समाजवादी पार्टी के अंदर कटाजुद्ध मचा है. फैमिली वॉर. कट्टे निकलने भर की देर है.चाचा-भतीजा शिवपाल-अखिलेश एक दूसरे से उखड़े पड़े हैं. भर्राये गलों से कल दोनों नेदिल की भड़ास निकाली. अखिलेश के पापा भी बोले. उनकी बात डीकोड कर लेने वाले चुनिंदाएक्सपर्ट बताते हैं कि बेटे को हड़का दिए. मन से मुलायम होते हुए उन्होंने अपने‘बाहरी ‘ दोस्त का भी सपोर्ट कर डाला. रामगोपाल अखिलेश के हमदर्द बने हैं और मारकुटाई वाले घोर अहिंसक बयान दे रहे हैं. यानी समाजवाद वाला कुनबा वाया परिवारवादहोते हुए मुलायमवाद और अखिलेशवाद तक पहुंच गया है. लेकिन कुछ लोग हैं जिनका विश्वासरत्ती भर भी पार्टी से नहीं डगमगाया है. उन्हें सब कुछ कायदे से सलट जाने की उम्मीदहै. हर पार्टी में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो बड़ी भावुकता से पार्टी से जुड़े होतेहैं. अपने नेताओं के कट्टर फैन. ये कार्यकर्ता भी हो सकते हैं और नहीं भी. अपनीपीढ़ियों के पार्टी से जुड़े होने की कहानियों चटखारे ले ले के बताते हैं. अपनेअपने तरीके से पार्टी में योगदान देते हैं. सपा के भी ऐसे ही कुछ लोगों से बात कीहै अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' में. लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर पार्टी काहेडक्वार्टर है. शोरगुल मचा है. भीड़ भड़क्का है. वहां शशि कुमार सक्सेना पार्टी कासामान बेचते हैं. वो अपने आस पास जमा मंडली को एक कहानी सुना रहे हैं. कहानी हैअकबर बीरबल की. कौवों वाली. तो कहानी में अकबर बीरबल से राज्य के कौवों की सटीकसंख्या पूछते हैं. बीरबल दो दिन बाद लौटते हैं बहीखाता लेकर. अकबर बोले अगर आंकड़ाइधर उधर हुआ तो? हाजिरजवाब बीरबल बोले, 'तो क्या महाराज, इसका मतलब हुआ या तो कुछकौए उड़कर यहां आ गये हैं या कुछ इधर उधर सैर सपाटा मारने बाहर गये हैं.' लोगों केचेहरों पर अपना सिक्का जमता देख सक्सेना आगे कइते हैं गुरु, ये बड़ा परिवार है. कुछलोग इधर उधर आते जाते रहते हैं लेकिन हैं तो सब एक ही परिवार के. सक्सेना की बात परएक और डेडिकेटेड दुकान वाले ने जोर से सिर झटका जिससे पता चला वो सक्सेना से बिनाशर्त सहमत है. बोले, हमको एक भी शख्स ऐसा नहीं मिला जिसने अखिलेश भइया और शिवपालभइया की अलग-अलग होर्डिंग खरीदी हो. मतभेद हैं पर अलगाव न होगा. बहुत से पुरानेनेता भी हेडक्वार्टर में मौजूद थे. नये रंगरूट भी थे. छुटभइयों से लेकर पूर्व जिलापंचायत सदस्यों, जिला-अध्यक्षों तक सबका यही मानना है कि ये सब ‘पारिवारिक मामला’है. 'नेताजी' सब सुल्टा लेंगे. जालौन के पूर्व जिलाध्यक्ष अज़हर बेग ने मुलायम को‘नेचुरल लीडर ‘ बताया. विरेंदर यादव ने जो कहा, उसका ये मतलब निकला कि अखिलेश नईउमर के लौंडे हैं, इस उमर में ऐसा हो जाता है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. कुछअखिलेशवादियों ने आशु मलिक की गाड़ी रोकने की कोशिश की और कुछ चुनिंदा गालियां उनकीतरफ उछाल दीं. आशु मलिक गाज़ियाबाद से एमएलसी हैं. वही जिन पर अखिलेश ने अमर सिंहउर्फ ‘बाहरी’ के इशारे पर मुलायम को ख़त लिखने का आरोप जड़ा था. आशु नेमुलायम-अखिलेश को शाहजहां-औरंगज़ेब बोला था. जननायक सिंह यादव ने भी ये सब जल्दीसिमटने की बात बोली. लेकिन छिटपुट ऐसे भी थे जो इन सब बातों से खउराये थे और बोलेये सब पब्लिकली नहीं होना चाहिए. झगड़े हैं तो आपस में निपटाओ न. मैटर इज स्टिलगोइंग ऑन. देखते हैं आगे क्या होता है लेकिन इन लोगों का उत्साह मारक है.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी 'दी लल्लनटॉप' से जुड़े निशांत ने लिखी है.