क्या मध्य प्रदेश एनकाउंटर की बधाई स्वीकार करेंगे नरेंद्र मोदी?
प्रधानमंत्री को साक्षी महाराज की ये सलाह माननी चाहिए या उन्हें डांटना चाहिए?

कभी-कभी सोचता हूं कि बीजेपी अपने साक्षी महाराज जैसे सांसदों को जनसेवा जैसे चिरकुटई वाले कामों में क्यों उलझाए रखती है. उन्हें तो सरकार के थिंक-टैंक में होना चाहिए, जहां वो आतंकवादियों को खत्म करने के नए और आधुनिक तरीके ईजाद कर सकें और उनका यूज करवा सकें. उन्होंने एक बार फिर एक मिसाल पेश की है.
अभी मध्य प्रदेश में संदिग्ध आतंकवादियों का जो संदिग्ध एनकाउंटर हुआ है, उसके बाद साक्षी महाराज ने ऐसी बातें कहीं हैं कि दोज़खवासी आतंकी एक बार फिर पनाह मांगने लगे होंगे.
पहले देख-पढ़-सुन लीजिए कि साक्षी महाराज ने कहा क्या है:
'जो आतंकवादी जेल से फरार हुए, वो हमारे सिपाही की हत्या करके फरार हुए. उनका एनकाउंटर कर दिया गया, तो शाबाशी मिलनी चाहिए मध्य प्रदेश की पुलिस को और वहां के मुख्यमंत्री को और प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी को. लेकिन, जांच की जो मांग की जा रही है, दुर्भाग्य ही कहूंगा मैं उसे.मैं तो मोदी जी की सरकार से आग्रह करना चाहूंगा कि जो आतंकी जहां मिले, वहीं गोली से उड़ा देना चाहिए. चौराहे के कूड़े में डालकर आग लगा देना चाहिए. क्या वो हमारे दामाद हैं या मेहमान हैं कि पकड़कर जेल में बिठाकर उन्हें हम खिलाते-पिलाते रहें. बिरयानी खिलाते-पिलाते रहें. जमाना बदल गया है. आतंकी का इलाज पुलिस की गोली होती है. कहीं भी आतंकी पकड़ा जाए, तत्काल उसे जान से मार देना चाहिए.'
https://www.youtube.com/watch?v=5HchTczv1Zw
'जमाना बदल गया है.' यकीनन जमाना बदल गया है. जनप्रतिनिधियों ने संविधान और कानून को अंतरिक्ष में फेंक दिया है. मतलब कोई कोर्ट केस वगैरह चलाओ ही नहीं, संविधान और लोकतंत्र गया चूल्हे में और अब यहां भीड़तंत्र का इंसाफ बोलेगा! अदालतें जाकर खुदकुशी कर लें! ये तालिबान है क्या?
साक्षी महाराज जैसे निर्वाचित प्रतिनिधि देश के प्रधानमंत्री का नाम लेकर ऐसी अराजक-असंवैधानिक-घटिया बातें कह रहे हैं, तो साफ है कि जमाना बदल गया है. जिस एनकाउंटर की प्रामाणिकता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, क्या उस पर देश के प्रधानमंत्री को बधाई दी जानी चाहिए? क्या हर आतंकी के माथे पर लिखा होता है कि वो आतंकी है?
बिना न्यायपालिका साक्षी महाराज कैसे पता करेंगे कि कौन आतंकी है और कौन नहीं. मध्य प्रदेश में हुए एनकाउंटर में जो लोग मारे गए, वो अंडरट्रायल थे. संदिग्ध आतंकी. केस चल रहा था. दोषी होते तो कानून के तहत मैक्सिमम सजा मिलती. लेकिन साक्षी महाराज, जिन्हें महाराज कहते हुए शर्म आती है, एक विवादित एनकाउंटर पर कितना जजमेंटल होकर बधाई ले-दे रहे हैं.
उनका ये बयान लोकतंत्र के सबसे भरोसेमंद स्तंभ न्यायपालिका का अपमान है. ज्यादा खराब बात ये है कि ऐसा उन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह देते हुए कहा है. प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि क्या वो इसे 'एंडोर्स' करते हैं? नहीं करते तो अपने 'लोकतंत्र-विमुख' सांसदों को डांटना चाहिए.
डांटना चाहिए कि नहीं डांटना चाहिए?
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