''मैं समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश केमुख्यमंत्री हैं.''एक प्रेस कांफ्रेंस में ये कहा है पार्टी और परिवार में अलग-थलग दिख रहे मुलायमसिंह यादव ने. उन्होंने ये भी कहा कि रामगोपाल का 2 जनवरी को बुलाया गया अधिवेशनफर्जी था. साथ ही ये भी बताया कि शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष हैं. उनके साथ अमरसिंह भी नज़र आए. यानी ये आज का ड्रामा था. बाकी इस ड्रामे में और क्या ट्विस्ट आए,वो भी पढ़ लो. एकता कपूर को अपने सीरियल के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही होगी,क्योंकि आधी टीआरपी तो समाजवादियों की बयानबाज़ी ही खा ले रही है. याद दिला दिया जाएकि इससे पहले रामगोपाल ने एक अधिवेशन बुलाया था. खूब भीड़ थी. कहा गया कि अखिलेशयादव राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. और मुलायम सिंह पार्टी के महज़ मार्गदर्शक. यानी उन्हेंमेन टेबल से उठा कर साइड पर रख दिया गया. सपा का फैमिली ड्रामा अब भी किसी नतीजे कीतरफ बढ़ता नहीं दिख रहा है. और तीखा हो चला है. लगता नहीं कि मुलायम की आज की बात काकोई ख़ास फर्क पड़ने वाला है. बाप पर बेटा भारी पड़ गया है. पॉलिटिक्स संख्या औरसमर्थन का खेल है और दोनों ही इस समय अखिलेश के पास हैं. अखिलेश के चच्चा शिवपालबोले, ''हम नेता जी के साथ हैं. नेता जी मुलायम सिंह यादव का जो आदेश होगा उसे हममानेंगे.'' उन्होंने ये नहीं बताया कि मुलायम सिंह यादव अभी आदेश देने की स्थितिमें हैं भी या नहीं. बेटा तक तो कोई आदेश मान नहीं रहा. पार्टी के 'शाश्वत बाहरी'अमर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि परिवार की एकता के लिए मैं किसी भी बलिदान केलिए तैयार हूं. मैंने इस्तीफ़ा देने की भी पेशकश की. शिवपाल भी चुनाव से हटने कोतैयार हैं. पूरे झगड़े का ठीकरा बेवजह हम पर फोड़ा गया है. अमर सिंह फ़ालतू मेंशेरो-शायरी के मूड में आजकल रहते हैं. बोले, ''क्या ज़िद है? किस बात की अकड़ है? इसघर को आग लग गई घर के चिराग से.'' मतलब सीधे-सीधे अखिलेश के बारे में बात कर रहेथे. आगे कहा, ''हम मिलकर रहना चाहते हैं.'' हालिया घटनाओं की वजह से केंद्र सरकारकी तरफ से Z सिक्योरिटी से लैस होने वाले अमर सिंह ने एक और शेर दागा. कहा-तेरा मेरा शीशे का घर, मैं भी सोचूं तू भी सोच.फिर क्यों तेरे हाथ में पत्थर, मैं भी सोचूं तू भी सोच.साइकिल है किसकी?पार्टी पर किस गुट का हक़ है और साइकिल किसकी है? इस पर भी कुछ क्लियर नहीं हैं.अखिलेश यादव के इस समय ख़ासम ख़ास चल रहे रामगोपाल यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग मेंएक हलफनामा दायर किया. दावा किया कि ये पार्टी अखिलेश की है. डेढ़ लाख पेजों के इसहलफनामे में अखिलेश के समर्थन में 200 विधायकों के सिग्नेचर हैं. हलफनामे में 68में 56 एमएलसी और 24 में 15 सांसदों के सिग्नेचर, पार्टी के 4,600 लोगों के भीसिग्नेचर हैं. रामगोपाल यादव ने कहा नब्बे फीसदी समर्थन अखिलेश के साथ है. अखिलेशउत्तर प्रदेश में अपने आप चेहरा हैं. हम चुनाव में जाएंगे फिर चाहे हमें साइकिलचुनाव निशान मिले या नहीं. रामगोपाल ने ये भी बताया कि ये कागज नेता जी को भी भेजेजाएंगे. रामगोपाल ने फसाद की जड़ में अमर सिंह का नाम लिया. उनका कहना है कि अमरसिंह और एक दो परिवार के लोगों ने नेता जी को बहकाया है. ये भी जोड़ा कि मुलायम सिंहके पास महज़ इतने ही लोग ही बचे हैं कि वो सारे लोग एक बोलेरो में जा सकते हैं.अगर साइकिल पर कोई फैसला न हुआ तो?अभी तक असमंजस बना हुआ है कि आखिर साइकिल चुनाव निशान अखिलेश के गुट में जाएगा यामुलायम के. खबर ये भी आ रही है कि अगर 17 जनवरी तक चुनाव आयोग इस पर फैसला नहीं लेपाया तो ये चुनाव निशान 'फ्रीज' कर दिया जाएगा. फिर ये चुनाव निशान किसी को नहींमिलेगा. इससे पहले अगर ये दोनों पक्ष अपने मतभेद सुलटा लें तो चुनाव आयोग किसीनतीजे पर पहुंच सकता है. इससे पहले 2011 में उत्तराखंड क्रांति दल के केस में भीऐसा हुआ था. दो धड़े हो गए थे, जो चुनाव निशान कुर्सी पर अपना दावा कर रहे थे. तबचुनाव आयोग ने एक धड़े को 'कप-प्लेट' और एक धड़े को 'पतंग' चुनाव निशान दे दिया था.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------