरब की तीन देवियों की कहानी, जिन्हें अल्लाह की बेटियां माना जाता थाVideo: वो पुलिसवाला, जो गोली मारकर नहीं, गाना गाकर एनकाउंटर करता है