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सम्मेद शिखर पर प्रोटेस्ट कर रहा था जैन समुदाय, अब मोदी सरकार ने क्या बड़ा फैसला लिया?

एक जैन मुनि ने तो विरोध में प्राण त्याग दिए थे.

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5 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 5 जनवरी 2023, 08:01 PM IST)
sammed shikhar will no longer tourism sector
पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक (फोटो: आजतक)
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झारखंड में ‘श्री सम्मेद शिखर’ (Sammed Shikhar) तीर्थ स्थल ही रहेगा. केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी अपना आदेश वापस ले लिया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में यहां पर सभी पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. पर्यावरण मंत्रालय ने इसे लेकर दो पेज की चिट्ठी जारी की. इसमें लिखा गया है कि इको सेंसेटिव जोन अधिसूचना के खंड-3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और इको-टू रिज्म गतिविधियां शामिल हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार को ये सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि नोटिफिकेशन के निर्देशों का पालन हो. इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक निगरानी समिति भी बनाई है. समिति इको सेंसिटिव जोन की निगरानी करेगी. इसके साथ केंद्र सरकार ने ये भी निर्देश दिया है कि इस समिति में जैन समुदाय के दो और स्थानीय जनजातीय समुदाय के एक सदस्य को स्थायी रूप से शामिल किया जाए.

विरोध प्रदर्शन कर रहा था जैन समुदाय

सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से जैन समुदाय आंदोलन कर रहा था. इसके खिलाफ कई जैन मुनियों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था. जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने तो बीती 3 जनवरी को प्राण भी त्याग दिए थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 जनवरी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैन समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसके बाद उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि "जैन समाज को आश्वासन दिया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सम्मेद शिखर सहित सभी जैन धार्मिक स्थलों पर समुदाय के अधिकारों की रक्षा और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है.

दरअसल, केंद्र सरकार ने 2019 के नोटिफिकेशन में पारसनाथ पर्वत क्षेत्र के प्राकृतिक और पर्यावरण क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए इसे इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था. नए नोटिफिकेशन में केंद्र ने अपने पुराने निर्देशों में संसोधन करते हुए समिति बनाई है.  

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