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सऊदी के कहने पर अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' रोका, अब इस देश के साथ मिलकर फिर करेगा शुरू!

Saudi Arabia Project Freedom: रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी बेस पर रोक लगाने और अपने एयरस्पेस बंद करने की धमकी दी थी, जिसके बाद ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम होल्ड करने का फैसला लिया. दो दिन पहले उन्होंने बताया कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है.

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8 मई 2026 (पब्लिश्ड: 03:12 PM IST)
Saudi Arabia Project Freedom
क्राउन प्रिंस के कहने पर ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम रोक दिया. (फोटो-इंडिया टुडे)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के कहने पर प्रोजेक्ट फ्रीडम पर रोक लगाई थी. ऐसा NBC न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिकी बेस पर रोक लगाने और अपने एयरस्पेस को बंद करने की धमकी दी थी, जिसके बाद ट्रंप ने ये फैसला लिया. हालांकि, अब नया अपडेट है कि यह प्रोजेक्ट फिर से शुरू हो सकता है. बताया जा रहा है कि सऊदी अरब और कुवैत ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की दोबारा अनुमति दे दी है. 6 मई को ट्रंप ने एक पोस्ट कर बताया था कि अमेरिका और ईरान की बातचीत बहुत अच्छी चल रही है. इसलिए उन्होंने प्रोजेक्ट फ्रीडम को होल्ड पर रखा है. 

इंडियन एक्सप्रेस ने NBC के हवाले से लिखा, प्रेसिडेंट ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच फोन कॉल पर बात हुई. लेकिन ये बातचीत अच्छी नहीं रही. जिसके बाद ट्रंप ने अपने ऑपरेशन पर रोक लगाने का फैसला किया. कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस बंद करने और मिलिट्री बेस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. सऊदी अरब को डर है कि ट्रंप का ये ऑपरेशन फिर से मिडिल ईस्ट में जंग शुरू करवा सकता है. 

सऊदी अरब का तर्क क्या है?

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में फंसे जहाजों को बाहर निकालने का दावा करते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) लॉन्च किया था. उन्होंने कहा कि कई देशों ने वॉशिंगटन से मदद मांगी कि उनके जहाज वहां से बाहर निकाले जाएं. सऊदी अरब का कहना है कि इसकी वजह से ईरान फिर से अरब देशों को निशाना बना सकता है. इस ऑपरेशन के लॉन्च होते ही उनकी चिंता बढ़ गई. ईरान-अमेरिका जंग में पहले भी अरब देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा चुका है. कई अरब देश इस बात से नाखुश है कि उन्हें बेवजह जंग में घसीट लिया गया है. 

मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब अमेरिका का सबसे बड़ा सहयोगी देश है. फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब मिडिल ईस्ट में शांति बहाल करने की कोशिश में लगा हुआ है. वो नहीं चाहता कि फिर से जंग शुरू हो. अमेरिका ने होर्मुज में नाकेबंदी लगा दी है, लेकिन मिलिट्री ऑपरेशन चलाने के लिए उन्हें अरब देशों में मिलिट्री बेस की ज़रूरत पड़ेगी.  

ये भी पढ़ें: ईरान के आगे झुक गया अमेरिका? ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' खत्म करने का किया ऐलान

डील कहां तक पहुंची?

डॉनल्ड ट्रंप के प्रोजेक्ट फ्रीडम वाले ऐलान के बाद विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी एक ऐलान किया. उन्होंने बताया कि ईरान के खिलाफ लॉन्च किया गया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ खत्म हो चुका है. उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन के ऑब्जेक्टिव पूरे हो चुके और और अमेरिका अब डील करने को तैयार है. ट्रंप ने बताया है कि ईरान से उनकी बातचीत आखिरी स्टेज पर पहुंच चुकी है और जल्द ही डील साइन हो सकती है. 

वीडियो: दुनियादारी: ट्रंप का प्रोजेक्ट फ्रीडम कैसे फेल हो गया?

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