ज्ञानवापी बवाल के बीच सद्गुरु ने कहा - "तोड़े गए मंदिरों पर अब बात करने का कोई मतलब नहीं है"
'समुदायों को बैठकर बात करनी चाहिए'

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) के विवाद के बीच सद्गुरु (Sadhguru) की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है. इंडिया टुडे के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ खास बातचीत में सद्गुरू ने देश में चल रहे विवाद पर बातचीत की.
सद्गुरु ने कहा
“आक्रमणों के दौरान हजारों मंदिरों को तोड़ा गया. तब हम उनकी रक्षा नहीं कर सके. अब उनके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि आप इतिहास को दोबारा नहीं लिख सकते.’
समुदायों को बैठकर बात करनी चाहिए!
इंटरव्यू के दौरान सद्गुरु ने विवाद को हल करने के तरीके पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा,
“दोनों समुदाय को साथ बैठकर फैसला लेना चाहिए कि किन दो तीन जगहों को लेकर विवाद है, फिर सभी का एक साथ एक बार में ही समाधान निकाल लेना चाहिए. एक बार में सिर्फ एक विवाद पर मंथन कर विवाद को बढ़ाने का कोई फायदा नहीं है. कुछ लेना कुछ देना जरूरी है- इसी तरीके से कोई देश आगे बढ़ सकता है. हर विवाद को सिर्फ हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखने की जरूरत नहीं है.”
राहुल कंवल ने सद्गुरु से ज्ञानवापी मामले को लेकर भी सवाल किया. इस पर सद्गुरु ने कमेंट करने से मना कर दिया और कहा कि वो अभी मामले से अपडेटेड नहीं है. सद्गुरु का मानना है कि अभी भारत एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर है. अगर सही समय पर सही फैसले लिए गए, तो भारत दुनिया की एक बड़ी ताकत बन जाएगा. लेकिन इसके लिए हर मुद्दे को विवाद बनाने की जरूरत नहीं है.
देश में हर भाषा का अपना महत्व!
देश में पिछले कुछ समय से भाषा विवाद भी जोर पकड़े हुए है. सद्गुरु से इस मसले पर भी सवाल जवाब किए गए. हिंदी बनाम साउथ मामले को लेकर सद्गुरु ने कहा-
“इस देश में हर भाषा का अपना महत्व है. साउथ की भाषाओं के पास ज्यादा लिट्रेचर है. भारत एक अनोखा देश है.”
सद्गुरु के मुताबिक इस आधार पर कोई बदलाव नहीं करना चाहिए कि किसी भाषा को बोलने वाले ज्यादा लोग हैं.
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