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लोग गए, श्री श्री गए, फेस्टिवल खतम, अब बचा क्या, अब बचा क्या?

वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल खत्म हो गया है, सारा हंगामा भी सिमट गया लेकिन अब जो रह गया वो भी देख लीजिए.

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आशीष मिश्रा
15 मार्च 2016 (अपडेटेड: 14 मार्च 2016, 04:16 AM IST)
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तीन रोज का वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल खत्म हुआ. 155 देशों के लोग आए थे. माहौल छुटके के कनछेदन वाला था. तीन दिन में सब पहुंचे. प्रधानमंत्री भी, लोकसभा स्पीकर भी. महेश शर्मा पहुंचे, हर्षवर्धन, अमित शाह, वेंकैया नायडू, रविशंकर प्रसाद और सुरेश प्रभु पहुंचे. राजनाथ और सुषमा स्वराज भी. इतने नेता थे कि चाहते तो सदन के एकाध सत्र वहीं हो सकते थे. विपक्ष की चिंता न कीजिए, केजरीवाल भी थे.
रविशंकर का होल स्क्वायर

रविशंकर का होल स्क्वायर

कार्यक्रम के पहले NGT ने अड़ंगा लगाया था. 100 करोड़ के जुर्माने की बात चली थी, फिर 5 करोड़ हुआ, फिर 25 लाख पर बात आई. मुझे तो लग रहा था, अंत में रविशंकर NGT के गाल खींचेंगे, 5 रुपिया का कलदार और संतरा  वाला बिस्कुट देके चले जाएंगे.  लेकिन अब क्या? अब तो कार्यक्रम खत्म हो गया है. अब पीछे क्या रह गया?

तो रह गई हैं 70 FIR, ढेर सा कूड़ा और अकहाय बयान

खूब चोट्टे आए थे भगवान तक को नहीं छोड़ा 
लैपटॉप, पैसे, मोबाइल यहां तक कि भगवान गणेश जी की मूर्ति तक चोरी हो गई, तीन दिन में 70 से ज्यादा FIR दर्ज हुई हैं. 30 लोगों  को  धरा  भी  गया  है, जमुना  तीरे  से , चोरकटई करते  हुए. किसी का ग्रीन रूम से मोबाइल चोरी हो गया, किसी के जेब से पैसे.
कूड़ा 
हम इंसान हैं, चांद पर भी जाते हैं तो कूड़ा छोड़ आते हैं, फिर ये तो दिल्ली थी. लाखों लोग आए थे, गए तो पीछे यही रह गया. 15 गाड़ियां और 60 जने लगे हैं, साफ़ कर रहे हैं. बात ये कि आए थे यमुना की सफाई के नाम पर, यमुना जो साफ़ हुई हो दिख ही रही है. अब अपना फैलाया कूड़ा बटोर रहे हैं.
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पंचायत
एक हैं जगतगुरु,  द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती. वही वाले जिनने एक रिपोर्टर को लपाड़ा मार दिया था. ये पूछने पर कि मोदी पीएम बनेंगे या नहीं. तो उनने कहा. दिखावा है रविशंकर का कार्यक्रम. तीन दिन में यमुना को इतना गंदा किया है कि सालों में साफ़ न होगी. आर्ट कह देने से थोड़े न कुछ होता है. प्रधानमंत्री पता नहीं काहे उसके कार्यक्रम में गए, वहां जाने से कुछ नहीं होगा. वो बाल रंगते हैं . लंबा कुर्ता पहनते हैं, लोग उन पर फूल बरसाते हैं. ये जीने की कला नहीं है.

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