, अल-कायदा और हउती जैसे विदेशी आतंकवादी संगठनों के प्रति वफादारी, पथभ्रष्ट सोचजैसे अपराध शामिल थे."एजेंसी के मुताबिक, कुछ लोगों ने आतंकी संगठन से जुड़ने के लिए 'संघर्ष वाले'क्षेत्रों की यात्रा की. करीब 37 लोगों पर सिक्योरिटी ऑफिसरों पर जानलेवा हमलेकरने, पुलिस स्टेशनों और काफिलों को निशाना बनाने का मामला दर्ज था. एजेंसी कीरिपोर्ट के मुताबिक, न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सऊदी कानून के तहत इन आरोपियों केसभी अधिकारों की सुरक्षा की गई थी. इन्हें वकील चुनने का भी अधिकार दिया गया था.रिपोर्ट में कहा गया,"पूरी दुनिया के लिए खतरा बनने वाले आतंकवादी और अतिवादी विचारधाराओं के खिलाफ शासनअपने कड़े और मजबूत कदम उठाना जारी रखेगा."न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की सजा किस तरह दी गई, इस बारे मेंसरकार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है. माना जा रहा है कि एक साथ इतने लोगों कोमृत्युदंड देने का ये अब तक का सबसे बड़ा मामला है. सऊदी अरब में इससे पहले साल2021 में 67 और 2020 में 27 लोगों को मौत की सजा दी गई थी. हालांकि, आखिरी बार 'मासएग्जीक्यूशन' 2016 की जनवरी में हुआ था. जिस दौरान 47 लोगों को एक साथ सजा दी गईथी. जिसमें एक प्रभावी शिया नेता भी शामिल थे.सऊदी अरब के दावों पर उठ रहे सवाल!अधिकार समूहों और पश्चिमी देशों की ओर से सऊदी अरब में मानवाधिकार की सुरक्षा केदावों पर सवाल उठते आ रहे हैं. खासकर, 2018 में 'द वाशिंगटन पोस्ट' के पत्रकार जमालखाशोगी की हत्या के बाद तो ये सवाल और गहराते जा रहे हैं. इसके साथ ही यहां राजनीतिऔर धार्मिक अभिव्यक्तियों को दबाने के कानूनों की भी काफी निंदा की जाती है.दूसरी तरफ सऊदी अरब हमेशा से ऐसे आरोपों को खारिज करता आया है. सऊदी का कहना है किवो राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत कार्रवाई करता है.पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या के बाद से सऊदी अरब लगातार सवालों के घेरे में है.फोटो- आजतकअधिकार रक्षा समूहों ने इस बार भी 'मास एग्जीक्यूशन' की निंदा की है. न्यूयॉर्कटाइम्स की खबर के मुताबिक, समूहों ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमानके उन दावों पर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें कहा जा रहा था कि देश अपनी न्यायिकप्रणाली में सुधार ला रहा है और मृत्युदंड को सीमित किया जा रहा है. अधिकार समूहोंने कहा कि मौत की सजा 'न्याय' के विपरित है. उनका कहना है कि जिनको मृत्युदंड मिलाहै, इनमें से कई पर ऐसे मामले दर्ज हैं, जिसमें खून का एक कतरा भी नहीं बहा था.ऐसा देखा जा रहा है कि क्राउन प्रिंस पिछले कुछ समय से सऊदी अरब की इमेज बदलने कीकोशिश कर रहे हैं. अपने बयानों में वे महिला-पुरुष समान अधिकार, कानूनों के सदुपयोगऔर प्रगतिशील विचारधार की बातें करते हैं. ताकि देश को व्यापार और टूरिज्म का अधिकफायदा मिल सके. ऐसे में एक साथ इतने लोगों को मृत्युदंड जैसी खबरें आना, उन दावोंके विपरीत नजर आती हैं.