कांशीराम के जमाने के नेता, जिन्होंने बसपा में 30 साल दिए, पार्टी छोड़ते हुए बड़ी बात कह दी!
अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में शामिल हुए आरएस कुशवाहा.
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आरएस कुशवाहा (माइक पर बोलते) सपा में शामिल हो गए हैं. (फोटो- The Lallantop)
बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा 17 अक्टूबर को सपा में शामिल हो गए. अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने समाजवादी पार्टी जॉइन की. उनके साथ बसपा के और भी कई नेताओं ने सपा जॉइन की. इनमें पूर्व सांसद कादिर राणा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी शामिल रहे.
आरएस कुशवाहा ने कहा –
“आज मैं अपने तमाम साथियों के साथ सपा में शामिल हो रहा हूं. सपा की विचारधारा को स्वीकार करते हुए आज हम एक साथ आ रहे हैं. लखीमपुर से मैं विधायक रहा हूं. जिस तरह से अब वहां किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी जा रही है, आज सभी लोग वहां त्रस्त हैं. सब मौके की तलाश में हैं कि कब उन्हें मौका मिले और कब सपा की सरकार बनवा दें.”आरएस कुशवाहा बसपा के उन नेताओं में से रहे हैं, जो कांशीराम के समय के हैं. अब पार्टी छोड़ने पर उन्होंने कहा –
“बसपा में मैने 30 साल तक काम किया, लेकिन आज पार्टी अपने मूल विचार से, बाबा साहेब के नारे से भटक गई है. इसीलिए आज एक-एक करके सब पुराने साथी दुखी होकर सपा में आ रहे हैं, बड़ी तादाद में आ रहे हैं.”आरएस कुशवाहा 2002 से 2007 तक निघासन से विधायक रहे. फिर 2010 से 2016 तक लखीमपुर खीरी से MLC रहे. मई 2018 से अगस्त 2019 तक बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे. वे ओबीसी समाज से आते हैं और लखीमपुर खीरी के ही रहने वाले हैं. UP में कुशवाहा, मौर्या, शाक्य सैनी के बीच आरएस कुशवाहा की अच्छी पकड़ मानी जाती है. 2 और बसपाई सपा में जा सकते हैं बता दें कि बसपा से निष्कासित नेता लालजी वर्मा और रामअचल राजभर भी समाजवादी पार्टी जॉइन कर सकते हैं. दोनों नेताओं ने हाल ही में अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. इसके बाद कयासबाजी तेज है कि दोनों जल्द सपा से जुड़ सकते हैं. ये दोनों नेता भी कांशीराम से लेकर मायावती तक के करीबियों में शुमार रहे. 2017 तक समीकरण इन दोनों नेताओं के पक्ष में थे. तभी इनको विधायकी का टिकट मिला भी और दोनों ने भाजपा के जबरदस्त प्रदर्शन के बीच सीट भी निकाली. लेकिन फिर पंचायत चुनाव के बीच इनकी पार्टी से ठन गई. पुराने नेताओं का बसपा से जाना लगातार जारी है. कांशीराम के समय के नेताओं का जाना पहले भी बसपा के तमाम ऐसे नाम रहे हैं, जो कांशीराम के समय से पार्टी के साथ थे, लेकिन मायावती के कमान संभालने के बाद सभी बाहर होते गए. आरके चौधरी, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, सोनेलाल पटेल, रामवीर उपाध्याय, जुगल किशोर, बृजेश जयवीर सिंह और इंद्रजीत सरोज जैसे नेताओं की लंबी-चौड़ी लिस्ट है. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रॉफेसर विवेक कुमार ने इस विषय पर The Lallantop से बात करते हुए कहा था कि कांशीराम ने पैन इंडिया लेवल से को-ऑर्डिनेटर तैयार किए थे. पंजाब से हरभजन लाखा, महाराष्ट्र से सुरेश माने वगैरह. UP से भी उन्होंने ऐसे नेता तैयार किए जो अच्छी-ख़ासी अपील रखते थे. लेकिन मायावती के आने के बाद ये ट्रेंड बदल गया. को-ऑर्डिनेटर UP से ही निकलने लगे. बाकी राज्यों की भूमिका कम हुई. कांशीराम की तरह नेता तैयार करने का चलन कम हुआ और पावर सेंटर एक होने से तमाम नेताओं ने धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खो दी.

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