मौजूदा वक्त में आम आदमी की सबसे बड़ी मुसीबत क्या है? जाहिर है अपने रोज के खर्चेके लिए नोट का जुगाड़ करना. उससे बड़ी मुसीबत है 2000 के नोट के छुट्टे कराना.लेकिन एक मुसीबत इससे भी बड़ी है. जिसकी तरफ ध्यान जाएगा तो हाथ से तोते उड़जाएंगे. क्योंकि छुट्टे लेने के चक्कर में लोग 10 और पांच के सिक्के भी खुशी खुशीले रहे हैं. उनको पता चले कि ये सिक्के नकली हैं. तो क्या होगा. बवाना में पुलिस नेएक नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री सीज की है. 19 हजार रुपए महीने के किराए पर दोमंजिलों में चल रही थी ये फैक्ट्री.इन दो मंजिलों पर मोटे परदे लगे थे. ताकि बाहर से कुछ अंदर दिख न सके. नीचे वालेफ्लोर पर एसी लगा था. मशीने लगी थीं. 6 हाइड्रोलिक मशीनें. ऊपर वाली मंजिल में किचनथा. जिसमें मजदूर लोग वहीं पर खाना बनाकर खाते थे. पिछले 6 महीने से 24 घंटे नकलीसिक्के बनाने का काम चल रहा था. ये सिर्फ एक फैक्ट्री का हाल है. अक्टूबर से अब तकपुलिस ने हरियाणा और दिल्ली की तीन फैक्ट्रियों में छापा मारा. 12.24 लाख रुपए केनकली सिक्के बरामद किए.स्विफ्ट डिजायर की डिक्की से रिकवरी शुरू हुईअक्टूबर महीने में एक छोटी सी खबर सबने पढ़ी होगी अखबारों और वेबसाइट्स पर. भलेनिगाह गड़ाकर ध्यान न दिया हो और भूल गए हों. चलो फिर याद दिला देते हैं. दिल्ली केरोहिणी में एक स्विफ्ट डिजायर में पुलिस को खजाना मिला था. प्लास्टिक की दो बोरियोंमें 40 हजार रुपए. बोरियों में 20 पैकेट थे. हर पैकेट में 10 रुपए के 100 सिक्केथे. इस गाड़ी को चला रहा था 42 साल का नरेश कुमार. शाहाबाद एरिया से आ रहा था.पुलिस ने धर लिया. ये रहे फैक्ट्री के मालिकनरेश को पुलिस ने हौंका तो उसने सारी कच्ची पक्की कहानी उगल दी. बताया कि इस पूरेरैकेट को दो लोग चला रहे हैं. स्वीकार लूथरा. उर्फ सोनू. और उपकार लूथरा उर्फ राज.डीसीपी एमके तिवारी बताते हैं कि इनके अलावा एक और नाम बताया नरेश ने. राजेश कुमार.ये इस फैक्ट्री का मैनेजर है. राजेश को तो अरेस्ट कर लिया गया. लेकिन लूथरा बंधुअंतर्ध्यान हो रखे हैं अभी. पुलिस उनको पूरा जोर लगाकर खोज रही है.सिक्के ढालने का काम किसका और कर रहा कौनसिक्के इश्यू करना रिजर्व बैंक का काम है. सरकार ने सिक्के ढालने वाली यूनिट चारशहरों में लगा रखी हैं. मुंबई, कोलकाता, नोएडा और हैदराबाद. रिजर्व बैंक कीसिरदर्दी अपने सिर लेने वाले लूथरा ब्रदर्स जाहिर है अच्छा माल कूट रहे थे. उसीकेलिए सारा खेला रचाया. अब सुनो हैरान करने वाली बात. पुलिस ने इन फैक्ट्रियों सेपांच पैकेट डाई बरामद की पांच के सिक्कों की. 12 पैकेट डाई 10 के सिक्कों की. जांचकी तो पता चला कि सेम टू सेम यही डाई रिजर्व बैंक भी यूज करता है सिक्के बनाने केलिए. फोरेंसिक लाइब्रेरी भेजकर अब ये पता लगाया जा रहा है कि डाई इनके हाथ कैसेलगी, या किसने पहुंचाई. Image: Indian Expressयहां से आता था कच्चा माल, ऐसे चलती थी टकसालबवाना इंडस्ट्रियल एरिया के मेन रोड पर है ये 100 स्क्वायर फिट का मकान. जिसमेंफैक्ट्री चल रही थी. 11 महीने पहले मकान मालिक को 3 लाख रुपए एडवांस देकर किराए परलिया था. 19 हजार पर मंथ में. शुरुआत की टेफलॉन कोटिंग के धंधे से. लेकिन 5 महीनेमें औकात में आ गए. धंधा नकली सिक्कों पर शिफ्ट हो गया. हाइड्रोलिक मशीनें मायापुरीसे खरीदी गईं थीं. 2 प्रेशर मशीनें. वहीं से कच्चा माल उठाया जाता था.मजदूरों को बता रखा था "हम RBI से हैं"अब सुनो कित्ते लोगों को रोजगार मिल रखा था. बिहार के मधुबनी जिले से 13 मजदूर आएथे. बता रहे हैं कि हमको 6 महीने से जबरदस्ती इस काम में लगा रखा है. 20 साल काराजीव कुमार लक्ष्मीपुर गांव का है. पुलिस को बताया कि दिल्ली आने के बाद वो रोजमंगोलपुरी चौक पर बैठता था. कोई काम मिल नहीं रहा था. एक दिन राजेश कुमार आया. उसनेकहा कि टेफलॉन फैक्ट्री में काम करने के लिए 15 आदमी चाहिए.राजीव ने अपने दोस्त और रिश्तेदारों को गांव से बुलाया. कुल 13 लोग जमा हुए. राजेशने सबके लिए वहीं रहने खाने और 10 हजार रुपए महीने देने का इंतजाम किया. फिर दोहफ्ते बाद लूथरा ब्रदर्स आए. बोले कि "हम RBI से हैं." सारे लोगों के फोन ले लिए.कहा 24 घंटे काम होगा. कोई भी फैक्ट्री से बाहर नहीं जाएगा. सबको सैलरी मिलेगी घरजाने के टाइम.लूथरा ब्रदर्स आज से नहीं सात साल से नकली सिक्के बनाने की इंडस्ट्री में हैं. इसलाइन के इतने बड़े कौवा हो गए कि धंधे को बचाने का पूरा हुनर आजमाया. मजदूरों कोबता रखा था कि RBI से सिक्के बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल रखा है. मशीनरी खरीदने सेसिक्के खपाने तक पूरा ध्यान रखते थे पकड़ में न आने का.ये अपने साथ काम करने के लिए उन लोगों को पकड़ते थे जिनको कोई कर्ज अदा करना हो. यारातोंरात पैसा बनाना हो. उनको अच्छी सैलरी का लालच देकर अपने साथ काम करने को राजीकर लेता था. जैसे इन लोगों को किया.राज कुमार. ये आदमी 6 साल पहले ऑटो चलाता था. क्रिकेट में सट्टा लगाया था 50 लाखका. पूरा हार गया. अब कर्ज पूरा करना था. लूथरा भाइयों से जान पहचान थी. उन्होंनेकहा कि हम तुम्हारा कर्ज अदा कर देंगे. तुम हमारे साथ काम करो. बंदा मान गया.नरेश कुमार कार पार्ट्स का धंधा करता था. हरियाणा की चखरी दादरी में. उसकी दुकान परलूथरा आए. बताया अपना डायलॉग कि हम RBI से हैं. और सिक्कों का कारोबार करने लगे.यूं होता था फायदाइंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बवाना फैक्ट्री से पुलिस ने पांच लोगों कोअरेस्ट किया है. इनमें एक महिला भी है. NIA और RBI के अफसर इस गिरफ्तारी के बाददिल्ली पुलिस से मिले. और डीटेल निकालने के लिए.नरेश को जब पुलिस ने दबोचा तब उसने खुद को पंजाब नेशनल बैंक का एंप्लॉई बताया था.सिक्के क्लाइंट्स को पहुंचाने जा रहा था. बाद में सच सामने आया. पता लगा कि ये लोगपर्चून की दुकानों से लेकर शॉपिंग मॉल्स तक नकली सिक्के पहुंचाते थे. 10 के एकसिक्के पर इन्हें 7 रुपए का फायदा होता था.10 रुपये के नकली सिक्के पकड़े जा रहे हैं, जान लो कौन सा असली हैनकली सिक्के निकालने वालों तुम्हें खुद क्या बचता होगा?