इधर दो फिल्में रिलीज हुई हैं. थिएटर से पहले व्हाट्सऐप पर लग गईं. इन फिल्मों कीखास बात ये है कि लीक से हटके हैं. दादा साहब फाल्के ने जब राजा हरिश्चंद्र बनाई तोवो भी लीक से हटके थी. क्योंकि इस लीक पर पहले फिल्में ही नहीं बनीं. इधर हमलीक-लीक रटते जा रहे हैं तो तुम अनुराग कश्यप की फिल्म न समझ लेना, जो लीक होने केलिए बनती हैं. ये दोनों फिल्में लीक से हटकर इसलिए हैं क्योंकि इन्होंने समूचे देशको नई दिशा दिखा दी है. कोई भी आंख मूंदकर बता सकता है कि उसके सामने खड़ा मुंह मेंपान मसाला दरबरा रहा शख्स देशद्रोही है या देशभक्त. आपको कुछ करना नहीं है. उसकीदाढ़ी या चोटी नहीं देखनी है. राष्ट्रगान पर खड़ा नहीं कराना है. भारत माता की जयनहीं बुलवाना है. जस्ट सिंपल क्वेस्चन पूछना है कि इन फिल्मों में से कौन सी देखनेजा रहे हो? उसे 'शिवाय' और 'ऐ दिल है मुश्किल' में से एक ऑप्शन चुनना है. उसने बजरदबाया और हो गया फैसला. सच है न, देशभक्त और देशद्रोही की कपड़छान कर अलग करना इससेआसान कभी नहीं था. एकदम नीर क्षीर वाला खेला है, आपको हंस हो जाना है. लॉटरी सिस्टमजितना आसान है. अगर वो इनमें से कोई भी फिल्म देखने नहीं जा रहा. टोरेंट सेवी है याKRK का भतीजा है कि देखनी कोई फिल्म नहीं लेकिन रिव्यू सबका करना है, तब भी निराशहोने की जरूरत नहीं. उससे तारीफ करानी है एक फिल्म की. ऑप्शन उपरोक्त रहेंगे. इसीबेस पर फैसला हो जाएगा. वो फवाद खान वाले खाने पर टिक करे या विमल.. सॉरी अजय देवगनवाले पर, फैसला तो हो ही जाना है. इन फिल्मों का वर्गीकरण बड़े सीधे तरीके से हुआहै. कोई रॉकेट साइंस नहीं है. करण जौहर वाली देशद्रोही फिल्म है. क्योंकि उसमें एकपाक का जना लड़का है कोई. उसके इतने बयान फेसबुक और व्हाट्सऐप पर फैले हैं जितनेउसने किसी फिल्म या सीरियल में डायलॉग न बोले होंगे. एक कारण और है. करण जौहर बहुतअल्ल बल्ल बोल गए थे. लेकिन रिलीज के पहले राउंड फिगर में आ गए. जब ठाकरे भैया नेइनके घेघा पर लात रखा तो इनके दिमाग का नवनिर्माण हो गया. वो वीडियो तो देखा होगाजिसमें इनकी घिग्घी बंधी थी और माफी मांग रहे थे. सीएम साहब बिचौलिया बने और पांचकरोड़ पर मामला तय हुआ. अगर यही पैसा बिना कान पूंछ हिलाए दे देते ये लोग तो येफिल्म देशभक्त फिल्म होती. शिवाय देशभक्त फिल्म है क्योंकि उसकी पहले दिन की कमाईअजय देवगन फौजी परिवारों को देने जा रहे हैं. व्हाट्सऐप सूत्रों से प्राप्त जानकारीके अनुसार. और उन्होंने कभी पाकिस्तानी कलाकारों को न लेने का वादा भी किया है.हमारी दुश्मनी तो पाकिस्तान से है. और चीन से. चीन से निपटना तो दो दिन की बात है.हम दिवाली पर उनकी झालर नहीं जलाएंगे और वहां से आए तमाम सामान को नहीं खरीदेंगे.वो घुटनों पर आ जाएगा. लेकिन पाकिस्तान असली और तगड़ा दुश्मन है. उसको सबक सिखानाबहुत जरूरी है. तो पहले इनके कलाकारों के पेट पर लात मारनी पड़ेगी. एक और बात.सरकार अभी अध्यादेश नहीं लाई है लेकिन मुंहजबानी ये बात मानकर चलो. कि किसी फिल्मका रिव्यू अब एक्टिंग, डायरेक्शन, म्यूजिक, एक्शन, सिनेमेटोग्राफी, स्टोरी जैसीबेकार बातों को ध्यान में रखकर नहीं किया जाएगा. रिव्यू के लिए पहली और आखिरी चीजदेशभक्ति मीटर पर फिल्म की रैंकिंग होगी. और सिर्फ देशभक्त फिल्में ही परदों तकपहुंच पाएंगी. इसके बहुत आसान चरण होंगे. एंटी स्मोकिंग कैंपेन वगैरह भूल जाओ. वोसब पुराने जमाने की बाते हैं. आजकल पान मसाला वगैरह से कैंसर कहां होता है यार. अगरऐसा होता तो अजय भाई विमल का ऐड करते. तो इन सबसे फिल्मों का कोई लेना देना नहींहोगा आगे से. ये पांच जरूरी स्टेप्स फॉलो करने होंगे फिल्म बनाने वालों को. जो किनिम्न लिखित हैं. 1. फिल्म की शुरुआत में, बीच में और आखिरी में मतलब तीन बारराष्ट्रगान बजना चाहिए. बल्कि पूरी फिल्म के दौरान ही बैकग्राउंड में राष्ट्रगान काम्यूजिक बजता रहे तो ज्यादा बेटर रहेगा. सारे लोग खड़े होकर फिल्म देखेंगे. इससेदेशभक्ति की भावना मजबूत होगी. 2. कोई भी फिल्म भारत पाकिस्तान के सौहार्द पर नहींबननी चाहिए. अजरंगी बजरंगी भाईजान जैसी फिल्में बनें तो वहीं सेट पर इनका गलाघोंटकर जान ले ली जाए. भारत पाकिस्तान का कान्टेक्स्ट अगर किसी फिल्म में आए तोसिर्फ लड़ाई में. जिसमें यहां का एक हीरों वहां के 20-25 फौजियों को मार रहा हो.सिर्फ हैंडपंप उखाड़ने से काम नहीं चलने वाला अब. 3. फिल्म चाहे धार्मिक हो,मार्मिक हो, लव स्टोरी हो, वॉर हो, पीरियड फिल्म हो, साई फाई हो या कॉमेडी. सबकेशुरू में, आखिरी में भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलना अनिवार्य होगा.4. हर फिल्म बनाने से पहले 5 करोड़ नकद धनराशि सेना के नाम पर महाराष्ट्र नवनिर्माणसेना के लिए, कुछ परसेंट इनकम टैक्स के लिए, फिर थोड़ा शनि मंदिर सिंगनापुर, शिरड़ीवाले साईं बाबा, एक हिस्सा वैष्णो देवी, एक हिस्सा मस्जिद का चंदा, एक हिस्सा राममंदिर सॉरी म्यूजियम की ईंटों हेतु, बाकी पैसे फिल्म में काम करने वाले एक्टर्स औरक्रू के लिए. इतने सबके बाद अगर कुछ बच जाता है तो उसे भगवान का प्रसाद मानकर फिल्मबनाने वाला रख ले. कुछ न बचे तो लंगोटा मारकर जंगल निकल जाए. क्योंकि फिल्म लाइनमें जो कोई आता है वो संघर्ष करने का मन बनाके आता है और संघर्ष ही तो जीवन हैदोस्त. 5. देखो मुंबई में अपनी फिल्म इंडस्ट्री है. तो वहां ठाकरे बंधुओं की वसूलीमें कोई अड़चन पड़ नहीं सकती. वहां की सरकार भी उनकी तरफ से फिल्मकारों से ही पैसेवसूलेगी. लेकिन ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड देश के किसी और हिस्से में शिफ्ट करने से'इन कर्तव्यों' से बच जाओगे. यूपी में आओगे तो बांभनो को खिलाए बिना प्रीमियर नहींहोगा. बिहार में जाओगे तो पूरी टीम किडनैप न हो ये सुनिश्चित करने के लिएशहाबुद्दीन वगैरह को देना पड़ेगा. दिल्ली में सर्दी बहुत पड़ती है. इन सबसे बच गएतो बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद वगैरह की दुकाने तो पूरे देश में चंदा वसूलती हैं.कहां जाओगे बचके भाया. तो ऐसा करो थोड़ा बजट बढ़ा लो. चार सौ करोड़ में अपना मार्समिशन कंप्लीट हुआ है. तो इसरो से करार करो और पूरी टीम को लेकर मंगल ग्रह निकल जाओ.अब टेंशन छोड़ो सब मंगल होगा. मुझे थैंक्यू कहने की कोई जरूरत नहीं है. बस इत्ताध्यान रखना कि सेट पर चाइनीज लाइट वगैरह मत इस्तेमाल करना. नहीं तो हजारों करोड़ कीलागत से बनी फिल्म सेंसर बोर्ड ने देशभक्तों की धमकी पर रोक ली तब तो तुम्हारे पाससल्फास खाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: 'शिवाय' vs 'ऐ दिल है मुश्किल' की लड़ाई का नतीजा आ गया है 'ऐ दिल हैमुश्किल' का 'पेड रिव्यू' ले आए हैं, गालियां देने यहां पधारें फिल्म रिव्यू -शिवाय : न ही शून्य और न ही इकाई, मुझको देओ सर दर्द की दवाई 'देशभक्तों' ने 'ऐ दिलहै मुश्किल' की कहानी लीक कर दी है, कमा लो घुइयां