खाकी नेक्कर, कुहनियों तक मुड़ी स्लीव वाली सफ़ेद शर्ट, काली टोपी और काला जूताआरएसएस की पहचान रहा है. इस पूरे परिधान के कॉम्बिनेशन को गणवेश के नाम से जानाजाता है. 91 साल हो गए हैं इस गणवेश को. अब शायद इसे बदल दिया जाए.मीटिंग चल्लई है. नागपुर में. सीनियर जर्नलिस्ट राहुल कंवल ने ट्वीटिया के बतायाहै.गणवेश लगभग एक शताब्दी से चला आ रहा है और संघ में अनुशासन और गर्व का सिम्बल है.लेकिन कहा जा रहा था कि संघ के नए बने मेम्बर्स को ढीली फ़िटिंग की हाफ़ पैंट पहननेमें कुछ शर्मिंदगी सी महसूस होती थी. वैसे भी हाफ़ पैंट अब या तो एथलीट पहनते दिखतेहैं या केप्री पहने कूल लौंडे. ख़ाकी की ढीली हाफ़ पैंट तो सचमुच एलियन कॉन्सेप्ट बनचुका है.मनमोहन वैद्य जो कि संघ के प्रचारक हैं, कहते हैं कि "ये कहना कि डिसीज़न अभी लेलिया जायेगा या मामले पर वोटिंग होगी, अभी बहुत जल्दबाजी होगी. अगर इस मुद्दे परसभी का अग्रीमेंट नहीं होगा तो इस मामले को अगले पांच सालों के लिए टाल दियाजायेगा."कन्हैया की जेल से जेएनयू वापसी के बाद वाले स्पीच को हम रिवाइंड करें तो याद आएगाकि उसमें उसने गोलवलकर और मसूलिनी की दोस्ती और मसूलिनी की काली टोपी जो संघ का एकहिस्सा बन पड़ी, की बात की थी. नयी ड्रेस में ये वाली काली टोपी भी शामिल होगी.मसूलिनी और संघ के टोपेनयी जनरेशन को दिमाग में रखकर खाकी निक्कर की जगह नीली या ग्रे पैंट आएगी. नीलीवाली के आने की ज़्यादा संभावना है. आरएसएस ने आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ट्रैक पैंट्सपहनने की छूट दे रखी है.