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ट्रंप के अफसरों की जासूसी कर रहा इजरायल! अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बड़ा दावा

अमेरिकी रक्षा कर्मियों को पता चला कि उनके फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था जो कथित तौर पर बातचीत की निगरानी करने में सक्षम था.

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7 जून 2026 (पब्लिश्ड: 10:31 PM IST)
report claims israel spying on us offcials engaged in negotiations with iran
खबरें हैं कि इजरायल ने ईरान के साथ नेगोशिएसन करने वाले अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी की (PHOTO-Getty)
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान के खिलाफ साझेदारी पूरी दुनिया ने देखी. इस लड़ाई में दोनों नेता दोस्त की तरह नजर आए लेकिन हाल ही में नेतन्याहू को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो ट्रंप को एकदम पसंद नहीं आएगी. रिपोर्ट में अमेरिकी इंटेलिजेंस का जिक्र कर दावा किया गया है कि इजरायल ने हाल ही में कुछ अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी की थी. ये वही अधिकरी थे, जो कथित तौर पर ईरान के साथ बातचीत कर डील फाइनल करने की कोशिश कर रहे थे.

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि हो सकता है कि इजरायली एजेंसियों ने ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका के रुख को समझने के लिए सर्विलांस और जासूसी को बढ़ा दिया हो. रिपोर्ट के अनुसार, ये जासूसी खासतौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के मुख्य नेगोशिएटर स्टीव विटकोफ, पेंटागन के अधिकारी एलब्रिज ए. कोल्बी और उनके मुख्य सहयोगियों में से एक माइकल पी डिमिनो IV पर फोकस थी. 

हालांकि, इंटेलिजेंस की दुनिया में ये बात नई नहीं है. मित्र देश भी एक-दूसरे की जासूसी करते हैं क्योंकि हर देश के हित अलग-अलग होते हैं. अमेरिका और इजरायल भी लंबे समय से जानते हैं कि दोनों देश एक-दूसरे के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करते हैं, लेकिन कुछ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस बार की इजरायली गतिविधियां सीमाओं से आगे निकल गई हैं. इजरायल ने इस बार वो अदृश्य लाइन क्रॉस कर दी है.

अमेरिका की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने इजरायल द्वारा अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों की निगरानी करने की कथित कोशिशों से जुड़ी कई घटनाओं की जांच की. इस जांच में इजरायली जासूसी के खतरे का स्तर ‘हाई’ से बढ़कर ‘क्रिटिकल’ हो गया. DIA की यह रिपोर्ट तब तैयार की गई जब अमेरिकी रक्षाकर्मियों को पता चला कि उनके फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था जो कथित तौर पर बातचीत की निगरानी करने में सक्षम था. संभव है कि उस सॉफ्टवेयर की वजह से इजरायली एजेंसियों को उन लोगों के मोबाइल के माइक्रोफोन और कैमरा तक का एक्सेस मिल गया हो. 

वीडियो: ईरान ने कुवैत और बहरीन पर क्यों हमला किया?

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