यूक्रेन-रूस तनाव भारत के लिए एक दुविधा और संयम का समय है. साउथ ब्लॉक में वॉर रूमलगातार पूरे विश्व की प्रतिक्रियाओं पर नज़र बनाए हुए है. किसी भी पक्ष का समर्थनकरना, दूसरे पक्ष को नाराज़ करने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. और यही वजह है जब 25फरवरी को अमेरिका ने सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पेशकिया, तो भारत ने उससे दूरी बना ली. यानी भारत ने ना उस प्रस्ताव का समर्थन किया औरना ही विरोध. UNSC में भारत के इस कदम की रूस ने अब जमकर तारीफ की है. भारत में रूसके दूतावास ने ट्वीट करते हुए कहा, "हम UNSC मतदान में भारत की स्वतंत्र और संतुलितस्थिति की सराहना करते हैं. भारत के साथ विशेष दोस्ती और रणनीतिक दोस्ती को देखतेहुए रूस, यूक्रेन की स्थिति पर लगातार भारत चर्चा कर रहा है." Highly appreciate India’s independent and balanced position at the voting in theUNSC on February 25, 2022.In the spirit of the special and privileged strategic partnership Russia iscommitted to maintain close dialogue with India on the situation around Ukrainehttps://t.co/oKtElMLLRf — Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) February 26, 2022ये बात साफ है कि रूस, भारत का पुराना पार्टनर रहा है. चाहे 1971 का युद्ध हो याआधुनिक फाइटर प्लेन और हथियारों की जरूरत, रूस ने हमेशा भारत की आगे आकर मदद की है.दोनों ही देश दशकों से एक दूसरे की गिनती घनिष्ठ मित्रों में करते आए हैं. लेकिनवैश्विक मंच पर दिल्ली को जितनी जरूरत मॉस्को की है, उतनी ही वॉशिंगटन डीसी की भीऔर यही वजह है कि भारत ने अगर रूस का विरोध नहीं किया तो उसका समर्थन भी नहीं किया.हालांकि UNSC में भारत का साथ नहीं मिलने से अमेरिका अगर नाराज़ नहीं है, तो खुश भीनहीं नज़र आ रहा. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, अमेरिका ने कहा है कि भारत के रूसके विशेष संबंध है, वैसे संबंध हमारे साथ नहीं है. खबर के मुताबिक अमेरिकी विदेशमंत्रालय ने कहा, "हमारे भारत के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं. हम महत्वपूर्ण मूल्योंको साझा करते हैं. और हम ये भी जानते हैं कि रूस से भारत के विशेष संबंध हैं. वैसेसंबंध हमारे साथ नहीं हैं. ये जाहिर है, लेकिन कोई बात नहीं." दरअसल अमेरिका नेUNSC में रूस के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था. उस प्रस्ताव में कहा गया कि रूस कोयूक्रेन की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से अपनी सेना को बिना देर किए, बिना किसी शर्त केपूरी तरह से वापस बुलाना चाहिए. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि रूस अपना वो फैसलाभी वापस ले, जिसमें उसने डोनेस्क और लोहान्स्क को अलग स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करदिया है. साथ ही आगे से संयुक्त राष्ट्र के किसी भी सदस्य के साथ दोबारा ऐसी हरकतना करे. अमेरिका के इस प्रस्ताव से भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने दूरी बना लीथी.