चेर्नोबिल न्यूक्लियर सेंटर पर रूस का ड्रोन अटैक, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने की हमले की पुष्टि
Russia Attacked on Chernobyl: हमले के बाद Chernobyl Nuclear Plant का रेडिएशन लेवल सामान्य बना हुआ है.

रूस ने यूक्रेन स्थित चेर्नोबिल न्यूक्लियर सेंटर पर ड्रोन से हमला (Chernobyl Drone Attack) किया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले की पुष्टि की है. 1986 में हुए हादसे के बाद यहां के एक रिएक्टर के अवशेष की रक्षा के लिए एक कवच बनाया गया है. इसको न्यू सेफ कन्फाइनमेंट (NSC) कहते हैं. ड्रोन इसी के ऊपर गिरा था. जेलेंस्की का कहना है कि ये एक आतंकी हमला था और इस तरह परमाणु स्थलों को निशाना बनाना खतरनाक है.
हमले के बाद न्यूक्लियर प्लांट का रेडिएशन लेवल सामान्य बना हुआ है. और आग पर भी काबू पा लिया गया है. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी इस घटना की जानकारी दी है. उन्होंने X पर लिखा,
13-14 फरवरी की रात को लगभग 01:50 बजे, चेर्नोबिल साइट पर IAEA की टीम ने NSC से एक विस्फोट की आवाज सुनी, जो चेर्नोबिल न्यक्लियर प्लांट के रिएक्टर 4 के अवशेषों की सुरक्षा करता है. उसमें आग लग गई.
IAEA की टीम मौके पर मौजूद है और स्थिति की जांच कर रही है. IAEA न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के शांतिपूर्ण और सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देता है.
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Chernobyl का इतिहासचेर्नोबिल असल में यूक्रेन की दलदली उत्तरी सीमा का एक कस्बा है. चेर्नोबिल अपने अतीत में गुलजार था, लेकिन आज इसका एक हिस्सा पूरी तरह वीरान है. वजह है चेर्नोबिल टाउन से कुछ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बना न्यूक्लियर पावर प्लांट. ऑफिशियली इसका नाम था- V.I. Lenin Atomic Power Plant. ये प्लांट काफी समय से असक्रिय है. मतलब बंद है. लंबे अरसे से ये एक टूरिस्ट स्पॉट बना हुआ है. साल 1986 में 26 अप्रैल के दिन इस प्लांट में एक जबरदस्त धमाका हुआ था, जिसने चेर्नोबिल के एक बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था. उस वक्त यूक्रेन सोवियत संघ का ही हिस्सा था. बताया जाता है कि धमाके और उसके बाद हुए न्यूक्लियर रेडिएशन में सवा लाख के करीब लोग मारे गए थे.
हादसा कैसे हुआ था?26 अप्रैल, 1986 को चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक टेस्ट किया गया. दरअसल, ये टेस्ट इमरजेंसी फंक्शन को चेक करने के लिए किया गया था. यानी ये देखने के लिए कि आपात स्थितियों में रिएक्टर सही से काम करता है या नहीं. इस वक्त चेर्नोबिल पावर प्लांट में 26 साल के 'लेनोइड टॉपटोनोव' बतौर रिएक्टर कंट्रोल इंजीनियर तैनात थे. टेस्ट के दौरान वहां के लेनोइड और बाकी कर्मचारियों ने रिएक्टर में लगी रॉड्स पर कंट्रोल खो दिया और सिस्टम मैन्युअल कंट्रोल से ऑटो कंट्रोल पर चला गया. अब रिएक्टर को संभालना संभव नहीं था. इसी बीच रिएक्टर से निकली ऊर्जा के चलते रिएक्टर का पानी तेजी से भाप बनने लगा और वो जगह जहां रिएक्टर था उसकी छत गिर गई. रिएक्टर से होने वाला धमाका इतनी तेज था कि आसपास के काफी लोगों की धमाके में मौत हो गई. छत खुली होने की वजह से रिएक्टर से होने वाला रेडिएशन जल्द ही आसपास के इलाकों में फैल गया, और इसने हजारों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा संख्या फायर वर्कर्स की थी.
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