चीन के साथ 25 फीसदी विवाद सीमा विवाद अभी बाकी? विदेशमंत्री जयशंकर के बयान के मायने क्या हैं?
S Jaishankar on Indo-China Disengagement: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जिनेवा में ग्लोबल सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी में बताया कि भारत और चीन के बीच 75 प्रतिशत विवाद सुलझ चुके हैं. जयशंकर के इस भाषण के कुछ घंटों के बाद ही NSA अजीत डोभाल ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य वांग यी से मुलाकात की.

विदेश मंत्री जयशंकर (S Jaishankar) ने चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. विदेश मंत्री ने कहा कि बीजिंग के साथ डिसइंगेजमेंट (सैनिकों की वापसी) से संबंधित 75 प्रतिशत विवाद सुलझ गए हैं. हालांकि दोनों देशों को अभी भी कुछ काम करने हैं. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अतीत में भी हमारे संबंध कभी आसान नहीं रहे हैं. 2020 में जो हुआ वो कई समझौतों का उल्लंघन था. चीन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) पर भेज दिया. इसके जवाब में हमने भी अपने सैनिकों को आगे किया.
जयशंकर ने 11 सितंबर को जिनेवा में ग्लोबल सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी में बोल रहे थे. इस दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में बॉर्डर पर सैनिकों की वापसी से संबंधित 75 प्रतिशत मुद्दे लगभग सुलझ गए हैं. लेकिन बड़ा मुद्दा सीमा पर बढ़ते सैन्यीकरण का है. उन्होंने कहा,
इस विषय में हमें अभी कुछ काम करने हैं. बॉर्डर पर हुई झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया है. क्योंकि बॉर्डर पर हिंसा होने के बाद आप यह नहीं कह सकते कि बाकी रिश्ते इससे अछूते रहेंगे.
उन्होंने आगे बताया कि यदि सैनिकों की वापसी का कोई रास्ता निकलता है. और बॉर्डर पर शांति और सौहार्द वापस लौटता है तभी हम दूसरी संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं.
जेनेवा में जयशंकर के भाषण के कुछ घंटों के बाद ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में ब्रिक्स NSA की बैठक के दौरान चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य और केंद्रीय विदेश मामलों के आयोग के निदेशक वांग यी से मुलाकात की.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया,
इस बैठक ने दोनों पक्षों को LAC से जुड़े विवादित मुद्दों का जल्दी से समाधान खोजने के प्रयासों की समीक्षा का एक मौका दिया. इस बैठक से दोनों देशों के संबंधों को स्थिर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी.
ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन 22 से 24 अक्तूबर तक रूस के कजान में होने वाला है. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाग लेने की उम्मीद है. इस बैठक से पहले हुई इस मीटिंग और विदेश मंत्री के बयानों को अहम माना जा रहा है.
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