यूक्रेन संकट के बीच नाटो (NATO) महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा है कि रूसरासायनिक हमले की तैयारी कर रहा है. उन्होंने ये दावा उन आरोपों पर जवाब देते हुएकिया, जिनमें कहा जा रहा है कि अमेरिका ने यूक्रेन में बायोलॉजिकल लैबोरेटरीज बनाईहैं. जर्मन अखबार WeLT को दिए एक इंटरव्यू में जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने कहा किअमेरिका पर लगे ये आरोप निराधार हैं. NATO महासचिव ने आशंका जताते हुए ये भी कहा किदुनिया को रूस को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि वो यूक्रेन पर रासायनिकहमले कर सकता है जो कि एक युद्ध अपराध है. इसी महीने की शुरुआत में रूस के रक्षामंत्रालय ने यूक्रेन के बायो-लैबोरेटोरीज विशेषज्ञों से मिले दस्तावेजों के हवालेसे बड़ा दावा किया था. इसमें उसने कहा था कि अमेरिका ने यूक्रेन में रासायनिकप्रयोगशालाएं बनाई हैं. डॉक्यूमेंट्स से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका नेयूक्रेन में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू और एंथ्रैक्स फैलने की संभावना पर अध्ययन किया है.इस काम में 1531 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. स्टडी के तहत पक्षी, चमगादड़ औरसरीसृप प्रजातियों का इस्तेमाल किया गया है. रूस का दावा ये है कि अमेरिका ने इसकाम के नाम पर यूक्रेन में कई जैविक प्रयोगशालाएं बनाई हैं. रूसी आर्म्ड फोर्सरेडिएशन, केमिकल एंड बायोलॉजिक डिफेंस के प्रमुख इगोर किरिलोव ने कहा है कि पेंटागनने यूक्रेनी क्षेत्र में ऐसी 30 से अधिक जैविक प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क बनायाहै. रूस का आरोप है कि अमेरिका इस तरह से बायोलॉजिकल यानी जैविक हथियार बनाने मेंयूक्रेन की मदद कर रहा है. हालांकि अमेरिका ने इन तमाम दावों को खारिज किया है.रासायनिक और जैविक हथियार आम तौर पर रासायनिक हथियारों की चर्चा में जैविक हथियारोंका जिक्र होता रहा है. हालांकि इनमें आपसी अंतर है. रासायनिक हथियार उन्हें कहतेहैं जो विषैले पदार्थों के माध्यम से शरीर के सिस्टम पर हमला कर उसे खत्म कर देतेहैं. ये कई प्रकार के होते हैं. जैसे सांस को बंद कर देने वाले रसायन, जो व्यक्तिके फेफड़ों और श्वसन अंगों पर हमला करते हैं. इस कारण व्यक्ति की दम घुटने से मौतहो जाती है. ऐसे हथियारों का एक अन्य प्रकार है मस्टर्ड गैस, जो त्वचा को जला देतीहै और अंधा कर देती है. ऐसे केमिकल हथियारों में सबसे खतरनाक वो होता है जो सीधेनर्वस सिस्टम पर हमला करता है. ये वेपन ब्रेन डैमेज कर देता है. उदाहरण के तौर पर0.5 मिलिग्राम से भी कम वीएक्स नर्व एजेंट (VX NERVE AGENT) किसी व्यक्ति को मारनेके लिए पर्याप्त है. केमिकल हथियार कम मात्रा में ज्यादा बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं.इनके प्रभाव में आने वाले सैनिकों या आम लोगों की तड़प-तड़प कर मौत होती है.संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक प्रथम विश्व युद्ध में ही इन हथियारों ने करीब एक लाखलोगों की जान ले ली थी. तब से लेकर अब तक ये वेपन्स दस लाख से ज्यादा लोगों कीदर्दनाक मौत का कारण बन चुके हैं. ये सब बातें ऐसे समय में हो रही हैं जब द्वितीयविश्व युद्ध के बाद यूरोप में सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई देखने को मिल रही है और रूसका केमिकल हथियार बनाने का इतिहास भी रहा है. जाहिर है यूक्रेन संकट के बीच केमिकलहथियारों को लेकर रूस और अमेरिका की जुबानी जंग डराने वाली है. वैसे इन सभी रसायनोंका इस्तेमाल बॉम्ब और मिसाइल्स के जरिये किया जा सकता है. लेकिन हथियार नियंत्रण सेजुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते 'केमिकल वेपन्स कन्वेन्शन्स, 1997' के तहत इन केमिकल्सपर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसके प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी OPCW को मिलीहुई है. इस कानून पर रूस समेत कई देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और रासायनिक हथियारइस्तेमाल न करने की प्रतिबद्धता जताई है. जैविक हथियार वहीं बायोलॉजिकल वेपन्स वेहोते हैं जिनमें खतरनाक पैथोजंस का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जाता है.पैथोजंस (वायरस, बैक्टीरिया या इन जैसे माइक्रोऑर्गेनिज्म) के कारण कई तरह कीबीमारियां पैदा होती हैं, जैसे कि इबोला. शीत युद्ध की समाप्ति के बाद जबअंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों ने इन्हें खत्म करना शुरू किया तो पता चला किसोवियत संघ ने ढेर सारे जैविक हथियार तैयार किए थे. इन्हें जंग के दौरान एंथ्रैक्स,स्मॉल पॉक्स और अन्य बीमारियों को फैलाने के लिए बनाया गया था. दक्षिणी रूस के एकद्वीप पर इन बीमारियों का परीक्षण जीवित बंदरों पर किया गया था. साल 1991 के विघटनसे पहले सोवियत संघ के समय रूस व्यापक स्तर पर जैविक हथियार प्रोग्राम चलाताथा. Biopreparat नाम की एक एजेंसी ये प्रोग्राम ऑपरेट करती थी. रिपोर्टों केमुताबिक इस काम में करीब 70 हजार लोग लगे हुए थे.कब हुआ इस्तेमाल?इस तरह के रासायनिक या जैविक हथियारों का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआथा. बाद में 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के समय इन हथियारों का उपयोग किया गयाथा. हाल फिलहाल की बात करें तो सीरिया सरकार ने विद्रोहियों का दमन करने के लिएरासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था. रूस का दावा है कि उसने साल 2017 तक अपनेसभी रासायनिक हथियारों को खत्म कर दिया था. लेकिन बीबीसी के मुताबिक तब से लेकर अबतक मॉस्को पर दो बार रासायनिक हमले करने के आरोप लग चुके हैं. इनमें से एक 2018 केसैलिसबरी हमले से जुड़ा है. तब केजीबी (रूस की खुफिया एजेंसी का पुराना नाम) के एकपूर्व अधिकारी सर्गेई स्क्रिपल को उनकी बेटी के साथ नर्व गैस नोविचोक (Novichok)देकर मार दिया गया था. रूस ने इसमें अपनी भूमिका से इनकार किया था और कई सारेस्पष्टीकरण दिए थे. लेकिन इस मामले को लेकर हुई एक जांच में पता चला था कि रूस कीसैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू ने ही ये हमला करवाया था. इस कारण 128 रूसी जासूसों औरराजनयिकों को कई देशों से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद अगस्त 2020 में रूसके बड़े विपक्षी कार्यकर्ता एलेक्सी नैवेल्नी को भी नोविचोक जहर दिया गया था, लेकिनवे बाल-बाल बच गए थे. इसके अलावा रूस पर ये भी आरोप लगते रहे हैं कि उसने सीरिया कीबशर-अल-असद सरकार को भारी सैन्य सामान मुहैया कराया था जिसमें केमिकल वेपन्स भीशामिल थे. इसका फायदा उठाकर सरकार ने उसका विरोध करने वाले लोगों पर कथित रूप सेरासायनिक हमले किए थे.