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जिस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांध रही थीं, ये ओलंपिक में मेडल जीत रही थी

साक्षी मलिक. ओलंपिक में दिलाया था इंडिया को पहला मेडल. आज जन्मदिन है.

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3 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 4 सितंबर 2017, 07:18 AM IST)
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इंडिया को 2016 रिओ ओलंपिक्स में पहला मेडल मिला. ब्रॉन्ज़ मेडल. और ये मज़ेदार था. मज़ेदार इसलिए कि साक्षी को रेस्लिंग में मेडल उस दिन मिला, जिस दिन देश में लड़कियां अपनी रक्षा के लिए लड़कों को राखी बांधती हैं. खूब! यानी रक्षा बंधन के दिन इस रेसलर ने देश के लिए मेडल जीता था.
3 सितम्बर 1992 को रोहतक में पैदा हुई साक्षी ने 58 किलोग्राम की केटेगरी में किर्गिस्तान की ऐसुलू टिनीबेकोवा को 8-5 से हराया. साक्षी एक वक़्त पर 0-5 से पीछे चल रही थीं. और वहां से उन्होंने एक के बाद एक बिना कोई भी पॉइंट गवांए 8 पॉइंट कमाए. इतना बहुत था ब्रॉन्ज़ मेडल लाने के लिए. उनका सबसे अच्छा मूव आया मैच के आखिरी 10-15 सेकंड्स में जब उन्होंने एक के बाद एक तीन पॉइंट्स झटके. और इन्हीं आखिरी सेकंड्स की बदौलत इंडिया को रियो ओलंपिक्स में पहला ब्रॉन्ज़ मेडल मिला.
मन तो कर रहा है कि ये तस्वीर शोभा डे को व्हाट्सैप कर दूं.
रियो अोलम्पिक्स में 15 सेकंड्स में गेम पलट दिया था साक्षी ने.

साक्षी ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार ही खेल रही थीं. शुरुआत में वो पिछड़ी ज़रूर लेकिन फिर उन्होंने गेम में बेहद अच्छा कम-बैक किया. और इंडिया की 'दिल जीतने पर मेडल न जीतने' की प्रथा पर एक फुल स्टॉप लगाया. वो क्या है कि दिल जीतने से खाली बातें बंटी हैं, मेडल टैली में हम उतने ही नीचे रहते थे, हर बार. साक्षी के मेडल जीतने के साथ ही दिमाग में उन्हें ढेर सारा प्यार देने के बाद जो सबसे पहला ख्याल आता है वो है कर्णम मल्लेश्वरी का. सिडनी ओलंपिक्स में उन्होंने इंडिया को एकमात्र मेडल दिलाया था. वेटलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज़ मेडल.
साक्षी मलिक इंडिया की पहली रेस्लर हैं जिसने ओलंपिक में मेडल जीता है और साथ ही इंडिया की चौथी महिला एथलीट हैं जिसने ओलम्पिक में कोई भी मेडल जीता है.

कौन साक्षी?

वजन: 64 किलो
लम्बाई: 1.62 मीटर
साक्षी मलिक. रोहतक हरियाणा में पली बढ़ी. पेरेंट्स सुदेश और सुखबीर के सपोर्ट में 12 साल की उमर में छोटू राम अखाड़े में रेस्लिंग की कोचिंग शुरू कर दी. उस वक़्त उसके कोच थे ईश्वर दहिया. ईश्वर दहिया के ऊपर 2 बड़ी जिम्मेदारियां थीं. साक्षी की ट्रेनिंग और एक लड़की को ट्रेनिंग देने की वजह से होने वाला उनका विरोध. ऐसे में साक्षी की शुरुआती तालीम लड़कों से लड़-भिड़ कर ही पूरी हुई.
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ओलंपिक मेडल से इंडिया में लड़कियां कुश्ती में काफी एक्टिव हो गई हैं.

2010 में 18 साल की साक्षी ने जूनियर लेवल चैंपियनशिप में पहली जीत चखी. 59 किलो की केटेगरी में उसने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती.
2014 में पहली बार इंटरनेशनल अटेंशन पाने वाली साक्षी ने डेव शुल्त्ज़ इंटरनेशनल रेस्लिंग चैंपियनशिप में 60 किलो के केटेगरी में गोल्ड मेडल जीता.
अगस्त 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल.
सितम्बर 2014 में ताशकंद में वर्ल्ड रेस्लिंग चैंपियनशिप में क्वार्टर फाइनल में हारीं.
मई 2015 में दोहा में हुई सीनियर एशियन रेस्लिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
साक्षी ने दोहा में बताया था, "2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल मेरा फेवरिट है. हालांकि मैंने 2015 में एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता लेकिन ग्लासगो में मेरा मैच काफ़ी कठिन था."
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रियो में अंडरडॉग थीं साक्षी.

रियो में ब्रॉन्ज़ मेडल की जीत के बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें सरकारी नौकरी और 2.5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी. इससे पहले ओलम्पिक के गुडविल एम्बेसडर सलमान खान ने 1 लाख 1 हज़ार रुपये देने के बारे में ट्वीट किया था.
पहलवान से ही की शादी
कुश्ती में हरियाणा का नाम रोशन करने वाली साक्षी. उन्होंने जिसे अपना जीवन साथी चुना है, उसका नाम है सत्यव्रत कादियान. दोनों की कहानी 'सुल्तान' फिल्म से मिलती-जुलती है. वही सुल्तान फिल्म जिसमें सलमान खान को हरियाणा की रेसलर से प्यार करते हुए दिखाया गया है. वो भी अपने गुरु की बेटी से. सत्यव्रत भी साक्षी मलिक के गुरु के बेटे हैं.
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सत्यव्रत कादियान और साक्षी मलिक

रेसलर सुशील कुमार की शादी भी उनके गुरु सतपाल की बेटी सावी से हुई थी. लेकिन ये अरेंज मैरिज थी. और सुशील ने सावी को सगाई के दिन ही देखा था. शादी 2011 में हुई. इसी तरह सत्यव्रत कादियान रोहतक के रहने वाले रेसलर सत्यवान कादियान के बेटे हैं औए वो भी एक रेसलर हैं. कुछ बातें सत्यव्रत के बारे में-
सत्यव्रत और साक्षी मलिक एक साथ कई साल से रोहतक में प्रैक्टिस कर रहे हैं. सत्यव्रत कादियान रोहतक में अखाड़ा चलाने वाले पहलवान सत्यवान के बेटे हैं और वो 97 किलो वेट कैटेगरी में खेलते हैं. रेसलर सत्यवान ही सत्यव्रत और साक्षी दोनों के टीचर हैं. सत्यवान को अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है.
20वें कॉमनवेल्थ गेम्स में 97 किलो वाले ग्रुप में सत्यव्रत कादियान को सिल्वर मेडल मिला. सत्यव्रत को फाइनल में कनाडा के अर्जुन गिल ने हराया था. कादियान नाईजीरिया के सोसो तामारु को हराकर सेमीफाइनल में एंट्री पायी थी. इसी कॉमनवेल्थ गेम्स के 58 किलो वर्ग (महिला) में साक्षी मलिक को भी सिल्वर मेडल मिला था. साक्षी मलिक नाइजीरिया की अडेनियी से हार गई थीं.
अक्टूबर 2015 में जम्मू में रुस्तम-ए-इंटरनेशनल स्टाइल दंगल हुआ. ये ख़िताब सत्यव्रत ने अपने नाम किया. इस दंगल में विदेशी रेसलर भी शामिल थे. कुछ माह पहले हरियाणा में हुए एक करोड़ के दंगल में भी सत्यव्रत तीसरे नंबर पर रहे थे. ये दंगल हरियाणा सरकार की ओर से कराया गया था.
साक्षी पर बना हरियाणवी गाना- 
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