एक परिवार ने रोक दिया साबरमती आश्रम का रिडेवलपमेंट प्लान, क्यों घर खाली करने को तैयार नहीं?
साबरमती आश्रम और उसके आसपास के 256 परिवारों ने दूसरी जगह बसने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. 43 परिवारों ने 4 BHK फ्लैट लिए, 16 ने सरकारी आवास योजना में घर लिए, 24 ने पास की हाउसिंग सोसाइटी में जगह ले ली और 173 परिवारों ने 60 से 90 लाख रुपये तक का मुआवजा लिया. लेकिन एक परिवार दावा छोड़ने को राज़ी नहीं है.

सरकार महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम को रिडेवलप करना चाह रही है. 250 से ज्यादा परिवार मान गए. वे दूसरी जगह शिफ्ट भी हो गए. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक किराएदार ऐसे हैं जिन्होंने इस पूरी योजना का पलीता लगाया हुआ है. वो घर खाली करने को राज़ी नहीं हैं और साबरमती आश्रम का रिडेवलपमेंट प्रोग्राम लटका हुआ है. इस योजना का मास्टर प्लान मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था. सरकार 2027 तक काम पूरा करना चाहती है.
अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे साबरमती आश्रम स्थित है. इस आश्रम को प्रसिद्धि मिली ही महात्मा गांधी की वजह से. साबरमती आश्रम का पुनर्विकास, केंद्र और गुजरात सरकार मिलकर ‘महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट’ के तहत कर रहे हैं. 55 एकड़ क्षेत्र में 1,200 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना के तहत ज्यादातर पुराने मकानों को खाली कराया जा चुका है और मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है. यहां बनीं कुटियों को फिर से सजाया-संवारा जा रहा है.
यहीं उत्तर-पश्चिम में स्थित एक घर वाले हटने को तैयार नहीं हैं. इस घर में दिवंगत मोहनभाई राठौड़ का परिवार रह रहा है. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के पास स्थित इस घर में राठौड़ की पत्नी, बच्चे और रिश्तेदार किराएदार के तौर पर रहते हैं. परिवार सरकार की पुनर्वास योजना मानने को तैयार नहीं है, जबकि पहले यहां रहने वाले करीब 250 परिवार दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं.
11 जून, 2025 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आश्रम की जगह पर मौजूद तीन प्रॉपर्टी, A, B और C, का अहमदाबाद के स्मॉल कॉज़ कोर्ट में केस चल रहा है. प्रॉपर्टी B वो मकान है, जहां राठौड़ परिवार रहता है, जबकि प्रॉपर्टी A और C दो प्लॉट हैं.
यह पिटीशन मोहनभाई राठौड़ के परिवार के सदस्यों ने दाखिल की थी. राठौड़ परिवार ने साबरमती आश्रम परिसर में मौजूद तीन प्रॉपर्टीज़, A, B और C के बारे में स्मॉल कॉज़ कोर्ट में हाउस रेंट पिटीशन (HRP) का मुकदमा दायर किया था. उन्होंने 2014 में किराएदारी के अधिकार का दावा करते हुए आश्रम के ट्रस्ट के खिलाफ याचिका दायर की थी.
स्मॉल कॉज़ कोर्ट ने 2019 में प्रॉपर्टी B के लिए निषेधाज्ञा का आदेश दिया था, लेकिन प्रॉपर्टी A और C के लिए एप्लीकेशन को खारिज कर दिया था. इस ऑर्डर को अपील कोर्ट में चुनौती दी गई जिसने ऑर्डर को बरकरार रखा. इसके बाद उन्होंने HC में एक रिवीजन पेटिशन दायर की. यहां भी अपील कोर्ट के ऑर्डर को बरकरार रखते हुए रिवीजन एप्लीकेशन को खारिज कर दिया गया.
राठौड़ परिवार क्या दलीलें दे रहा?राठौड़ परिवार का दावा है कि जिन प्रॉपर्टीज़ पर विवाद है, उन्हें 1930 में ट्रस्ट के ट्रस्टी ने उनके दादा को सौंप दिया था. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट ने 1977 से तीनों प्रॉपर्टीज़ का किराया दिया है. डिफेंडेंट ट्रस्ट ने पिटीशन का विरोध करते हुए कहा कि प्रॉपर्टीज़ A और C के लिए राठौड़ परिवार जो किराए की रसीदें पेश कर रहा है, वो सही नहीं हैं.
राठौड़ परिवार अभी B प्रॉपर्टी पर रह रहा है. जबकि योजना के तहत 256 परिवारों ने दूसरी जगह बसने का प्रस्ताव स्वीकार किया. इनमें 43 परिवारों ने 4 BHK फ्लैट लिए, 16 ने सरकारी आवास योजना में घर लिए, 24 ने पास की हाउसिंग सोसाइटी में जगह ले ली और 173 परिवारों ने 60 से 90 लाख रुपये तक का मुआवजा लिया. अधिकारियों के मुताबिक अब सिर्फ एक रिहायशी मकान खाली होना बाकी है, जो राठौड़ परिवार का है.
वीडियो: साबरमती आश्रम के रीडेवलपमेंट प्लान पर इतना बवाल क्यों मचा है?

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